
devaki nandan
यह कहानी दो दोस्तों की है जो रेगिस्तान पार कर रहे थे। रास्ते में उनका किसी बात पर झगड़ा हो गया और एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को गुस्से में आकर थप्पड़ मार दिया। इस बात से दूसरे दोस्त के दिल पर बहुत ठेस लगी और उसने रेत पर एक लकड़ी से लिखा कि आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने छोटी सी बात पर मुझे थप्पड़ मार दिया।
रेगिस्तान में वे एक-दूसरे को छोड़कर तो जा नहीं सकते थे इसीलिए उन्होंने सफर जारी रखा और सोचा कि मंजिल पर पहुंचकर इस झगड़े को सुलझाया जाएगा। वे आपस में बात किए बिना आगे बढ़ते रहे।
आगे उन्हें एक बड़ी झील मिली। उन्होंने झील में नहाने का फैसला किया। झील के दूसरे किनारे पर एक बहुत बड़ा दलदल था। वह दोस्त जिसको पहले दोस्त ने थप्पड़ मारा था वह झील के दूसरे किनारे पर दलदल में जा फंसा और डूबने लगा। दूसरे दोस्त ने जब यह देखा तो वह भी तुरंत उस की तरफ तैर कर आया और उसने दोस्त को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया।
जिस दोस्त को दलदल से बचाया गया उसने झील के किनारे एक बड़े पत्थर पर लिखा कि आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई। दूसरा दोस्त यह देखकर बड़ा हैरान हुआ और उसने उससे पूछा कि जब मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा था तो तुमने रेत पर लिखा था लेकिन जब मैंने तुम्हारी जान बचाई है तो तुमने पत्थर पर लिखा है, ऐसा क्यों?
दोस्त ने जवाब दिया- “जब हमें कोई दु:ख पहुंचाता है तो हमें इसे रेत पर लिखना चाहिए ताकि वक्त और माफी की हवाएं उसे मिटा दें। लेकिन जब कोई हमारे साथ अच्छा बर्ताव करे तो हमें उसे पत्थर पर लिखना चाहिए जहां उसे कोई ना मिटा सके ।
सीख
जीवन में होने वाली बुरी घटनाओं को ज्यादा समय तक दिल से नहीं लगाना चाहिए। अच्छी घटनाओं को याद के साथ अपने जीवन में खुशी से व्यतीत करना चाहिए।
प्रस्तुतिः डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित, सोरों
Published on:
17 Feb 2019 07:25 am
