
आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत। फाइल फोटो
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि ब्रिटिश लोग स्वेच्छा से भारत से नहीं गए, हमारे लोगों ने एकजुट होकर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया लेकिन हम अपनी एकता और अखंडता के कुछ तंतुओं को भूल गए, इसलिए दृष्टि में भेद आ गया था।
अंग्रेजों को हमारी एकता अच्छी नहीं लगी तो उन्होंने इसकी भी व्यवस्था कर दी कि बाद में भी भारत में हमारे बीच में भेद रहे। लेकिन उनके बोये भेद के प्रयासों को हमने असफल भी किया है। भागवत अपने तीन दिवसीय रायपुर प्रवास के अन्तिम दिन गुरुवार को राममंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित कर रहे थे। सरसंघचालक भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव से ही अनेक चुनौतियों का समाधान संभव है। वंचित को सशक्त करना ही समाज का उद्देश्य है।
भागवत ने कहा, भारत में आकर भी भारत की रीति में कुछ लोग नहीं रहते हैं, इसलिए वह आक्रमण करते हैं। हम चिंतित हैं लेकिन हमें और चिंतित होना चाहिए। लव जिहाद, मतांतरण, व्यसन आदि पर प्रबोधन करना होगा। जहां समाज में संगठन व सद्भावना है, वहां किसी भी तरह की चुनौतियों से निपटना आसान रहेगा।
Published on:
02 Jan 2026 01:25 am
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