
भूले-बिसरे गीत बनें कानपुर के एतिहासक कुएं, नहीं सुनाई देती पनिहारिन की हंसी ठिठोली
कानपुर। तीन दशक पहले कानपुर के साथ ही आसपास के गांवों में पेयजल का मुख्य जरिए कुआं हुआ करते थे। दुल्हन लेने जाने से पहले दुल्हे की मां उससे कुअां पुजवाती, बहू विदा होकर ससुराल आने से पहले फिर कुंए के पास जाती। भोर पहर होते ही कुओं में पनिहारिन की हंसी ठिठोली से पूरा इलाका सराबोर हो जाया करता था, लेकिन भ्रष्ट सरकारी सिस्टम के चलते शहर के 13 सौ कुएं काल के गाल में समा गए। जो कुएं मिले भी, उन्हें सुरक्षा का हवाला देकर या तो पाट दिया गया या फिर पक्की चिनाई कर भवन निर्माण करा लिया गया। इसके अलावा जो बचे उन्हें कूड़ाघर बनाकर बंद कर दिया है। सीएसए के वैज्ञानिक अनुरूद्ध दुबे कहते हैं कि पानी से लबालब भरे ये कुएं न केवल हमारी पानी की जरूरत पूरा करते थे बल्कि जलस्तर बनाए रखने में भी मदद करते थे। पर लोगों ने अपने आशियानों के चलते पहले जंगलों को खत्म किया, फिर पुरानी धरोहरों को नष्ट कर उनमें इमारतें खड़ी करवा लीं।
13 सौ कुएं लापता
कानपुर के अंदर सरकारी अभिलेखों में 13 सौ कुएं आज भी मौजूद हैं, लेकिन जमीन सच्चाई इसके बिलकुल विपरीत। 40 लाख की आबादी वाले इस शहर में लोगों ने अधुनिकता की दौड़ के चलते अपने धरोहरों पर ध्यान नहीं दिया और उन्हें खत्म कर आशियाने बना लिए। एक वक्त था कि नदी, तलाब और कुएं से गांवों की पहचान हुआ करती थी और यही लोगों को पानी मुहैया कराते थे। पर थोड़ी कसरत और थोड़ी मेहनत से पानी निकालना अखरने लगा तो कुएं की जगह हैंडपंप व सबमर्सिबल पंप ने ले ली। लेकिन जलसंरक्षण की जगह किसी ने नहीं ली। आज हालात यह हो गए हैं कि साउथ का पूरा इलाका भीषण जलसंकट से गुज रहा है। पानी की टंकियां शोपीस में तब्दील हो गई हैं तो वहीं हैंडपंप पानी की जगह बालू उगल रहे हैं। विकराल पानी की समस्या को लेकर शहर भी में आंदोलन हो रहे हैं, पर किसी ने कुआं के बारे में अलाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से शिकायत दर्ज नहीं कराई।
फिर भी नहीं बच पाए कुएं
नदी बचाव अभियान के सदस्य विवके तिवारी कहते हैं कि कुएं से पानी कम निकलता था और बारिश में संभरण हो जाता था लेकिन अब धरती की कोख से करोड़ों लीटर पानी रोज खींचा जा रहा है लेकिन बारिश का दस फीसद भी धरती की गोद में नहीं जा पा रहा। इसी का नतीजा है कि जलस्तर गिर रहा है। कुओं की इसी महत्ता को देखते हुए भारतीय संस्कृति ने कुओं को विवाह परंपरा से जोड़कर कुआं पूजन शुरू किया था। हालांकि यह उपाय महज रस्म अदायगी रह गई। शादी सूखा कुआं पूजने को लोग तैयार हैं लेकिन जल संरक्षण करने को नहीं। विवके कहते हैं कि बुंदेलखंड के कुछ जिलों में ग्राम प्रधानों के साथ अन्य समाजसेवी संगठनों ने कुओं के जीर्णोद्धार के लिए पहल की है। 2016 से लेकर 2017 तक पचास से ज्यादा कुंए बांदा में खोदे गए हैं।
मोहल्लों के नाम के आगे कुआं
कुओं को बनाने के तरीके और उसकी मौजूदगी की महत्ता ने कई जगहों का नाम कुएं पर ही कर दिया। कालपी रोड पर फजलगंज के पहले बने कुएं के चार खंभे ने जगह का नाम ही चार खंभा कुआं कर दिया तो नौबस्ता में दासू कुआं। हालांकि चार खंभा कुआं अभी भी है लेकिन दासू कुआं जमीन में कहां दफन हो गया पता नहीं। बर्रा आठ का अंधा कुआं जगह तो बताता है लेकिन सूख गया है। केडीए की विजय नगर कालोनी में ही एक दर्जन से अधिक कुएं होते थे लेकिन सब सूख गए और पाट दिए गए। आज विजय नगर में लोग सबमर्सिबल लगाने के लिए 250 फीट तक खुदाई कराने को मजबूर हैं। धांसू कुआं निवासी राजन चौहान कहते हैं जल संरक्षण के सबसे बड़े स्त्रोत कुआं हुआ करते थे। पानी के दोहन से ज्यादा बारिश को पानी की बचत होती थी। हाथ से पानी खींचने के कारण बर्बादी न के बराबर होती थी। बारिश की एक-एक बूंद बचती थी। इसके कारण जलस्तर भी ऊंचा रहता था। बुजुर्ग बताते है कि 30 फीट तक पीने का पानी मिल जाता था, पर अब पानी बहुत नीचे चला गया है।
जल संरक्षण की निभाते थे भूमिका
सीएसए के वैज्ञनिक अनुरूद्ध दुबे कहते हैं कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक अनुष्ठान कुओं की पूजा के बगैर संपूर्ण नहीं माना जाता था। आधुनिकता की दौड़ में कुएं भी खत्म हो गए। जबकि ये जल संरक्षण में सबसे बड़ी भूमिका निभाते थे। बचे कुएं साफ कराएं जाएं। हर घर के बाहर एक पौधा जरूर लगाएं। इसके अलावा बचे कुएं साफ कराकर बारिश का पानी आने का रास्ता बना दिया जाए। इससे जल संभरण होगा और जल स्तर बढ़ेगा। अगर किसी मोहल्ले में कुआं है तो साफ कराएं, सुरक्षा की दृष्टि से जाली लगा दें ताकि गंदगी न जाए और कोई गिरे नहीं। इसमें घर की छतों पर जमा होने वाले बारिश के पानी को पाइप के जरिये भेज दिया जाए। इससे रेन वाटर हारवेस्टिंग भी जाएगी। अनुरूद्ध दुबे ने बताया कि हैंडपंप की जगह ज्यादा से ज्यादा कुएं होंगे तो पानी की समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी।
Published on:
19 Jun 2018 05:13 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
