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‘पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है, न कि नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला चंदा’, मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र कलपाक्कम की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि पेंशन कर्मचारियों का मौलिक अधिकार है, न कि नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला चंदा।

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Madras High Court

मद्रास हाईकोर्ट (Photo Credit - IANS)

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने कहा है कि पेंशन कर्मचारियों का मौलिक अधिकार है, न कि नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला चंदा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर), कलपाक्कम की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए की। ये याचिकाएं केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) के उस आदेश के खिलाफ थीं, जिसमें कुछ तकनीकी कर्मचारियों को अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) से सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) योजना में स्विच करने की अनुमति दी गई थी।

मामला आईजीसीएआर के तकनीकी कर्मचारियों के सीपीएफ से जीपीएफ योजना में स्विच करने के विकल्प और आवेदन की कट-ऑफ तिथि से जुड़ा था। कई कर्मचारियों ने आवेदन किया, लेकिन उन्हें अस्वीकार कर दिया गया।

जस्टिस एम.एस. रमेश (अब सेवानिवृत्त) और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के शशि किरण मामले का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक प्रभावों को पेंशन लाभ न देने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अधिकारियों की कोई भी कार्रवाई, जिसका प्रभाव इस अधिकार को कमजोर करने या छीनने का हो, उसे सीमित दृष्टि से देखा जाना चाहिए। यदि कोई अस्पष्टता हो, तो उसका समाधान कर्मचारियों के पक्ष में किया जाना चाहिए। वित्तीय दलीलें कर्मचारियों के पेंशन अधिकार को नकारने का आधार नहीं बन सकतीं।