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शैलपुत्री रूप में आई दुर्गा मां की सिद्धिदात्री स्वरूप में होगी विदाई

Durga mother came as Shailputri, will farewell in the form of Siddhidatri.Immersion trips will come from 11 places in the city. In Pancha dam of Karauli and Jagar dam of Hindaun will be immersed in water with cheer. शहर में 11 स्थानों से निकलेंगी विर्सजन यात्राएं .करौली के पांचना बांध व हिण्डौन के जगर बांध में जयकारों के साथ किया जाएगा जल में विसर्जित.

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शहर में 11 स्थानों से निकलेंगी मां दुर्गा  की विर्सजन यात्राएं,शहर में 11 स्थानों से निकलेंगी मां दुर्गा  की विर्सजन यात्राएं

शैलपुत्री रूप में आई दुर्गा मां की सिद्धिदात्री स्वरूप में होगी विदाई,शैलपुत्री रूप में आई दुर्गा मां की सिद्धिदात्री स्वरूप में होगी विदाई

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।

हिण्डौनसिटी. शारदीय नवरात्र के नवमे दिन सोमवार को मां दुर्गा के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की गई। शहर में दुर्गा पूजा पाण्डालों में लाल चुनरी धारण कि देवी मां की प्रतिमा को सिद्धिदात्री स्वरूप में सजाया गया।
टीकाकुण्ड मंदिर में सुबह शक्ति साधकों ने देवी मां के नवे स्वरूप की पूजा कर कन्या-लागुरियाओं को जीमन कराया। इसी प्रकार आईसीआईसी बैंक के सामने केसर कॉलोनी स्थित दुर्गा पूजा पाण्डाल, टेलीफोन एक्सचेंज के पास स्थित सारस्वत बगीची, शिवकॉलोनी स्थित राधाकृष्ण मंदिर, झण्डू का पुरा स्थित वनख्ंाडी महादेव मंदिर, झारेड़ा मोड़ स्थित वाल्मीकि मोहल्ला, चौबे पाड़ा, शीलतेश्वर हनुमान मंदिर व काना हनुमान पाड़ा स्थित काना हनुमान मंदिर के दुर्गा पूजा पाण्डला में देवी मां की प्रतिमा को सिद्धिदात्री का झांकी सजाई गई। इससे पूर्व रविवार रात को दुर्गा पूजा पाण्डालों में नवरात्र पूर्णाहूति का हवन किया गया।

यह है मां सिद्धिदात्री का स्वरूप-
नवरात्रि की नवमी तिथि को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। अपने साधक भक्तों अष्ट सिद्धियां प्रदान करती है। मान्यतानुसार, सभी देवी-देवताओं को भी मां सिद्धिदात्री से ही सिद्धियां प्राप्त हुई हैं। अपने इस स्वरूप में माता सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और हाथों में कमल, शंख, गदा, सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप हैं, उन्हीं की भांति श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से साधक को सभी देवियों की पूजा का फल मिल सकता है।