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नववर्ष पर विशेष: एक डॉक्टरी ऐसी भी…

पिता की प्रेरणा से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजो का कर रहे उपचार, क्लीनिक में भी मदद के लिए हमेशा रहते हैं तत्पर

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 01, 2019

Doctor for two years free treatment in katni

Doctor for two years free treatment in katni

कटनी. डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, जो पूरी तरह सही भी है। ईश्वर जीवन देते हैं, मां जन्म देती है और डॉक्टर दर्द से कराहते व बीमारियों से पीडि़त लोगों का इलाज कर उन्हें सेहत से भरा नया जीवन देते हैं। सेवा भाव के कारण ही समाज में डॉक्टरी पेशे और डॉक्टरों का अलग ही सम्मान है। हालांकि कुछ लोग इसे भी व्यावसायिक नजर से देखते हैं, बावजूद इसके कुछ डॉक्टर अभी भी ऐसे हैं, जिनके लिए डॉक्टरी पेशा में सेवा सर्वोपरि है। जो नि:शुल्क सलाह देने के साथ दवाई व अन्य सुविधाएं भी मुहैया करा रहे हैं। ऐसे सेवाभावी चिकित्सक हैं डॉ. अभिषेक शर्मा। डॉ. अभिषेक नियमित रूप से जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों का उपचार करने पहुंचते हैं। सेवा का यह सिलसिला लगभग दो वर्षों से जारी है। जिला अस्पताल में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ. एसके शर्मा के बेटे डॉ. अभिषेक शर्मा प्रतिदिन जिला अस्पताल में दो घंटे मरीजों के बीच बिताते हैं। सुबह 9 बजे से 11 बजे तक अस्पताल में भर्ती मरीजों का उपचार करते हैं। पिता की प्रेरणा से डॉ. अभिषेक समाज सेवा की अलख जगा रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक भर्ती मरीजों व ओपीडी में पहुंचने वाले 40 से 50 मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रहे हैं।

ऐसे शुरू हुआ शिक्षा के बाद चिकित्सा का सफर
डॉ. अभिषेक शर्मा शहर में प्राथमिक, माध्यमिक और हाइस्कूल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए राजधानी भोपाल का रुख किया। यहां से पढ़ाई करने के बाद दिल्ली अपोलो हॉस्पिटल पहुंचे जहां पर एमबीबीएस और कॉर्डियोलॉजिस्ट की डिग्री प्राप्त की। कटनी शहर से खास जुड़ाव होने के कारण वे महानगर की अपेक्षा वापस कटनी शहर आ गए और अक्टूबर 2016 में सरकार द्वारा शुरू कर गई योजना एनपीसीडीसीएस के तहत एनसीडी क्लीकिन में प्रैक्टिस शुरू की। दो माह बाद फिर छोड़ दिया। पिता के 25 साल से अधिक चिकित्सा सेवा में जुड़े होने के कारण उसे आगे बढ़ाने के लिए डॉ. अभिषेक अगस्त 2017 से मुफ्त में जिला अस्पताल के मरीजों का मर्ज हर रहे हैं।

सेवा से मिलती है खुशी
डॉ. अभिषेक कहते हैं कि सेवा में जो खुशी है दौलत और ऐसो-आराम में नहीं है। जब मरीजों की माली हालत और उनके दर्द के कारण जुबां से निकलती आह कानों में पड़ती है तो कई बार डॉक्टर तक विहवल हो जाते हैं। हम हमेशा यही सोचते हैं कि ईश्वर ने हमें इस लायक बनाया है कि हम माध्यम बनकर किसी के दर्द को हर सकते हैं तो फिर हमें उसमें सौदा नहीं बल्कि सेवा को सर्वाेपरि रखना चाहिये। मैं हमेशा मरीजों की हर संभव मदद के लिए तत्पर रहता हूं। मेरी तो अन्य चिकित्सकों से यही अपील रहती है कि पीडि़त मानवता की सेवा में हमेशा आगे आएं। डॉक्टर दोस्तों को भी हमेशा प्रेरित करता हूं।

समाज सेवा की मिसाल
महंगी फीस और महंगा इलाज। इसके चलते अक्सर लोग छोटी-मोटी बीमारियों में डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं। नतीजा, जब रोग बढ़ जाता है, तभी वे डॉक्टरों के पास पहुंचते हैं। लेकिन इस दौर में शहर के कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं, जिन्होंने चिकित्सा को एक पेशे के साथ-साथ जरूरतमंदों की मदद को सेवा भाव का धर्म बना लिया है। उन्हीं में शुमार हैं डॉ. अभिषेक शर्मा। ये डॉक्टर जरूरतमंद गंभीर मरीजों का इलाज भी करते हैं। जनसेवा के भाव को जिंदा रखे हुए हैं।