सिंघाड़े की फसल पर बारिश की कमी का साया

कुडग़ांव. करौली जिले के कुडग़ांव इलाके में सिंघाड़े की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी से फसल दम तोड़ती नजर आ रही है। तालाब में गंदगी भरी होने से फसल उत्पादन नहीं होने का अंदेशा है। वहीं सिंघाड़ा उत्पादक किसानों का भी फसल उत्पादन का मानस नहीं बन रहा। तालाब में भारी गंदगी के चलते किसान भी परेशान हैं।

By: Jitendra

Published: 22 Jul 2021, 08:38 PM IST



कुडग़ांव. करौली जिले के कुडग़ांव इलाके में सिंघाड़े की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी से फसल दम तोड़ती नजर आ रही है। तालाब में गंदगी भरी होने से फसल उत्पादन नहीं होने का अंदेशा है। वहीं सिंघाड़ा उत्पादक किसानों का भी फसल उत्पादन का मानस नहीं बन रहा। तालाब में भारी गंदगी के चलते किसान भी परेशान हैं। ग्राम पंचायत महमदपुर के बांस मंडावरा स्थित गुलिया तालाब में प्रतिवर्ष करीब 7 बीघा से ज्यादा पानी में यहां की कहार जाति द्वारा सिंघाड़े की फसल पैदा की जाती है। करीब एक दर्जन परिवार के लोगों की आजीविका चलती है। अगस्त माह में फसल तालाब में रोपी जाती है और दीपावली के समय बाजार में बिकने के लिए आ जाती है।
मानसून की बेरुखी से बना कारण
बारिश नहीं होने से किसान परेशान हैं। जुलाई माह लगभग बीत चुका है, लेकिन अभी पर्याप्त बारिश नहीं होने से तालाब में पानी नहीं आया है। जिससे गंदगी पड़ी हुई है। किसानों ने बताया कि अच्छी बारिश होने पर तालाब में गंदगी भी साफ हो जाती है और पानी भी फसल उत्पादन के हिसाब े पर्याप्त आ जाता है, लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से तालाब में केवल गंदगी ही नजर आ रही है। सिंघाड़ा उत्पादन करने वाले कीप जाति के लोगों ने बताया कि यही हालत रही तो फसल पैदावार नहीं कर पाएंगे।
पांच दशक से कर रहे उत्पादन
कीप जाति के मुखिया गोविंद कश्यप ने बताया की ग्राम पंचायत महमदपुर के गुलिया तालाब में करीब ५० साल से सिंघाड़े की पैदावार की जा रही है। इसके लिए ग्राम पंचायत से पहले अनुमति लेनी पड़ती है और उसके बाद उसकी रसीद भी कटानी पड़ती है। कुछ साल से जरूर रसद फ्री कर रखी है। किसानों ने बताया कि यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो फसल पैदावार नहीं होने पर आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ेगा।
मासलपुर से लाते हैं बीज
सिंघाड़ा उत्पादक किसानों ने बताया कि मासलपुर और इसके आसपास के इलाकों से बीज लाकर जुलाई एवं अगस्त माह में तालाब में रोपा जाता है। कड़ी मेहनत के बाद करीब चार माह में सिंघाड़ा तैयार होता है। इसके बाद बाजार में बिकने के लिए जाता है। सिंघाड़ा उत्पादन में काफी मेहनत लगी है। करीब एक दर्जन परिवार के लोग सिंघाड़े की खेती से आजीविका चलाते हैं। कुडग़ांव के सिंघाड़े की मिठास के दूर दूर तक लोग दीवाने हैं। यह राजस्थान के कई शहरों में बिकने के लिए जाता है।
तालाब में जाता है गंदा पानी
किसानों ने बताया कि कस्बे का गंदा पानी तालाब में जाता है। गंदे पानी की निकासी का कोई अन्य रास्ता नहीं है। ऐसे में यह तालाब में चला जाता है। जिससे फसल उत्पादन में दिक्कत आती है। तालाब की सफाई नहीं होने से गंदगी बढ़ती जाती है। किसानों ने बताया कि करीब तीन साल से कोई खास उत्पादन नहीं हो रहा है। जिससे आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। कुछ किसानों ने तो सिंघाड़े का उत्पादन छोड़ सब्जी का काम शुरू कर लिया है तो कुछ किसान काम धंधे के लिए पलायन करने को मजबूर है। सिंघाड़ा उत्पादन किसानों को किसी प्रकार का अनुदान भी नहीं मिलता है।
समाधान के प्रयास कर रहे हैं
ग्राम पंचायत सरपंच गुल्लोदेवी ने बताया कि गंदे पानी की निकासी नहीं होने के यह तालाब में चला जाता है। समस्या के समाधान के प्रयास कर रहे हैं। इस बारे में उच्च स्तर से कार्रवाई कराने के प्रयास जारी है।

Jitendra Desk
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