28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में चल रही खींचतान, भड़क रही गुस्से की आग

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. नेत्ररोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर ने अपने ही विभागाध्यक्ष पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया. कई और विभागों में भी हालात बेहद खराब हैं.
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कानपुर

•

image

Alok Pandey

•

Updated: 20 Sep 2018, 5:55 PM IST

Kanpur

मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में चल रही खींचतान, भड़क रही गुस्से की आग

कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. नेत्ररोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर ने अपने ही विभागाध्यक्ष पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया. कई और विभागों में भी हालात बेहद खराब हैं. इससे पहले आर्थोपेडिक विभाग के एक प्रोफेसर ने भी इस्तीफा दे दिया है. इसी विभाग में हेडशिप को लेकर भी खींचतान चल रही है.

खींचतान आई सामने
गौरतलब है कि इस क्रम में पैथोलॉजी विभाग में दो प्रोफेसरों के बीच की खींचतान भी खुल कर सामने आई है. इन सबके बीच अंदरुनी खींचतान की वजह से मरीजों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. कुछ दिन में एमसीआई भी मेडिकल कॉलेज का इंस्पेक्शन कर सकती है. ऐसे में फैकल्टी के बीच ये असंतोष और खींचतान कहीं मेडिकल कॉलेज के लिए भारी न पड़ जाए.

एक विभाग के दो एचओडी के बीच भड़की आग
पैथोलॉजी विभाग में दो प्रोफेसरों के बीच एचओडी बनने का झगड़ा हुआ. झगड़ा इस कदर बढ़ा कि पुलिस को बुलाना पड़ गया. इसके बाद हुआ यह कि एक ही विभाग के दो टुकड़े हो गए. एक एचओडी बनी क्लीनिकल पैथोलॉजी की और दूसरे पैथोलॉजी के एचओडी. मरीजों को नुकसान यह हुआ है कि काफी वक्त पहले मेडिकल कॉलेज में बनी एक लैब आज तक शुरू ही नहीं हुई, जिसमें कैंसर मार्कर जांच से कैंसर पेशेंट्स को फायदा मिलना था.

कोर्ट तक पहुंची ये जंग
मेडिकल कॉलेज के बड़े क्लीनिकल विभाग सर्जरी में एक वक्त एचओडी बनने की लड़ाई कोर्ट तक पहुंच गई. कोर्ट से आदेश कराने के बाद प्रो. संजय काला को दोबारा एचओडी बनाया गया.

ऐसे साबित की दावेदारी
मेडिकल कॉलेज के एक और बड़े क्लीनिकल डिपार्टमेंट में भी एचओडी बनने की खींचतान जोरों पर है. यहां के एचओडी समेत दो प्रोफेसरों की मूल तैनाती दूसरे मेडिकल कॉलेजों में थी. जोकि शासन ने कुछ दिन पहले ही खत्म कर दी. इस विभाग के एचओडी जिनकी खुद की संबद्धता शासन ने खत्म की वह खुद तो रिलीव हुए नहीं, लेकिन विभाग के दूसरे प्रोफेसर को रिलीव कर दिया. इससे तंग आकर उन प्रोफेसर ने प्रमुख सचिव को अपना इस्तीफा भेज दिया. वहीं एक और प्रोफेसर ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए खुद की दावेदारी पेश कर दी. जिस पर फैसला होना अभी बाकी है.

फैकल्टी पर पड़ रहा असर
मेडिकल कॉलेज में कुछ ही दिनों में एमसीआई का इंस्पेक्शन होना है. कॉलेज और शासन की ओर से एक तरफ तो फैकल्टी पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है. वहीं इस असंतोष की वजह से दो सीनियर फैकल्टी मेंबर्स का इस्तीफा और कई विभागों में रेग्युलर फैकल्टी की कमी इस इंस्पेक्शन के दौरान कॉलेज पर भारी पड़ सकती है. मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें कम होने का खतरा मंडरा रहा है.