
कानपुर। पिछले चौदह सालों से बुजुर्ग दंपत्ति अपने बेटे के आने का इंतजार कर रहे हैं। हर रोज सूरज की किरण के साथ बेटे की आस लेकर वह दरवाजे के बाहर चारपाई डालकर बैठ जाते हैं और आने-जाने वालों को रोककर अपने बेटे के बारे में जानकारी लेते हैं। सूरज ढलते ही ही उनकी उम्मीद टूट जाती है और डंडे के सहारे दोनों पति-पत्नी घर के अंदर चले जाते हैं। हम बात कर रहे हैं सजेती थानाक्षेत्र के निमधा गांव निवासी रामकुमार सचान और उनकी पत्नी पुष्पा सचान की। जिनका बेटा राहुल दुराचारी आसराम के चंगुल में आने के बाद उसका खास करीबी बन गया था। लेकिन नाबालिग के साथ आसाराम ने रेप की वारदात को अंजाम दिया तो उसका शिष्य राहुल रेपिस्ट से अगल हो गया। राहुल ने आसाराम के खिलाफ गवाही दी, कोर्ट ने उसे सजा दी, गवाह इसी के बाद से लापता हो गया। आसाराम को सजा दिलाने वाले राहुल के माता-पिता कहते हैं कि हो सकता है कि आसाराम ने बेटे का कत्ल करा दिया हो। फिर भी जब तक सरकार और पुलिस बेटे के बारे में सही जानकारी नहीं देती, तब तक हम उसे जीवित मान रहे हैं।
1992 में आसराम के साथ चला गया राहुल
घाटमपुर के सजेती थानाक्षेत्र निमधा गांव निवासी रामकुमार सचान और उनकी पत्नी पुष्पा सचान 1990 में परिवार समेत दिल्ली में रहते थे। रामकुमार सरकारी नौकरी करते थे। अतीत के पन्नो को पलटते हुए राहुल के पिता रामकुमार सचान ने बताया की लगभग 1992 में बेटा आशाराम के संपर्क में आया था। आसाराम राहुल को लेकर अहमदाबाद ले गया और फिर बेटा उसके बाद हमारे पास वापस नहीं आया। रामकुमार बताते हैं कि छोटी बहन की शादी की जानकारी हमने उसे दी, लेकिन आसाराम ने उसे आने नहीं दिया। बताते हैं, राहुल आशाराम का बहुत करीबी था पैसों का लेन देन भी देखता था। सत्संग का भी अरेंजमेंट भी वही करता था। राजकुमार ने बताया कि मैनावती मार्ग स्थित बने आसाराम आश्रृम का निर्माण राहुल ने कराया। वह कानपुर में कईदिनों तक रहा, लेकिन कभी हमसे मिलने नहीं आया।
इस लिए बेटा संत के खिलाफ खड़ा हो गया
रामकुमार आशाराम को संत नहीं मानते हैं। उन्होंने बताया की कुछ लड़कियां को राहुल बहन मानता था। पर आसाराम की नजर उन लड़कियों पर पड़ गई और वह उनके साथ दुराचार करने लगे। राहुल ने इसका विरोध किया तो आसाराम के गुर्गो ने उसकी जमकर पिटाई की और मुंह बंद रखने की धमकी दी। आसराम को राहुल के बगावती तेवर की भनक लग गई और उसने बेटे को एक कमरे में बंद करवा दिया। दो सालों तक राहुल का कमरे के अंदर यातनाएं दी गई, लेकिन किसी तरह से वह 2003 में आसाराम की कैद से भागने में कामयाब रहा। 2003 में राहुल भागकर मुंबई आ गया और हमारे साथ रहने लगा। वंहां उसे ऑडियो एडिटिंग की ट्रेनिंग कराकर फिल्म निर्माण क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए समझाया। पिता बताते हैं कि बेटा पांच माह तक हमारे साथ रहा और एकदिन आसाराम का फोन आया और उसने फिर से बेटे को अपने जाल में फंसा लिया।
14 साल पहले गांव आया था राहुल
राहुल के पिता ने बताया कि 2004 में गांव के पैतृक मकान में जब मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हुई थी तब राहुल आखरी बार आया था उसके बाद से उससे कोई संपर्क नहीं हुआ । इसी दरमियान साल 2013 में यूपी के शाहजहांपुर की एक लड़की ने आसाराम पर दुराचार का मामला दर्ज करा दिया तो राहुल की गवाही पर पुलिस ने उसे मुख्य गवाह बनाकर मामले को आगे बढ़ाया। साल 2015 के फरवरी में जोधपुर कोर्ट के परिसर में राहुल पर चाकुओं से हमला किया गया। इसके बाद वह लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में पुलिस के पहरे में रहा,, लेकिन नवम्बर 2015 को कैसरबाग बस अड्डे से गायब हो गया, उसके बाद कुछ पता नहीं चला। राहुल के पिता बताते हैं कि 2012 - 13 में दिल्ली से दो लड़के हमारे गांव आए थे और बेटे के बारे में पूछताछ की थी। युवक बाइक पर थे और जब हमने बेटे के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही तो वह चले गए। राहुल के पिता को आशंका है कि आसराम ने उनके बेटे की हत्या करवा दी है, फिर भी अभी तक इसके प्रमाण नहीं मिले हैं।
शायद हमार लल्ला घर आ जाएगा
आसाराम को आजीवन कैद की सजा के बाद राहुल के पिता के चेहरे पर सुकून है, उन्हें उम्मीद है कि बेटे जिंदा होगा और जल्द वापस आएगा। हलांकि उन्हें किसी अनहोनी की आशंका भी रहती है। उनका यह भी कहना है कि कहीं आसाराम ने ही उसके बेटे को अगवा करने के बाद कोई अप्रिय घटना न करा दी हो। पिता रामकुमार बताते हैं राहुल नवंबर 2015 को कैसरबाग बसअड्डे से गायब हो गया। बस में सवार होते समय राहुल ने अपनी सुरक्षा में तैनात सिपाही अमित सिंह से एक दिन बाद लौटने का वादा किया था, लेकिन लौटे नहीं। राहुल की मां के आंख से आंसू जमीन पर गिर रहे थे और रूखे गले से बोलीं, दुराचारी को सजा हो गई है और अब शायद हमार लल्ला घर आ जाएगा।
Published on:
1 May 2018, 8:29 AM IST
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