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1993 में कासगंज से ही पूरे देश में भड़की थी आग, जानिए तब उमा भारती ने क्या कहा था

1993 में गंजडुंडवारा में उमा भारती की सभा नहीं हो पाई थी। दंगा भड़क गया था। कासगंज में पत्रकार समेत पांच लोगों की हत्या हुई थी।

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uma bharti

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कासगंज। ठीक 24 साल बाद उत्तर प्रदेश का कासगंज जिला एक बार फिर से चर्चा में है। कारण है उसी तरह का उपद्रव। भारतीय जनता पार्टी की फायरब्रांड नेता साध्वी उमा भारती के भाषण के बाद एक वर्ग के लोग भड़क गए थे। पूरे देश में सांप्रदायिक दंगा भड़क उठा था। कासगंज में पत्रकार गजेन्द्र राठौर समेत पांच की हत्या हुई थी। फिर तो हालात बेकाबू हो गए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी।

गंजडुंडवारा से शुरू हुआ था दंगा

1992 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए कारसेवा हो चुकी थी। विवादित ढांचा ढहा दिया गया था। भाजपा की सरकारें बर्खास्त की जा चुकी थीं। भाजपा के तमाम नेता जनता के बीच जाकर मंदिर के पक्ष में माहौल बना रहे थे। साध्वी उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा को इस अभियान में खासतौर पर लगाया गया था। उमा भारती ने आगरा के सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता और सभा की। उन्होंने ऐलान किया था- अगर मुसलमान औरंगजेब बनेंगे तो हिन्दू शिवाजी बनकर सर काट लेंगे। तब उमा भारती को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार एसपी सिंह ने बताया कि उमा भारती फिरोजाबाद होते हुए कासगंज जिले के गंजडुंडवारा कस्बे में पहुंची। उनकी सभा से पहले ही अखबार पहुंच चुका था। कुछ लोग गुस्से में थे। उनकी सभा के दौरान ही उपद्रव शुरू हो गया। उमा भारती को पुलिस ने बमुश्किल सुरक्षित निकाला था। गंजडुंडवारा से शुरू हुआ दंगा देखते ही देखते पूरे कासगंज जिले में फैल गया। फिर तो पूरे देश में मानो आग लग गई।

अब क्या क्या हुआ

गणतंत्र दिवस पर शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता बाइक पर युवा तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे। वे बिलराम गेट से निकल रहे थे कि जयश्रीराम और वंदेमातरम सुनकर कुछ लोग गुस्से में आ गए। देखते ही देखते उपद्रव हो गया। बडडू नगर, नबाब मोहल्ला, नाथूराम मोहल्ले में उपद्वर शुरू हो गया। मथुरा- बरेली हाइवे के शहरी हिस्से के मुख्य रोड बिलराम गेट, कोतवाली के पास तहसील रोड क्षेत्र में दोनों पक्षों ने जमकर पथराव किया। तमाम बाइकें तोड़ दी गईँ। फायरिंग होने लगी। एक व्यक्ति की मौत हो गई, दो घायल हुए, जिन्हें जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, लखनऊ भेजा गया है। घटना के बाद मौके पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक पहुंचे थे, जिन्हें जनता के विरोध का सामना करना पड़ा।