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कटनी. आने वाली जनगणना 2027 इस बार सिर्फ जनसंख्या की गिनती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों की जीवनशैली, सुविधाओं की उपलब्धता, तकनीक तक पहुंच और सामाजिक-आर्थिक स्थिति की गहराई से पड़ताल करेगी। यही कारण है कि इस बार पूछे जाने वाले सवाल पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और दैनिक जीवन से जुड़े होंगे। प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं और इसे विकास योजनाओं के लिए ग्राउंड रियलिटी सर्वे के रूप में देखा जा रहा है। प्रारंभिक चरण के तहत एक अप्रैल से मकानों की लिस्टिंग, सुपरवाइजर्स व गणना कर्मियों की नियुक्ति और कार्य वितरण शुरू किया जाएगा। जिले में प्रथम चरण का कार्य 1 मई से 30 मई तक किया जाएगा।
जनगणना कर्मी घर-घर जाकर यह जानेंगे कि परिवार मुख्य रूप से गेहूं खाता है या मक्का-ज्वार-बाजरा, पीने का पानी नल से मिलता है या अन्य स्रोतों से, खाना गैस पर बनता है या पारंपरिक चूल्हे पर। इसके साथ ही यह भी दर्ज होगा कि घरों में बिजली, सौर ऊर्जा, शौचालय, स्नान सुविधा, रसोईघर, इंटरनेट और डिजिटल उपकरण जैसी सुविधाएं कितनी उपलब्ध हैं। इन सवालों के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ किन वर्गों तक पहुंचा और किन क्षेत्रों में अभी भी बुनियादी जरूरतों की कमी है।
इस बार जनगणना का अधिकांश कार्य मोबाइल एप, ऑनलाइन पोर्टल और रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर के जरिए किया जाएगा। यानी पारंपरिक कागजी प्रक्रिया की जगह डिजिटल प्रणाली अपनाई जाएगी। इससे डेटा अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी रूप से संकलित होगा। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड होगी, जिससे आंकड़ों के विश्लेषण में समय कम लगेगा और नीति निर्माण तेजी से हो सकेगा।
1947 के बाद पहली बार जातिगत आंकड़ों का संकलन
1931 में हुई थी अंतिम जाति आधारित जनगणना
2011 में हुई थी पिछली जनगणना
पहले चरण में मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें घर की संरचना, निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या, स्वामित्व स्थिति, जल निकासी व्यवस्था और प्रकाश स्रोत जैसी जानकारियां दर्ज होंगी। दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों से संबंधित सामाजिक और आर्थिक जानकारी ली जाएगी, जैसे आयु, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, मातृभाषा और अन्य जनसांख्यिकीय विवरण। इसके अलावा घर में टीवी, रेडियो, कंप्यूटर, इंटरनेट, दोपहिया या चारपहिया वाहन जैसी सुविधाओं का भी विवरण लिया जाएगा, जिससे जीवन स्तर का व्यापक आकलन किया जा सके।
इस बार पहली बार कुछ विशेष सामाजिक और स्वास्थ्य श्रेणियों को अलग से शामिल किया गया है, ताकि समाज के संवेदनशील वर्गों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इससे स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को अधिक लक्षित बनाया जा सकेगा।
जनगणना की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक सीमाओं को पूर्व निर्धारित तिथि से फ्रीज कर दिया गया है। जनगणना पूरी होने तक किसी भी नगरीय या ग्रामीण सीमा में बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि आंकड़ों में भ्रम की स्थिति न बने। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जुटाया जाने वाला डेटा आने वाले वर्षों में शहरी विकास, जल प्रबंधन, ऊर्जा उपयोग, डिजिटल पहुंच, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं की दिशा तय करेगा। यानी घर में क्या खाते हैं या कैसे रहते हैं… जैसे दिखने में साधारण सवाल ही भविष्य की नीतियों का आधार बनेंगे। जनगणना 2027 इस तरह प्रशासन के लिए सिर्फ आंकड़ा संग्रह नहीं, बल्कि बदलते समाज को समझने और विकास की वास्तविक जरूरतों को पहचानने का सबसे बड़ा अवसर मानी जा रही है।
जिला जनगणना समिति की बैठक का आयोजन सोमवार को कलेक्ट्रेट में किया गया। बैठक में कलेक्टर आशीष तिवारी ने अधिकारियों को जनगणना 2027 को प्रशासनिक दक्षता साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए इसे प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर डिजिटल प्रणाली को समझें, क्योंकि देश में पहली बार बड़े स्तर पर जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी। बैठक में जिला जनगणना अधिकारी के रूप में अपर कलेक्टर नीलाम्बर मिश्रा भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र के चार्ज अधिकारियों, लिपिकों और ऑपरेटर्स को चरणबद्ध तरीके से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रमीण चार्ज जनगणना अधिकारी, समस्त अतिरिक्त चार्ज जनगणना अधिकारी, एक जनगणना लिपिक एवं ऑपरेटर्स को 17 एवं 18 फरवरी तक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा 19 फरवरी एवं 20 फरवरी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Published on:
17 Feb 2026 09:28 am
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