
राज्य में सर्वे के बाद ब्योरा करेंगे तैयार
रतलाम। दिल की सामान्य और गंभीर बीमारी के मरीजों को अब इलाज के लिए रतलाम से बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। मेडिकल कॉलेज के पांच माह पूर्व दिए कार्डियक केयर यूनिट के प्रस्ताव को शासन के मप्र चिकित्सा आयुर्वेद विभाग ने गुरुवार दोपहर को मंजूरी दे दी। इसकी मंजूरी के लिए दिसंबर माह में शहर विधायक व मंत्री चेतन्यकाश्यप ने स्वास्थ्य और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात की थी। कार्डियक केयर यूनिट बनने से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कम उम्र में होने वाले हदय रोगी की समय रहते उपचार व जान बचाई जा सकेगी।
यूपीएस सरकार के दौरान 2009 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलामनबी आजाद ने देश में छह मेडिकल कॉलेज मंजूर करते हुए इसके निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपए की पहली किश्त जारी की थी इसके बाद पूरा निर्माण होने व इसके शुरू होने में 2016 आ गया। शुरू में यहां पढाई करवाई गई जो अब भी चल रही है, कोरोना के दौरान शहर विधायक रहते काश्यप ने हस्तक्षेप किया व यहां पर उपचार शुरू करवाया। इसके बाद धीरे-धीरे यहां सुविधाएं बढ़ती चली गई।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियक केयर यूनिट होना चाहिए, इसकी मांग तो लंबे समय से हो रही थी, लेकिन इसके लिए पहली बार पत्र अगस्त माह में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने राज्य सरकार को लिखा। इसके बाद कई बार स्मरण पत्र भेजे गए। इसके बाद ही अब जाकर नए साल के पहले दिन निर्णय लेते हुए कार्डिक केयर यूनिट की मंजूरी दे दी। हालांकि इसका निर्माण से लेकर मशीन लगाने के कार्य की पूरी निविदा आउटसोर्स कंपनी को दी जाएगी। यहां तक की संचालन का कार्य भी आउटसोर्स कंपनी ही करेगी। बदले में उसको शासन से हदय से जुड़ी अलग-अलग बीमारी के उपचार की तय राशि अनुसार भुगतान किया जाएगा।
कार्डियक इंटेंसिव केयर यूनिट एक विशेष अस्पताल वार्ड है जहां दिल के दौरे, गंभीर और हृदय सर्जरी के बाद जैसी जानलेवा हृदय संबंधी स्थितियों वाले मरीजों की 24/7 निरंतर निगरानी और गहन देखभाल की जाती है। इसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से हृदय, रक्तचाप और ऑक्सीजन के स्तर पर लगातार नज़र रखी जाती है। यह सामान्य आईसीूयसे अलग होती है क्योंकि यह पूरी तरह से हृदय रोगियों की जटिल जरुरत पर केंद्रित होती है, जिसमें दवा, वेंटिलेटर सपोर्ट और अन्य लाइफ सपोर्ट मशीनों का इस्तेमाल शामिल है।
विशेषज्ञता: यह गंभीर हृदय रोगों, जैसे हार्ट अटैक, एनजाइना, और हृदय की सर्जरी के बाद ठीक होने वाले मरीजों के लिए होती है।
चौबीसों घंटे निगरानी: मरीजों की हृदय गति, रक्तचाप और ऑक्सीजन के स्तर की लगातार जांच की जाती है।
विशेषज्ञ टीम: हृदय रोग विशेषज्ञ, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी चौबीसों घंटे मौजूद रहते हैं।
उन्नत उपकरण: वेंटिलेटर, मॉनिटरिंग मशीन, ड्रिप, कैथेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
गंभीर स्थिति: यहां भर्ती मरीजों की हालत नाजुक होती है और उनमें तेज़ी से बदलाव आ सकते हैं, इसलिए उन्हें लगातार देखभाल की जरुरत होती है।
उद्देश्य: मरीजों को स्थिर करना और जटिलताओं को प्रबंधित करना, ताकि वे सामान्य वार्ड या हाई डिपेंडेंसी यूनिट में ट्रांसफर होने के लिए तैयार हो सकें।
संक्षेप में, कार्डिक केयर यूनिट दिल के गंभीर रोगियों के लिए एक विशेष, उच्च-तकनीकी और चौबीसों घंटे निगरानी वाली जगह है, जहां उन्हें जीवन रक्षक देखभाल मिलती है।
मरीजों को होगा बड़ा लाभ
इस समय दिल के गंभीर बीमारी के मरीज को अन्य शहर के बडे़ अस्पताल में जाने की मजबूरी रहती है। यूनिट बनने के बाद यह बंद हो जाएगा और मेडिकल कॉलेज में ही सभी प्रकार का उपचार मिलेगा। मप्र चिकित्सा आयुर्वेद विभाग ने इसकी मंजूरी देते हुए निर्माण के लिए भूमि मांगी है, जो हमने तुरंत ले-आउट बनाकर जानकारी भेज दी है। इसके लिए अब टेंडर भोपाल से ही जारी होंगे व निर्माण आदि पूरा कार्य आउटसोर्स कंपनी से होगा।
-अनिता मुथा, डीन मेडिकल काॅलेज
Published on:
02 Jan 2026 01:21 am
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