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आयुर्वेद चिकित्सालय में दवाओं का टोटा, रोगियों के अधूरे रह रहे नुस्खे

आयुर्वेद चिकित्सालय में दवाओं का टोटा, रोगियों के अधूरे रह रहे नुस्खे

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हिण्डौनसिटी. सरकार भले ही प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के बढ़ावे के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में औषधालयों में दवाओं का टोटा बना है। रसायन शाला से हो रही औषधियों की आपूर्ति रोगियों की आवक की तुलना में ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहीं हैं। ब्लाक स्तरीय आयुर्वेद चिकित्सालय में कई माह से दवाइयों की आपूर्ति नहीं मिलने से कमी बनी हुई है। आयुर्वेद विभाग के चिकित्सकों की मानें तो शहरी और ग्रामीण औषधालयों में वर्ष भर दवाओं की तंगी रहती है। विभागीय स्तर पर भरतपुर या अजमेर रसायनशाला से वर्ष में दो बार करीब 20 हजार रुपए की कीमत की दवाओं की आपूर्ति होती है जिसमें जरुरत की सभी औषधियों के बजाय चुनिंदा चूर्ण, क्वाथ व वटियों की आपूर्ति होती है। मात्रा कम होने से दवाओं को एक-दूसरी औषधियों का योग चंद दिन ही चल पाता है। स्थिति यह है कि जितनी दवाएं रसायशाला से औषधालयों को भेजी जाती हैं, उनसे तो एक-दो माह ही काम चल पाता है। गौरतलब है कि मोहन नगर में जिला चिकित्सालय परिसर ब्लॉक आयुर्वेद औषधालय में फरवरी माह में 9 हजार 614 रुपए की लागत की 26 प्रकार की दवाओं की आपूर्ति मिली थी।

त्रिफला खत्म, 7 वर्ष से नहीं सितोपलादि: आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में त्रिफला चूर्ण को आधार बताया है, लेकिन चिकित्सालय में कई माह से यह नहीं है। वहीं ब्लाक चिकित्सालय सहित ग्रामीण औषधालयों में करीब 7 वर्ष से सितोपलादि चूर्ण की आपूर्ति नहीं मिल रही है। चिकित्सालय में उदर रोग के उपचार के लिए हिंगवाष्टक, अविपित्तकर, लवणभास्कर चूर्ण नहीं है। दर्द निवारक तेल भी नहीं है। अधिकांश आयुर्वेद औषधालयों में कमोबेश यही स्थिति है।

परेशानी रोगियों की जुबानी: ब्लाक आयुर्वेद चिकित्सालय में उपचार कराने आई समीप के गांव महू इब्राहिमपुर निवासी सपना देवी ने बताया कि उसे आयुर्वेद चिकित्सक ने उपचार केे नुस्खे में 7 दवाइयां लिखी है। चिकित्सालय में मात्र एक ही दवा मिली है। शेष छह दवाएं बाजार से लाकर दवाओं का योग तैयार कराना पड़ा है। वहीं हुक्मीखेड़ा गांव से आए सोमदत्त ने बताया कि उन्हें लिखी दवाएं ही उपलब्ध नहीं है। पेंशनर होने की वजह से वे आरजीएचएस में बाजार से दवाएं लेंगे।

रोगी बाजार से खरीद रहे दवाइयां

आयुर्वेद औषधालय में पेटदर्द, कब्ज, हड्डियों व जोड़ों में दर्द तथा वात् व्याधि से पीड़ित रोगियों की अधिक आवक रहती है। लेकिन ब्लाक चिकित्सालय में इनसे संबंधित औषधियां ही नहीं हैं। अल्प मात्रा में एकल औषधियों की उपलब्धता से नुस्खा तैयार नहीं हो पाता है।

स्थिति है कि औषधालय में जो दवा खत्म हो जाती है। उसकी उपलब्धता दूसरी छहमाही की आपूर्ति में हो पाती है। ऐसे में औषध योग अधूरा रहने पर रोगियों को दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती है।

जिला स्तर पर बने आयुर्वेद औषध डिपो

एलोपैथी की भांति जिला स्तर पर आयुर्वेद औषधीय भण्डार स्थापित होने चाहिए। रसायन शालाओं से जिला स्तर पर दवाओं का भण्डारण होगा तो दवाएं खत्म होने पर त्वरित आपूर्ति की जा सकेगी। साथ ही वर्ष में दो बार दवाओं की आपूर्ति की व्यवस्था में बदलाव कर जरुरत के अनुरूप मिलनी चाहिए। वहीं दवाओं की आपूर्ति औषधालयों से मांग पत्र के अनुसार तय की जाए। जिससे औषधालयों में अतिआवश्यक, जरुरी व सामान्य श्रेणी में विभक्त कर दवाएं उपलब्ध हो सकें। वर्ष भर सभी प्रकार की औषधियों की उपलब्धता रहेगी, तो रोगियों को समुचित उपचार मिल सकेगा।

-डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा सेवानिवृत ब्लॉक आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, हिण्डौनसिटी

दवाओं की आपूर्ति के लिए उप निदेशक कार्यालय के माध्यम से रसायनशाला को मांग पत्र भेजा हुआ है। फिलहाल चिकित्सालय में दवाओं की कमी है। उपलब्धता के अनुरूप रोगियों को नुस्खे तैयार किए जा रहे हैं।

– डॉ. शारदा मीणा, प्रभारी, ब्लॉक आयुर्वेद चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी