
करौली.हिण्डौनसिटी. भोर भई दिन चढ़ गया अम्बे, हो रही जय-जयकार...जैसे माता के बज रहे भजनों से शहर का वातावरण धर्ममय बना हुआ है। कैला मैया के मेले की शुरूआत नजदीक आते ही बयाना व करौली मार्ग पर पदयात्रियों का रेला लगा हुआ है। हालांकि यह मेले से पहले की शुरुआत है। यात्रियों की आवक बढ़ती ही जा रही है। बुधवार रात को भी इन मार्गों पर पदयात्रियों से दिन जैसी चहल-पहल बनी रही। गुरुवार को सुबह से दिन चढऩे के साथ यात्रियों की संख्या बढ़ती गई। माता के दर पदयात्रियों के पहुंचने का यह सिलसिला चैत्र प्रतिपदा तक रहेगा।
शहर में करीब दो दर्जन से भी अधिक स्थानों पर भण्डारे, प्याऊ, ज्यूस, गन्ने के रस के ठेले, पंगत प्रसादी, पदयात्रियों के सुस्ताने व स्नान करने की व्यवस्था भी कदम-कदम पर विभिन्न समाजों, संगठनों व समाजसेवियों की ओर से की गई है। बयाना व करौली मार्ग पर जहां तक भी नजर पहुंचती है, पदयात्रियों का रेला ही नजर आता है।
मान मनुहार कर दे रहे प्रसादी
सेवा का भाव ऐसा देखने को मिला कि भण्डारों में सेवक पदयात्रियोंं की मनुहार कर प्रसादी प्रदान कर रहे हैं। सुबह नाश्ते के अलावा दोपहर एवं शाम को भोजन, चाय आदि को देते हुए देखे गए।व्यवस्थाओं को संभाले हुए स्वयंसेवक पदयात्रियों से कुछ देर भण्डारों में रुक सुस्ताने एवं व्यवस्थाओं का उपयोग लेने के लिए हाथ जोड़ विनती करने में लगे रहे। सेवा-सुश्रुषा में न केवल पुरुष, बल्कि महिला और बच्चे भी लगे हुए हैं।
भजनों पर नृत्य करते श्रद्धालु
माता के जयकारों की गूंज के बीच रात को भण्डारे संचालित रहने से इन पर श्रद्धालु माता का जागरण कर भजनों पर श्रद्धालु नाचते हुए देखे जा रहे हैं। बयाना मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर लगे भण्डारों पर बुधवार मध्य रात को कैला मेया के पदयात्री माता के भजनों पर खूब नाचे। यात्रियों की आवभगत में भी समाजसेवियों की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।
बज रही विजय घंटियां
पदयात्रा में कई युवा पदयात्री विजय घंटियां भी लेकर चल रहे हैं। इन्हें कमर में बांधकर चलने से ये बजती रहती है। रात के समय अंधेरे में बजती इन घंटियों की आवाज पदयात्रियों के राह तय करने का अहसास भी दूर से ही करा रही हैं। इन घंटियों को माता के द्वार पर चढ़ाया जाएगा।
बच्चों को ले जा रहे झोली व ठेले में
कई महिलाएं व दंपती पदयात्री छोटे व दूधमुंहे बच्चों के साथ कैलामैया के दरबार में हाजिरी लगाने आ रहे हैं। समूह में आने वाले पदयात्रियों की संख्या अधिक हैं। ऐसे में साथ में लाए बच्चों को पीठ पर लेकर या पैदल चलाने के बजाय ठेले पर बैठाकर रास्ता तय कर रहे हैं। दंपती अपने नन्हें को तोलिया की झोली में झुलाते हुए रास्ता तय करते हुए चलते देखे गए।
दिव्यांग भी तय कर रहे रास्ता
कैला मैया के दर की राह दिव्यांग भी तय कर रहे हैं। वे ट्राईसाइकिल से कई किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कैला मैया के दर्शनों के लिए आगे बढ़ रहे हैं। फतेहपुरसीकरी निवासी दिव्यांग होतमसिंह ट्राईसाइकिल से माता के दरबार में हाजिरी लगाने आया। साथ में चल रहे आगरा के पदयात्री उसकी मदद के लिए ट्राइसाइकिल के धक्का लगाते चले। इसके अलावा कई महिला, पुरुष, युवक-युवतियां और बच्चे कनक दण्डवत करते नजर आए।
भण्डारा शुरू
सूरौठ. कस्बे के उदासी बाग के पास मां कैला मैया का भण्डारा शुरू हो गया। कृष्णमोहन गोयल ने बताया कि जन सहयोग से शुरू किए भण्डारे का गुरुवार सुबह 10 बजे धु्रव घटा वाले संत हरेन्द्रानन्द ने कैला मां की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया।इस दौरान आरती कर पदयात्रियों को प्रसाद वितरित किया गया।
Published on:
23 Mar 2017 09:14 pm
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