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समिति प्रबंधक एवं सहायक प्रबंधक ने हजारों किसानों को किया मायूस, सरकार की इस बड़ी योजना से कर दिया वंचित

- जिले में 80 हजार से अधिक ऐसे किसान हैं जो जिले की 54 सहाकारी समितियों से कर्ज, खादी-बीज लेकर खेती-किसानी करते हैं। ऐसे किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान में राहत देने के लिए सरकार द्वारा फसल बीमा जैसी योजना शुरू की है, ताकि उनके नुकसान की भरवाई हो सके। - हैरानी की बात तो यह कि जिले की अधिकांश समिति के समिति प्रबंधकों, सहायक प्रबंधकों की मनमानी के चलते किसान को मायूस होना पड़ा है। - अधिकांश किसान फसल बीमा करा ही नहीं पाए। समितियों ने कर्जदार बताकर उलटे पांव लौटा दिया है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Aug 03, 2019

Symbolic Image of Farmer

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कटनी. जिले में 80 हजार से अधिक ऐसे किसान हैं जो जिले की 54 सहाकारी समितियों से कर्ज, खादी-बीज लेकर खेती-किसानी करते हैं। ऐसे किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान में राहत देने के लिए सरकार द्वारा फसल बीमा जैसी योजना शुरू की है, ताकि उनके नुकसान की भरवाई हो सके। हैरानी की बात तो यह कि जिले की अधिकांश समिति के समिति प्रबंधकों, सहायक प्रबंधकों की मनमानी के चलते किसान को मायूस होना पड़ा है। अधिकांश किसान फसल बीमा करा ही नहीं पाए। समितियों ने कर्जदार बताकर उलटे पांव लौटा दिया है। बता दें कि वर्ष 2018 में जिले में 14 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया था, जबकि उस समय यह बाध्यता थी कि जिन किसानों का समिति में कर्ज है उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। कांग्रेस सरकार की जय किसान ऋण माफी योजना के तहत हजारों किसान ऋणमुक्त हो गए हैं, इसके बाद भी मात्र 5 हजार 197 किसान ही फसल बीमा करा पाए हैं। जिले के अफसरों की बेपरवाही और स्थानीय समिति प्रबंधकों व कर्मचारियों की मनमानी से किसान लाभ से वंचित रह गए हैं।

अधिकारियों का हवाला देकर किया चलता
किसानों का आरोप है कि समिति के अधिकारियों ने जिले के अफसरों का हवाला देकर उन्हें फसल बीमा जैसी योजना से वंचित रखा है। बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तिलगवां समिति के किसानों का आरोप है कि सहायक समिति प्रबंधक व ब्रांच मैनेजर ने तो कलेक्टर का हवाला देकर लौटा दिया है कि कर्जदार किसानों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। बता दें कि पिछले साल एक जुलाई से फसल बीमा का काम प्रारंभ हो गया था, इस बार शासन-प्रशासन द्वारा 25 जुलाई को किसानों को सूचना दी गई और 31 जुलाई को बीमा योजना बंद कर दी गई। इस संबंध में तिलगवां के ब्रांच मैनेजर राजेंद्र तिवारी से दूरभाष पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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केस 01
रमाकांत तिवारी निवासी तिलगवां आदि जाति सहकारी समिति तिलगवां पहुंचे। सहायक समिति प्रबंधक देवेंद्र गर्ग से फसल बीमा कराने के लिए 25 जुलाई को पहुंचे। इस दौरान कह दिया गया कि जबतक कर्ज नहीं चुकाओंगे फसल बीमा नहीं होगा और उलटे पांव लौटा दिया गया है।

केस 02
किसान ज्ञानी चौधरी निवासी तिलगवा 26 जुलाई को सहकारी समिति फसल बीमा कराने के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्हें भी निराशा हाथ लगी। पूर्व में कर्ज होने के कारण फसल बीमा न होने का हवाला देकर चलता कर दिया।

केस 03
इमलाज निवासी किसान सुरेश चौधरी को भी फसल बीमा योजना से वंचित रहना पड़ा। समिति में जाने पर उन्हें भी कर्ज होने की बात कहकर सहायक समिति प्रबंधक ने यह कहकर चलता कर दिया कि कलेक्टर के आदेश हैं कि जबतक किसान कर्ज न चुकाएं फसल बीमा का लाभ न दो।

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केस 04
ग्राम बरयारपुर निवासी बल्लू यादव भी फसल बीमी कराने के लिए समिति पहुंचे, लेकिन फसल बीमा नहीं हुआ। इन्हें भी समिति द्वारा कर्ज का हवाला देकर लौटा दिया गया। यह कह दिया गया कि कर्जधारी हो, नहीं होगा। ब्रांच मैनेजर ने भी समस्या नहीं सुनी।

इनका कहना है
समिति और बैंकों के माध्यम से किसानों को फसल बीमा कराना था। जिन समितियों में किसान पहुंचे हैं उनका पंजीयन हुआ है। हालांकि अल्पवर्षा के कारण कम किसान आए हैं। फसल बीमा के लिए समिति में कर्ज होने पर न होने की बाध्यता नहीं थी, यदि कहीं पर मनमानी हुई है तो जांच कराई जाएगी।
अरविंद पाठक, जिला सहकारी बैंक।