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एक सप्ताह से आकर शोपीस खड़ीं इ-रिक्शा फॉगिंग मशीनें, फंसा है यह पेंच

E-rickshaw fogging machine purchased

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कटनी

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Balmeek Pandey

Nov 21, 2024

E-rickshaw fogging machine purchased

E-rickshaw fogging machine purchased

मच्छरों को खत्म करने नहीं अमल, लाखों रुपए कीमती खरीदे गए छह वाहन, पुरानी मशीनें पड़ी कबाड़ में, उनसे नहीं किल कराए जा रहे मच्छर
शहर में डेंगू का भी संक्रमण, इसके बाद भी नगर निगम के जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

कटनी. शहरवासियों के स्वास्थ्य को लेकर नगर निगम का अमला बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। डेंगू का डंग फैला हुआ है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं, इसके बाद भी बेतहाशा बढ़े मच्छरों को खत्म करने गंभीर बेपरवाही बरती जा रही है। पूर्व में लाखों रुपए खर्च कर ली गईं फॉगिंग मशीनें कबाड़ में पड़ी हुई हैं। मच्छर जनित बीमारियां बढऩे के बाद भी उने धुआं नहीं कराया जा रहा। नगर निगम के जिम्मेदार सिर्फ नई मशीनरी की खरीदी पर ही रुचि दिखा रहे हैं, जिसके तक एक बार फिर छह वाहन खरीदे गए हैं।
नगर निगम के पास पहले से उपलब्ध छोटी फॉगिंग मशीन में एक घंटे में डीजल-पेटोल खत्म हो जाता था, इसलिए अब बड़ी मशीन ली गई है, ताकि ज्यादा समय तक मशीन काम कर सकें। इन मशीनों के तीन से चार घंटे चलने का दावा किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा इ-रिक्शा वाली छह फॉगिंग मशीनें क्रय की गई हैं। इनकी सप्लाई विनायक एग्रो द्वारा की गई है। ये मशीनें एक सप्ताह से अधिक समय से आकर नगर निगम में शोपीस खड़ी हैं, लेकिन इनका उपयोग अबतक नहीं हो पाया है। मशीन चालू न होने की दो वजह अधिकारी-कर्मचारी बता रहे हैं। एक तो मशीनें का सत्यापन नहीं हो पाना व दूसरी प्रमुख वजह फीता न कट पाना है।

कितने की मशीनें, किसी को नहीं पता
नगर निगम द्वारा इ-रिक्शा फॉगिंग मशीनें कितने रुपए से खरीदी गई हैं, किसी को जानकारी नहीं है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि पुराने आयुक्त विनोद शुक्ला के समय पर टेंडर हुआ था, अभी उनको पता ही नहीं है। फाइल देखने के बाद ही बता पाएंगे। स्टोर कीपर आदित्य मिश्रा का कहना है कि छह माह पुरानी फाइल है, इसलिए बता पाना मुश्किल हो रहा है कि कितने रुपए की हैं। स्टोर विभाग के कर्मचारी भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं।

पुरानी मशीनें बता रहे कंडम
नगर निगम द्वारा पूर्व के वर्षों में आधा दर्जन से अधिक हैंडमेड मशीन खरीदी गई हैं। जिनका उपयोग दो पहिया वाहन या फिर लोडर वाहन में रखकर किया जाता रहा है। अब ये सभी मशीनें परिसर के स्टोर में कबाड़ की तरह पड़ी हैं। ये मशीनें क्यों नहीं चल रहीं, इनसे शहर के वार्डों में मच्छरों को मारने के लिए फॉगिंग क्यों नहीं कराई जा रही, यह कोई नहीं बता पा रहा। नगर निगम के अधिकारियों का यही कहना है कि पुराने मशीनें कई साल से चली हीं नहीं, तो कंडम हो गई हैं।

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फिजूलखर्ची पर नहीं लगाम
नगर निगम द्वारा नई सामग्री खरीदी पर ज्यादा जोर दिया जाता है। एक साल पहले लाखों रुपए की लागत वाली रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी गईं, लेकिन उसका अता-पता नहीं है। इसी प्रकार यूरिनल बॉक्स पुरानी आइटीआई में शोपीस पड़े हैं। इसके अलावा कई मशीनें खरीदी गईं, जो काम करती नहीं दिख रहीं। इसी प्रकार अब मच्छर मारने के लिए नए छह वाहन फॉगिंग मशीन युक्त खरीदे गए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि नगरीय प्रशासन विभाग ने फिजूलखर्ची पर रोक, नगरीय निकायों को आय बढ़ाने कहा है, लेकिन यहां पर एकदम उलट हो रहा है।

आर्थिक स्थिति खराब, फिर भी खरीदी
नगर निगम की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। कुछ माह पहले अधिकारी-कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए थे। कर्मचारियों को प्रदर्शन तक करना पड़ा था। हालात यहां तक आ बने हैं कि नगर निगम की जमा पूंजी एफडी को तोड़ा जा रहा है। 35 करोड़ रुपए से अधिक की एफडी तोड़ी जा चुकी हैं। वहीं दूसरी ओर एक सप्ताह से अधिक समय से आकर वाहन रखे हैं, लेकिन चलना शुरू नहीं हुए, जबकि वर्तमान में शहर में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप देखा जा रहा है।

दो फॉगिंग आना है शेष
नगर निगम द्वारा कुल छह इ-रिक्शा फॉगिंग मशीनें खरीदी गई हैं। ठेकेदार के द्वारा चार मशीनें नगर निगम को भेज दी गई हैं। दो मशीनें मय वाहन के आना शेष हैं, जिनका अधिकारी-कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं।

वर्जन
नगर निगम द्वारा छह इ-रिक्शा चलित फॉगिंग मशीनें खरीदी गईं हैं। स्टोर से टेंडर प्रक्रिया कराते हुए खरीदी कराई गई है। चार मशीनें मय वाहन के आ चुकी है। दो का आना शेष है। सत्यापन प्रक्रिया के बाद विधिवत संचालन शुरू होगा। शहर के 45 वार्डों में मच्छरों को खत्म करने पहल की जाएगी।
संजय सोनी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम।