कटनी. समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए सोमवार को अंतिम तारीख रही। अंतिम तारीख में पोर्टल बंद व डाउन रहने के कारण खरीदी नहीं हो पाई और जिले के हजारों किसान उपज बेचने से वंचित रह गए। खरीदी पूरी न होने के बाद भी शासन द्वारा तिथि नहीं बढ़ाई गई। टोकन किसानों को जारी किए जा रहे हैं, वह भी जब अनुमति मिलेगी तभी खरीदी हो पाएगी। बता दें कि किसानों से धान खरीदी के लिए इस बार जिलेभर में 60 केंद्र बनाए गए थे। इसबार मौसम की प्रतिकूलता और खाद्य, सहकारिता, नागरिक आपूर्ति निगम की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसान खासे परेशान हुए और अब 5 हजार किसान उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। जानकारी के अनुसार इस साल धान बेचने के लिए सोसायटियों में जिलेभर के 36 हजार 29 किसानों ने पंजीयन कराया था। पहले खरीदी देर से शुरू हुई। विलंब इसलिए किया गया ताकि धान की नमी कम हो जाए और अब निर्धारित तिथि में खरीदी बंद कर दी गई है। 31 हजार किसानों से 24 लाख 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी हुई है। इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक उत्पादन हुआ है। पिछले साल 2 लाख 14 हजार 220 मिट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। जिले के 26 हजार 261 किसानों ने धान समर्थन मूल्य पर बेची थी।
भुगतान पर परिवहन की स्थिति खराब
केंद्रों में किसानों से समय पर सिर्फ धान ही नहीं खरीदी गई बल्कि परिवहन में भी जमकर बेपरवाही हुई है। भुगतान की स्थिति भी बेहद खराब है। अभी तक मात्र 49 प्रतिशत किसानों को ही भुगतान हो पाया है, जबकि 48 घंटे के अंदर भुगतान किए जाने का प्रावधान है।
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नोडल अधिकारी देख रहे हकीकत
पोर्टल बंद होने सहित बारदाना व परिवहन न होने के कारण खरीदी प्रभावित हुई। जो किसान धान नहीं बेच पाए अब उनकी हकीकत देखने के लिए नोडल अधिकारी केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। टोकन पर्ची काटने के आदेश हो गए हैं। बताया जा रहा है कि पोर्टल में लोड बढऩे के कारण पोर्टल डाउन हुआ है। प्रशासन द्वारा किसानों की लिस्ट बनवाई जा रही है, ताकि उनकी जानकारी शासन-प्रशासन को भेजी जा सके। अभी दो लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी होना शेष बताया जा रहा है। सोमवार को 13 सोसायटियों के 650 किसान 45 हजार क्विंटल धान शेष रह गए हैं।
पडऱभटा और धरवारा केन्द्रों में दो सैकड़ा किसानों की खरीदी बाकी, बारदाने की समस्या
उमरियापान नायब तहसीलदार हरिसिंह धुर्वे ने सोमवार को ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के उमरियापान, देवरी मंगेला, धरवारा और पडुरभटा के चारों धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नायब तहसीलदार ने पाया कि देवरी मंगेला और उमरियापान में रजिस्ट्रेशन किये गए किसानों की उपज की खरीदी पूरी हो गई है। अब इन दोनों केन्द्रों में धान की तुलाई बंद हो गई है। दोनों केंद्रों पर अब किसानों की धान नहीं तौली जाएगी, लेकिन नेटवर्क समस्या (साइड बंद) होने के चलते देवरी मंगेला खरीदी केंद्र में अभी करीब एक दर्जन किसानों की ऑनलाइन फीडिंग नही हो पाई है। वहीं धरवारा और पडरभटा खरीदी केन्द्रों में अभी धान की खरीददारी होना बाकी है। इन दोनों केन्द्रों में किसानों की उपज रखी हुई है। दोनों केन्द्रों में बारदाने की भी कमी है। निरीक्षण के दौरान नायब तहसीलदार ने पाया कि धरवारा में 635 किसानों ने उपज बेचने के लिए पंजीयन कराया था। सोमवार तक में 90 किसानों की उपज खरीदना बाकी है। वहीं पडरभटा खरीदी केंद्र में 559 किसानों ने पंजीयन कराया था, यहां अभी 94 किसानों के उपज की नही खरीदी गई।इन दोनों केन्द्रों में अभी बचे हुए करीब दो सैकड़ा किसानों की उपज की खरीदी जानी है। हालांकि नायब तहसीलदार ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी है। वहीं दोनों धरवारा केंद्र प्रभारी रमेश पांडेय और पडरभटा केन्द्र प्रभारी को तेजी से खरीदी करने कहा है। दोनों केन्द्रों में बारदाने उपलब्ध कराने की बात भी तहसीलदार ने उच्च अधिकारियों से कही।
बाकल क्षेत्र में समस्या, हजारों क्विंटल धान की नहीं हुई खरीदी
बहोरीबंद क्षेत्र के धान खरीदी केंद्र बाकल, इमलिया, चांदखेड़ा, सलैया, सिहुंडी, बरही, बाकल में आखिरी दिन खरीदी को लेकर खासी समस्या रही। लगभग 785 किसानों की धान पोर्टल में दर्ज नहीं हो रही है, जिसकी अनुमानित मात्रा है 63 हजार 900 क्विंटल है। बाकल समिति में 303 किसान मात्रा 25 हजार 500 क्विंट, सिहुडी में 128 किसान मात्रा लगभग 9 हजार क्विंटल, सलैया समिति में 190 किसान मात्रा लगभग 16 हजार क्विंटल, चांदन खेड़ा में 12 किसान लगभग 400 क्विंटल, इमलिया में 110 किसान मात्रा लगभग 9 हजार क्विंटल, बरही बाकल में 42 किसान मात्रा लगभग 4 हजार क्विंटल धान की खरीदी होना बाकी है।
इनका कहना है
सर्वर डाउन होने के कारण सोमवार को धान धान खरीदी प्रभारी रहीं। दो लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी अभी शेष है। खरीदी के लिए डेटनहीं बढ़ी है। शासन से टोकन पर्ची जारी करने कहा गया है, अनुमति मिलने के बाद ही इनसे खरीदी होगी।
पीके श्रीवास्तव, जिला खाद्य अधिकारी।