
कानपुर। कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में गोरखपुर जिला कारागार में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी जहां पूर्वाचंल में लोग उन्हें थर-थर कापते थे तो वहीं उन्होंने कानपुर में भी अपना सम्राज्य खड़ा कर लिया था। अमरमणि ने फर्जी नाम-पता दर्ज करा राईफल और पिस्टल का लाइसेंस पास कराया था। शिकायत के बाद तत्कालीन डीएम बीएस भुल्लर ने उनके लाइसेंटी हथियारों के लाइसेंस रद्द कर लिया था, लेकिन सियासत के माहिर खिलाड़ी ने जेल में रहते हुए सरकारी सिस्टम में सेंध लगा अपने हथियार बचा लिए। लेकिन चार दिन पहले डीएम सुरेंद्र सिंह ने उन पर गाज गिरा दी। सरकारी असलहों को लाइसेंस रद्द कर उनकी आमद के निर्देश दे दिया।
क्या था पूरा मामला
पूर्व मंत्री पर आरोप है कि के. ब्लाक किदवई नगर निवासी एक व्यक्ति के पते पर उन्होंने 1983 में बंदूक और 1984 में रिवाल्वर का लाइसेंस ले लिया था। तब उन्होंने उक्त पते पर खुद के निवासी होने का दावा किया था। बाद में यह भेद खुला और फिर 13 अप्रैल 1998 को जब बीएस भुल्लर डीएम बने। उनके सामने यह मामला आया तो सुनवाई के बाद उन्होंने लाइसेंस रद करने का निर्णय लिया। मामले में पूर्व मंत्री की तरफ से मंडलायुक्त के न्यायालय में डीएम के फैसले के विरुद्ध अपील की गई। मंडलायुक्त ने डीएम को आदेशित किया कि वे गोरखपुर के एसएसपी से रिपोर्ट मंगा लें और फिर कार्रवाई करें। मामला फिर से डीएम न्यायालय में आ गया था। कई बार डीएम ने एसएसपी गोरखपुर को पत्र भेजा, लेकिन वहां से रिपोर्ट नहीं आई।
डीएम ने SSP को पत्र लिखकर मांगी रिपोर्ट
डीएम सुरेंद्र सिंह ने जवाब नहीं मिलने पर 13 मार्च 2018 को एसएसपी गोरखुप को फिर पत्र भेजा और रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा। अब रिपोर्ट आ गई है तो लाइसेंस रद होना तय है। एसएसपी ने अपने पत्र में लिखा है कि हुमायूंपुर निवासी अमरमणि त्रिपाठी का लंबा आपराधिक इतिहास है और वह वर्तमान में आजीवन कारावास की सजा में जेल में निरुद्ध हैं। उन्होंने लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की है। इसी के बाद डीएम ने उनके लाइसेंसी असलहे रद्द कर उनकी आमद के निर्देश दिए हैं। अब गोरखपुर पुलिस असलहों को बरामद कर उन्हें कानपुर लेकर आएगी और यहीं पर जमा कराएगी।
इस हत्याकांड में काट रहा सजा
कवि सम्मेलन से कोई वास्ता न रखने वाली दुनिया को मधुमिता शुक्ला का नाम 09 मई 2003 को तब सुनाई दिया जब लखनऊ की पेपरमिल कॉलोनी में मधुमिता की गोली मार हत्या कर दी गई थी।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मधुमिता के प्रेग्नेंट होने का पता लगा था. उसके अंदर 7 महीने का बच्चा पल रहा था। डीएनए जांच में पता चला कि मधुमिता के पेट में पल रहा बच्चा उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी का है। उत्तर प्रदेश के सियासी हल्को में भूचाल आ गया। अमरमणि त्रिपाठी उन नेताओं में से थे जो उस दौर में हर बदलती सत्ता का ज़रूरी हिस्सा हुआ करते थे। अमरमणि पूर्वांचल के नेता हरिशंकर तिवारी के राजनीतिक वारिस थे।लगातार 6 बार विधायक रहे तिवारी की विरासत को आसानी से समझने के लिए जान लीजिए कि वो जेल से चुनाव जीतने वाले पहले नेताओं में से एक थे।
कांग्रेस से की थी राजनीति की शुरूआत
अमरमणि त्रिपाठी की राजनीति की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के विधायक हरिशंकर तिवारी के साथ हुई।पहले वो बसपा में गए फिर सपा में. 2001 की भाजपा सरकार में भी त्रिपाठी मंत्री थे। तभी बस्ती के एक बड़े बिजनेसमैन का पंद्रह साल का लड़का राहुल मदेसिया किडनैप हो गया. रिहा होने पर पता चला कि किडनैपर्स ने उसे अमरमणि के बंगले में ही छिपा रखा था।अमरमणि को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया गया। इसके 2 साल बाद ही अमरमणि और उनकी पत्नी मधुमिता की हत्या के आरोप में पकड़े गए। जेल की दीवारें अमरमणि के सियासी सफर को रोक नहीं पाईं।2007 में अमरमणि ने गोरखपुर जेल से ही चुनाव लड़ा. अमरमणि महाराजगंज की लक्ष्मीपुर सीट से बीस हज़ार वोट से जीत गए।
हर दल से नाता
गुरु की तर्ज पर अमरमणि भी हमेशा सत्ता के पाले में रहे।सपा, बसपा और भाजपा में जो भी लखनऊ के पंचम तल (मुख्यमंत्री दफ्तर) पर आया अमरमणि उसके खास हो गए. न कोई विचारधारा की दुहाई न कोई सिद्धांतों का हवाला, सायकिल से लेकर सिविल तक सारे ठेकों की राजनीति ही इस तरह के नेताओं की सियासत का आधार रहा है। अमरमणि के कद के चलते जहां एक ओर उनका हर पार्टी में इस्तकबाल करने वाले कई लोग थे.। ऐसों की कमी नहीं थी जो पैराशूट से कैबिनेट में उतरे इन नेताओं को इनकी जगह से हटाना चाहते थे। मधुमिता शुक्ला हत्याकांड ऐसा ही मौका बना. केस की शुरुआत में ही जांच को प्रभावित करने की शिकायतों के चलते इस हत्याकांड की इंक्वायरी सीबीआई को सौंप दी गई। मामले की जांच के बाद एसपी लीडर और मिनिस्टर अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि और भतीजे रोहित चतुर्वेदी समेत शूटर संतोष राय और प्रकाश पांडे को शामिल बताकर चार्जशीट दाखिल की गई। जिसमें बाहुबली का उम्रकेद की सजा हुई
Published on:
05 May 2018 10:23 am
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