
माता के नौ दिन जानिए इन महा औषधियों के बारे में
कानपुर। शुरू हो चुके हैं माता के नौ दिन के पवित्र नवरात्रे. ऐसे में चारों ओर माहौल है पूजा और माता के सुंदर श्रंगार का. वहीं क्या आपको मालूम है कि ये नवरात्र आपको आयुर्वेद से भी भलिभांति परिचित कराता है. दरअसल, माता के नौ रूप और नौ दिन के साथ नौ आयुर्वेद औषधियों का बड़ा गहरा रिश्ता है. हर एक दिन एक बड़ी आयुर्वेद औषधि की कहानी कहता है. आइए बताएं, माता का कौन सा दिन होता है कौन सी अनमोल औषधि के नाम.
प्रथम मां शैलपुत्री
दुर्गा कवच में प्रधान नौ औषाधियों में प्रथम है शैलपुत्री. इसे हरड़ या हिमावती भी कहते हैं. ये आयुर्वेद की प्रधान औषधि है. ये 11 प्रकार की होती है. हरीतिका, अभया, पथया, कायस्था, पूतना, अमृता, हेमवती, अव्यथा, चेतकी, श्रेयसी व शिवा.
द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी
दुर्गा कवच में दूसरी औषधि ब्रह्मचारिणी या ब्राह्मी है. ब्राह्मी के दो नाम और हैं. मंडुकरणी और मांडूकी. ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है. कारण है कि क्योंकि ये मन और मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती है. ब्राह्मी आयुवर्धक, स्मरण शक्ति वर्धक और रक्त संबंधी विकारों का नाश करती है.
तृतीय मां चंद्रघंटा
दुर्गा कवच की तीसरी औषधि का नाम चंद्रघंटा है. इसे चंद्रसूर या यमसूर भी कहते हैं. ये धनियां की तरह का पौधा होता है. इसकी पत्तियों की सब्जी बनती है. इसको भद्रा भी कहते हैं. इसके पीछे कारण है कि ये कल्याणकारी है. ये मोटापा दूर करने की प्रमुख औषधि है. इस वजह से इसको चर्महंती के नाम से भी जाना जाता है.
चतुर्थ मां कूष्मांडा
दुर्गा कवच की चौथी औषधि कूष्मांडा है. इससे पेठा नाम की मिठाई को बनाया जाता है. इसको कमला, कुमला या कुम्हड़ा भी कहते हैं. ये पेठा पुष्टिकारक, रक्त विकारों का नाशक और वीर्यवर्धक होता है. पेट करने के साथ ही मन की दुर्बलता दूर करने की ये प्रधान औषधि भी है.
पंचम मां स्कंदमाता
पांचवीं औषधि स्कंदमाता हैं. इसे पार्वती या उमा भी कहते हैं. ये अतसी अर्थात अलसी है. ये वात, पित्त, कफ तीनों ही रोगकारक दोषों की नाशक है.
षष्ठी मां कात्यायनी
दुर्गा कवच की छठी औषधि कात्यायनी है. इसका आयुर्वेदीय नाम अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका है. इसको मोइया या माचिका कहते हैं. यह कफ, पित्त, रक्त विकार आदि रोगों की नाशक है.
सप्तम मां कालरात्रि
सातवीं महा औषधि कालरात्रि है, जिसे महायोगीश्वरी कहते हैं. यही नागदौन है. यह सभी तरह के विषों व सब प्रकार के रोगों की नाशक है. मन और मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली महाऔषधि है. इसके पौधे को घर में लगाने मात्र से ही कष्ट दूर होने लगते हैं.
अष्टम मां महागौरी
दुर्गा कवच की आठवीं औषधि महागौरी है. प्राचीन काल से ही तुलसी सर्वत्र उपलब्ध और ज्यादातर घरों में मौजूद है. तुलसी, मरुवा, दवना, कुठेरक, अर्जक व वटपत्र के रूप में उपलब्ध है. सभी रक्त शोधक हैं और हृदय रोगनाशक हैं.
नवम मां सिद्धिदात्री
नौंवी महा औषधि सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं. शतावरी बुद्धि, बल, वीर्य के लिए उत्तम है. रक्त विकार तथा वात-पित्त-शोध नाशक है. हृदय को बल देने वाली त्रिदोषनाशक महा औषधि है. सिद्धिदात्री को जो भी लोग नियमपूर्वक सेवन करते हैं, उनके लिए यह जीवनी शक्ति देने वाली औषधि है. यह रक्त में पैदा होने वाले रोगाणुओं को नष्ट करती है.
Published on:
11 Oct 2018 11:40 am
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