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400 किलो गजक और खजूर प्रतिदिन खा रहे शहरवासी, सूखे मेवों की बढ़ी डिमांड

सर्दी में शरीर को गर्म रखने के लिए तिल की गजक, गुड़ की चिक्की, बादाम, काजू की खूब हो रही ब्रिकी करौली. सर्दी बढऩे के साथ ही शरीर को गर्म रखने के लिए पिंड खजूर और गजक सहित सूखे मेवों की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले एक सप्ताह से इनकी जमकर बिक्री हो रही है। शहरी क्षेत्र में पिंड खजूर की प्रतिदिन दो क्विंटल से अधिक की बिक्री है, तो वहीं इतनी ही मात्रा में तिल की गजक खरीदी जा रही है। सर्दी के तेवर तीखे रहने पर आगामी दिनों में इसकी बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।

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400 किलो गजक और खजूर प्रतिदिन खा रहे शहरवासी, सूखे मेवों की बढ़ी डिमांड

करौली. वजीरपुर गेट के पास गजक के ठेले पर खरीदारी करते लोग।

400 किलो गजक और खजूर प्रतिदिन खा रहे शहरवासी, सूखे मेवों की बढ़ी डिमांड
सर्दी में शरीर को गर्म रखने के लिए तिल की गजक, गुड़ की चिक्की, बादाम, काजू की खूब हो रही ब्रिकी


करौली. सर्दी बढऩे के साथ ही शरीर को गर्म रखने के लिए पिंड खजूर और गजक सहित सूखे मेवों की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले एक सप्ताह से इनकी जमकर बिक्री हो रही है। शहरी क्षेत्र में पिंड खजूर की प्रतिदिन दो क्विंटल से अधिक की बिक्री है, तो वहीं इतनी ही मात्रा में तिल की गजक खरीदी जा रही है। सर्दी के तेवर तीखे रहने पर आगामी दिनों में इसकी बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।
सर्दी को हेल्दी सीजन कहने का मुख्य कारण हमारा खानपान है। वर्षों से सर्दी से बचने के लिए खान-पान में बदलाव किया जाता है। खाने में गेहूं के स्थान पर मक्का और बाजरे का उपयोग होता है। पौष्टिक चीजों के साथ शरीर को गर्म रखने के लिए सूखे मेवों की भी आवश्यकता होती है। लेकिन इनके भाव अधिक होने के कारण कई लोग इसके बदले गुड़ की चिक्की, पिंड खजूर, छुआरे, मूंगफली-गुड़, तिल की गजक, रेबड़ी और मूंगफली आदि का उपयोग करते हैं। इनके भाव आमजन की पहुंच में हैं। इसलिए शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों की दुकानों और ठेलों पर इनकी खूब बिक्री हो रही है। इससे लगातार मांग बढ़ती जा रही है। जबकि आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग बादाम, पिस्ता, काजू, अंजीर सहित अन्य सूखे मेवों का उपयोग कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कई घरों में सर्दी में गोंद, उदड़ आदि के लड्डू बनाए जाते हैं।
शरीर को गर्मी प्रदान करते सूखे मेवे
जानकारों के अनुसार सूखे मेवों में महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। यह विटामिन, प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरे होते हैं। इससे सर्दियों के दौरान शरीर को गर्मी मिलती है। यह त्वचा के लिए भी अच्छे होते हैं। उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल आदि को भी नियंत्रित रखते हैं। इसके उपयोग की सिफारिश चिकित्सक भी करते हैं।
पिंड खजूर व गजक की मांग अधिक
पिछले कुछ दिनों से पिंड खजूर और तिल से बनने वाली गजक की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। शहर में 50 से अधिक स्थान और ठेलों पर पिंड खजूर और गजक की बिक्री हो रही है। जानकारों की माने तो प्रतिदिन दो क्विंटल के करीब गजक की बिक्री का अनुमान है। इसका भाव वर्तमान में 250 से 300 रुपए किलो है, जबकि पिछले साल 200 से 250 रुपए किलो था। यही स्थिति पिंड खजूर की है। यह अधिकांश परचून की दुकानों एवं ठेलों पर बिक रही है। इसकी भी प्रतिदिन 2 से 3 क्विंटल से अधिक की बिक्री का अनुमान है। बाजार में ईरानी खजूर 200 से 300 रुपए, सऊदी अरब का खजूर 400 रुपए, गुजराती खजूर 120 से 140 रुपए किलो के भाव पर मिल रहा है।
वस्तु कीमत (रुपए-किलो)
गजक 250 से 300
पिंड खजूर 120 से 400
बादाम 650 से 800
काजू 750 से 800
पिस्ता 900 से 1100
किशमिश 250 से 300
इम्युनिटी होगी अच्छी तो रोग रहेंगे दूर
सर्दी में गजक, पिंड खजूर और सूखे मेवों का उपयोग करना चाहिए। सर्दी में भूख अधिक लगती है और खाना भी आसानी से पच जाता है। इम्युनिटी अच्छी रहेगी तो रोग दूर रहते हैं। मंूंग-मोगर और उदड़-मोगर के लड्डूओं का उपयोग भी करना चाहिए। आमजन को प्रतिदिन दो बूंद सरसों का तेल नाक में डालनी चाहिए। इससे सर्दी-जुकाम से भी बचाव होता है।
- डॉ. प्रमोद शर्मा, प्रभारी अधिकारी, राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी।
30-40 किलो खजूर की करता हूं बिक्री
पिछले कुछ दिनों से खजूर की मांग बढ़ी है। प्रतिदिन 30-40 किलो खजूर की बिक्री हो जाती है। मेरी तरह ही शहर में कई अन्य ठेले लगे हैं।
- यूनूस खान, व्रिकेता।
गजक के भावों में तेजी
तिल की गजक के भावों में पिछले साल के मुकाबले करीब 50 रुपए प्रतिकिलो की तेजी है। तिल्ली का तेल भी 300 से 350 रुपए किलो के भाव बिक रहा है।
- इमरान, विक्रेता।
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