जिले में परिवार कल्याण के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 9 हजार 655 नसबंदी के लक्ष्य तय किए हुए हैं। इन लक्ष्यों के मुकाबले विभाग के अधिकारियों ने अभी तक 6551 यानी 68 फीसदी लक्ष्यों को प्राप्त किया है। इस स्थिति को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने सख्त रवैया अख्तियार करना शुरू किया है। अधिकारियों ने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस हिदायत के बाद लक्ष्यों को प्राप्त करने में एएनएम, आंगनबाड़ी, आशा सहयोगनी तथा चिकित्सकों के पसीने छूट रहे हैं।
प्रोत्साहन भी नहीं आया काम
इस बार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने परिवार कल्याण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एएनएम, आशा सहयोगनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि निर्धारित की थी। सबसे अधिक नसबंदी कराने पर पांच हजार से लेकर दस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि निर्धारित की थी। लेकिन इसके बाद भी जिले के अनेक क्षेत्रों में प्रोत्साहन राशि काम नहीं आई है। हिण्डौनसिटी क्षेत्र में सबसे कम नसबंदी हुई हैं।
पुरुषों का नसबंदी से परहेज
जिले में जागरूकता के अभाव में पुरुष नसबंदी कराने में पीछे हैं। पुरुष संकोच की वजह से नसबंदी नहीं कराते हैं। सूत्रों ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस साल 960 पुरुषों की नसबंदी कराने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन अभी तक मात्र 15 पुरुषों ने नसबंदी कराई है। जबकि विभाग ने गांव-गांव में शिविर लगाकर पुरुष नसबंदी के लिए लोगों को प्रेरित भी किया था। इसके बाद भी नसबंदी के प्रति पुरुष जागरूक नहीं हुए हैं।
पूरी कोशिश कर रहे हैं
अभी तक 68 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किए हैं। लेकिन अब विभाग ने पूरी ताकत लगा दी है। जिससे कुछ और प्रतिशत बढऩे की संभावना है। जिन अधिकारी-कर्मचारियों ने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
दिनेश मीणा, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (परिवार कल्याण विभाग), करौली।