
कासगंज। हर लड़की के अरमान होते हैं कि उसके हाथों में मेंहदी लगे। गाजे-बाजे के साथ दूल्हा घोड़ी पर चढ़कर उसके दरवाजे बारात लेकर आए, लेकिन कासगंज जिले के गांव निजामपुर की रहने वाली एक लड़की के सपने इसलिए तार तार हो रहे हैं, क्योंकि वो दलित है। गांव के दबंग लोग उसकी बारात चढ़ाई का विरोध कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस दलित परिवार की मदद करने की बजाय शांति व्यवस्था भंग होने का हवाला दे रही है।
20 अप्रैल को है शादी
गांव निजामपुर की शीतल की शादी 20 अप्रैल को हाथरस के संजय से शादी होनी है। शीतल और उसका मंगेतर संजय चाहते हैं कि बारात धूमधाम के साथ पूरे गांव से होकर निकाली जाए, लेकिन गांव में कभी दलितों की बारात नहीं चढ़ी है। जिसके चलते गांव में दूसरी जाति के लोगों को इस पर आपत्ति है। संजय ने इसको लेकर पुलिस को भी प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन उसने भी इस रूढ़िवादी परंपरा और शांति व्यवस्था भंग होने का हवाला देकर बारात चढ़ान से मना कर दिया।
सबको बराबरी का हक
शीतल के मंगेतर संजय का कहना है कि संविधान में सबको बराबरी का हक है। लिहाजा बारात पूरे गांव में यदि चढ़ती है तो इसमें हर्ज ही क्या है, लेकिन ठाकुर बाहुल्य निजामपुर में आजादी से अब तक दलितों की बारात कभी नहीं चढ़ायी गयी। इसे गांव के कुछ दबंग लोग अपनी शान समझ रहे हैं। उनको दलित की बारात धूमधाम से चढ़ने पर आपत्ति है। इसी विरोध के चलते संजय जाटव ने इसकी शिकायत कासगंज के आलाधिकारियों से की। जिस पर पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में कासगंज कोतवाली के मोहनपुरा चौकी इंचार्ज से इस विषय में रिपोर्ट तलब की।
पुलिस ने हाथ खड़े किए
चौकी इंचार्ज ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट में कहा है कि गांव में दलितों की बारात कभी नहीं चढ़ाई गई। यह एक नयी परम्परा होगी। जिसके चलते गांव की शांति व्यवस्था भंग होने का अंदेशा है। साथ ही कोई भी अप्रिय घटना भी घटित हो सकती है। चौकी इंचार्ज राजकुमार ने इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए लिखा है कि गांव में नई परंपरा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
बारात से पहले 22 गिरफ्तार
बारात से पहले हुए विवाद में पुलिस ने शांति भंग की आशंका में दोनों पक्षों के 22 लोगों को 107/116 के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार भी कर लिया है। इस मामले में सीओ डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि जाटव पक्ष पूरे गांव में बारात चढ़ाना चाहता है, लेकिन आज तक गांव मे ऐसा नहीं हुआ है। जो परंपरा है उसको बदला नहीं जायेगा। पीड़ित परिवार ने जो तहरीर दी है, उसकी जांच चल रही है। वहीं गांव के एक बुजुर्ग कहते हैं कि इस गांव में दलितों की बारात चढ़ने की परंपरा नहीं है।
Published on:
28 Feb 2018 10:00 am

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