
उपकरणों का अभाव, कैसे मिले फिजियोथेरेपी उपचार
हिण्डौनसिटी. बदलती लाइफस्टाईल में कामकाज के तौर तरीकों से अनहेल्दी (अस्वस्थ) हो रहे जीवन में फिजिकल थैरेपी की जरुरत बढ़ गई। लेकिन शहर के जिला स्तरीय राजकीय चिकित्सालय में रोगियों को फिजियो थेरेपी के समुचित सुविधा नहीं है। सरकार और चिकित्सा विभाग की अनदेखी से चिकित्सालय में फिजियोथेरेस्टि तो है, लेकिन उपचार के लिए उपकरण नहीं हैं। ऐसे में जरुरतमंद रोगियों को आधुनिक उपकरणों की फिजियोथैरेपी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में फिजियोथेरेपिस्ट रोगियों को एक्सरसाइज की टिप्स बता कर ही उपचार करती हैं। चिकित्सालय में हर रोज 25-30 रोगी फिजियोथेरेपी के लिए आते हैं।
चिकित्सालय में फिजियोथेरेपिस्ट नियुक्त होने से फ्रैक्चर, सर्वाइकल, सर्जरी, चोट, जन्मजात विकृति व अन्य रोगियों को मशीनों से फिजियोथेरेपी मिलने उम्मीद लगी थी। लेकिन फिजियोथेरेपिस्ट के पदस्थापन के एक वर्ष बाद भी मशीन और उपकरण उपलब्ध नहीं हुए हैं। न ही आउट डोर में सही तरीके से फिजियोथेरेपी यूनिट स्थापित हो सकी है। अस्थिरोग विभाग मेंं आने वाले रोगियों में से करीब 70 प्रतिशत को नियमित फिजियोथेरेपी का परामर्श दिया जाता है। एक रोगी को 8-10 दिन तक की थेरेपी लेने की जरुरत होती है। चिकित्सालय में संसाधन नहीं होने से रोगियों को एक्सरसाइज टिप्स समझाकर घर पर दोहराने की सलाह दी जाती है। ऐसे में मोटराइज्ड उपकरणों से फिजियोथेरेपी के आवश्यकता वाले रोगियों को महंगी फीस चुका कर निजी फिजियोथैरेपी क्नीनिकों पर जाना पड़ता है।
कक्ष न प्रथक सुविधाएं-
चिकित्सालय की आउटडोर में हर यूनिट के लिए अलग कक्ष हैं, लेकिन फिजियोथेरेपी के लिए अलग कक्ष नहीं है। हड्डीरोग विशेषज्ञ के कक्ष में ही बैठ फिजियोथेरेपिस्ट रोगियों को एक्सरसाइज के तरीके सिखाती हैं। छोटे कक्ष में अस्थि रोग के दो चिकित्सका बैठने से रोगियों की भीड़ रहती है। ऐसे में कक्ष में महिलाओं के पृथक के फिजियो थेरेपी की व्यवस्था नहीं है। स्थान के अभाव बैंच पर ही फिजियोथेरेपी की जाती है।
पांच माह पहले सौंपी उपकरणों की सूची-
फिजियोथेरेपिस्ट ने बताया कि चिकित्सालय प्रशासन को फिजियोथेरेपी के लिए उपकरण की जरुरत से अवगत कराया हुआ है। पांच माह पहले चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में हुई आरएमआरएस की बैठक में उपकरणों की सूची भी सौंपी गई है। इसमें इलैक्ट्रोथेरेपी यूनिट, एक्सरसाइज यूनिट, टे्रक्शन यूनिट व बच्चों के रिहैविटेशन डवलपमेंट के उपकरण शामिल हैं।
फिजियोथेरेपी की बने अलग यूनिट-
चिकित्सालय में हड्ड़ी फे्रक्चर (ट्रोमा) रोगियों की अधिक आवक होने से फिजियोथेरेपी के लिए अलग यूनिट की जरुरत है। ताकि एक साथ कई रोगियों के विभिन्न उपकरणों और एक्सरसाईज टिप्स फिजियोथेरेपी दी जा सके। इसके लिए अल्ट्रासाउंड थैरेपी मशीन, टेंस और आईएफटी मशीन, हाइड्रोकोलेट्रल (गर्म सेंक) यूनिट, फिंगर लेडर, वाइवे्रटर थ्राइव, वेट कफस, मेडिसिन वॉल, पुुली, शोल्डर व्हील, फिंगर ग्रिपर, स्टेपर, स्टेटिक साइकिल, थेरावैण्ड, वॉकर, बास्केटबॉल, छहफुटा शीशा, रिफलैक्स हैमर, गोनियोमीटर, फॉम रॉल व घुटनों के गेटर आदि जरुरत है।
इनका कहना है-
फिजियो थेरेपी के लिए उपकरणों की खरीद का प्रस्ताव चिकित्सा निदेशालय को भेजा हुआ है। जल्द ही उपकरणों के उपलब्ध होने की उम्मीद है। चिकित्सालय में निर्माण कार्य पूर्ण होने आउटडोर में अलग से फिजियोथेरेपी यूनिट स्थापित की जाएगी।
-डॉ. पुष्पेंद्र गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी
राजकीय चिकित्सालय, हिण्डौन सिटी।
फिजियोथेरेपी के लिए मशीन व उपकरण नहीं हैं। रोगियों को एक्सरसाइज की टिप्स जाते हैं। समुचित संसाधनों की उपलब्धता पर मोटराइज्ड फिजियोथेरेपी की जा सकेगी।
डॉ. मनीषा मीणा, फिजियोथेरेपिस्ट
राजकीय चिकित्सालय, हिण्डौन सिटी।
Published on:
07 Sept 2022 08:26 pm
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