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मध्यप्रदेश के इस जिले में फीस जमा कर सुअरों को मरवा सकेंगे किसान, हो रही यह पहल

जंगली सुअरों के कारण फसलों को नुकसान पहुंचाने की हर जनसुनवाई व अधिकारियों के ग्रामीण क्षेत्र में निरीक्षण के बाद सामने आती है। सुअरों का झुंड भी खेतों में जाकर किसानों की पूरी फसल चौपट कर देते हैं। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान होता है। किसानों को सुअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए अब जिले के किसान सुअरों का शिकार करा सकते हैं।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 22, 2020

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piggery in the city

कटनी. जंगली सुअरों के कारण फसलों को नुकसान पहुंचाने की हर जनसुनवाई व अधिकारियों के ग्रामीण क्षेत्र में निरीक्षण के बाद सामने आती है। सुअरों का झुंड भी खेतों में जाकर किसानों की पूरी फसल चौपट कर देते हैं। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान होता है। किसानों को सुअरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए अब जिले के किसान सुअरों का शिकार करा सकते हैं। इसके लिए किसान को सौ रुपये प्रति सुअरों के मान से रायल्टी जमा करनी होगी। जिला स्तर के आखेट के लिए एक हजार रुपये अनुज्ञा फीस तय की गई है। यह राशि सरकारी कोषायल में जमा होगी। सुअरों का आखेट सिर्फ बंदूक से किया जाएगा। आखेटक के लिए आयुध अधिनियम के आधीन विधिमान्य लाइसेंस होना आवश्यक है। यह अनुमति सिर्फ एक वर्ष के लिए रहेगी। सालभर में एक किसान सिर्फ पांच सुअरों ही मार सकेगा। मारे गए सुअरों की जानकारी भी किसानों को देनी होगी। इसके लिए टीएल की बैठक में भी सभी कृषि अधिकारियों, एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं।

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यह है अनुज्ञा
बता दें कि इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन वन विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल अधिसूचना क्रमांक एफ/22285/1999/10-2 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 (1972 का सं. 53) की धारा 64 के तहत 26 जुलाई 2003 को अधिसूचना जारी की गई है। जिसमें जंगली सुअरों द्वारा फसल हानि किए जाने पर जंगली सुअरों को मारने की अनुज्ञा देने के संबंध में प्रावधान है। यह निर्देश सभी उप संचालकों को जारी किए गए हैं।

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इनका कहना है
सुअरों मारने के लिए किसान को एसडीएम कार्यालय से शुल्क जमा कर अनुमति लेनी होगी। एक साल में पांच सुअरों को फसल नुकसान करने पर मार सकते हैं। जंगली सुअरों से अत्यधिक नुकसान व मिल रही शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है।
एके राठौर, उप संचालक कृषि।

टीएल बैठक में इस संबंध में चर्चा निर्देश मिले हैं। हालांकि अभी तक किसानों ने आवेदन नहीं दिए। आवेदन आने पर स्वीकृतियां दी जाएंगी। फसल सुरक्षा को लेकर यह निर्र्देश जारी हुए हैं।
सपना त्रिपाठी, एसडीएम ढीमरखेड़ा।