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गुर्जर आंदोलन से सूबे में सत्ता की चूलें हिला देने वाले किरोड़ी हैं करौली के, जब वे फौज में थे तब पाकिस्तान ने बना लिया था युद्धबंदी

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने एक बार फिर आंदोलन की चेतावनी दी है...

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करौली

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Vijay ram

Jul 28, 2018

karnal kirori singh bainsla - biography story in hindi

karnal kirori singh bainsla - biography story in hindi

करौली.
गुर्जर आंदोलन से सूबे में सत्ता की चूलें हिला देने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला मूल रूप से करौली जिले के हैं। एक छोटे से गांव मुंडिया में उनका जन्म हुआ, कुछ अच्छी आदतों के चलते माता-पिता ने उन्हें करोड़ों में से एक नाम दिया— किरोड़ी

वे जाति से बैंसला हैं यानि गुर्जर। काफी कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई थी। अपने शुरुआती दिनों में वो शिक्षक के तौर पर काम किया करते थे, लेकिन पिता के फौज में होने के कारण वे भी फौज में शामिल हो गए।

इन युद्धों लिया हिस्सा
1962 के भारत-चीन और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने हिस्सा लिया। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया था।

जातिवाद में पड़े:
रिटायर होने के बाद सियासत में उन्होंने गुर्जर समाज की मांगें उठानी शुरू कीं। मुख्य मांग ये उठाई कि गुर्जरों को ओबीसी कोटे के तहत 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। इसकी घोषणा करने के बाद सरकार ने जैसे-तैसे गुर्जरों के विरोध को शांत किया। किंतु कोर्ट ने बाद में फैसले पर रोक लगवा दी। उनपर जातिवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।

'सोने से तौल देंगे वसुंधरा और बैंसला को'
जब 2015 में सूबे की भाजपा सरकार से किरोडी की सहमति बनी तो पार्टी के ही एक नेता ने अपनी ही सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर डाला।
भाजपा नेता रामवीर सिंह विधूड़ी ने कहा कि सरकार गुर्जरों को मूर्ख बना रही है। यदि सरकार अपने कार्यकाल के दौरान गुर्जरों को आरक्षण दे देती है तो वह मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को सोने से तौल देंगे।

क्या कहते हैं जातिवाद पर किरोड़ी:
कर्नल किरोड़ी मीडिया के सवालों पर झिझकते नहीं हैं। उनके समर्थकों की मानें तो वे अपनी बिरादरी और चार अन्य छोटी जातियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। सिर पर चटक रंग की पगड़ी और ठेठ गवई धोती बांधे बैंसला पूछने या टोकने पर मसीहाई अंदाज में कहते हैं, "मैं सदियों से वंचित इन ग़रीब लोगों की ज़िंदग़ी में तरक्क़ी का उजाला भरना चाहता हूँ।"

बैंसला ने एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘एक विचारक के बतौर अब्राहम लिंकन मेरे आदर्श हैं। मुग़ल शासक बाबर से भी प्रभावित हूं।
जुलाई 2018 में उन्होंने फिर सरकार के विरुद्ध आंदोलन की चेतावनी दी और गुर्जरों को इसके लिए तैयार करने में लग गए।
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