
मिली सफलता : बिना ऑपरेशन के बंद कर दिया दो साल की बच्ची के दिल का छेद
कानपुर। एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्डियोलॉजी के नाम सफलता का एक नया किस्सा लिख दिया गया है. खबर मिली है कि यहां डॉक्टर्स ने दो साल की एक बच्ची के दिल के छेद को बंद करने में लिए अनूठी तकनीक का प्रयोग किया. इतना ही नहीं, 15 मिनट की इस प्रक्रिया में बच्ची के दिल के 1.6 सेंटीमीटर के छेद को सफलतापूर्वक बंद भी कर दिया गया. है न बड़ी सफलता. कैसे लगी ये सफलता हाथ, आइए जानें.
ऐसी मिली है जानकारी
इस बारे में डॉक्टर्स का कहना है कि इतनी कम उम्र में किसी बच्ची के दिल के छेद को बंद करना अपने आप में काफी मुश्किल है. बिना चीरफाड़ के पैर की नस से दिल के छेद को बंद करने के लिए निटेनाल मैटेरियल को डाला गया था. इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले लोगों को समझाने में भी काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन फिर बाद में सब सही हो गया.
ऐसी थी दिक्कत
यहां आपको बता दें कि मंगला विहार चकेरी निवासी आलमगीर अहमद की बेटी अलीशा (2) को आर्टियल सेप्टल डिफेक्ट था. सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. उमेश्वर पांडेय ने इस बारे में बताया कि इस वजह से बच्ची के दिल में गंदा खून और साफ खून आपस में मिल रहा था. इस वजह से हार्ट को भी काफी तेजी से काम करना पड़ रहा था, जिससे बच्ची के हार्टफेल होने का खतरा बढ़ गया था.
ऐसे की शुरुआत
बच्ची के एएसडी क्लोजर प्रक्रिया को दूरबीन विधि से अंजाम दिया. इसमें बच्ची को सिर्फ लोकल एनीस्थीसिया ही देना पड़ा. यह प्रक्रिया बाईपास सर्जरी से भी जटिल है, लेकिन इसे सफलतापूर्वक बिना चीरफाड़ के किया गया. बच्ची के परिवार के पास बीपीएल कार्ड नहीं था. इस वजह से इस प्रक्रिया में 60 हजार का खर्च आया. वहीं एसजीपीजीआई में इसके लिए दो से ढाई लाख रुपए खर्च आता है. ऑपरेशन में डॉ. विनय कृष्णा और प्रो. रमेश ठाकुर का निर्देशन रहा. प्रोसीजर के दौरान डॉ. आरएन पांडेय, डॉ. एमएम रजी मौजूद रहे.
Updated on:
1 Nov 2018, 8:37 AM IST
Published on:
1 Nov 2018, 8:37 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.