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Mp के इस शहर में इलाज के साथ नालियों में बह रहा खतरनाक जहर!, ईटीपी सिस्टम को लेकर बड़ा खेल

अस्पतालों से निकल रहा बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी, नदी-नालों तक पहुंचकर बढ़ा रहा संक्रमण का खतरा

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 17, 2026

Hospitals Discharging Contaminated Wastewater Into Drains

Hospitals Discharging Contaminated Wastewater Into Drains

कटनी. जिले में अब तक प्रशासन की नजर ठोस मेडिकल वेस्ट जैसे सिरिंज, ड्रेसिंग, इंजेक्शन और पैथोलॉजी कचरे तक ही सीमित रही, लेकिन अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट वॉटर की गंभीर तस्वीर अब सामने आने लगी है। सर्जरी थिएटर, ड्रेसिंग रूम, पैथोलॉजी लैब और वार्डों से निकलने वाला गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नालियों में छोड़ा जा रहा है, जो आगे जाकर रिहायशी इलाकों, खेतों और नदी-नालों तक पहुंच रहा है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ आमजन के स्वास्थ्य पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान जिला अस्पताल में भी इनफ्लुएंस ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) मौजूद नहीं है। बताया जा रहा है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव लंबे समय से कागजों में ही अटका हुआ है। नतीजतन अस्पताल से निकलने वाला गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट नालियों में बहाया जा रहा है।

बिना ट्रीटमेंट बह रहा खतरनाक पानी

सूत्रों के अनुसार जिले के अधिकांश निजी और सरकारी अस्पतालों में ईटीपी या तो है ही नहीं, या फिर केवल रिकॉर्ड तक सीमित है। कई अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर और लैब से निकलने वाले पानी को सामान्य ड्रेनेज लाइन से जोड़ दिया गया है, जहां किसी तरह का फिल्ट्रेशन या केमिकल ट्रीटमेंट नहीं किया जाता।

जिला अस्पताल की जमीनी हकीकत

जिला अस्पताल में सर्जरी वार्ड के पीछे बने ड्रेनेज आउटलेट से दुर्गंधयुक्त पानी लगातार बहता मिला। कर्मचारियों के अनुसार महिला ओटी से निकलने वाले पानी का कुछ हद तक ट्रीटमेंट किया जाता है, लेकिन ऑपरेशन थिएटर, आपातकालीन विभाग और पैथोलॉजी से निकलने वाला गंदा पानी सफाई-धुलाई के बाद सीधे नालियों में बहा दिया जाता है।

आदर्श कॉलोनी से नदी तक दूषित पानी

शहर के आदर्श कॉलोनी क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं। यहां ईटीपी होने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन अस्पतालों से निकल रहा दूषित पानी नालियों के माध्यम से सीधे कटनी नदी तक पहुंच रहा है। नगर निगम द्वारा अब तक इस क्षेत्र में एसटीपी प्लांट नहीं बनाए जाने से इस गंदे पानी को रोका नहीं जा सका है।

ईटीपी लगाना अनिवार्य, फिर भी लापरवाही

प्रदूषण नियंत्रण विभाग की गाइडलाइन के अनुसार 10 बिस्तर से अधिक वाले सभी अस्पतालों में ईटीपी लगाना अनिवार्य है। अस्पताल के पंजीयन और नवीनीकरण के दौरान इसकी जांच भी की जाती है। नियमों के मुताबिक अस्पताल से निकलने वाले गंदे पानी का ट्रीटमेंट करने के बाद ही उसे नालियों में डिस्चार्ज किया जाना चाहिए।

क्या है ईटीपी और क्यों जरूरी

इनफ्लुएंस ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) अस्पतालों से निकलने वाले गंदे पानी को बैक्टीरिया और हानिकारक तत्वों से मुक्त करता है। इस प्रक्रिया के बाद पानी को टैंक में संग्रहित कर जांच के उपरांत बागवानी और साफ-सफाई जैसे कार्यों में उपयोग किया जा सकता है। ट्रीटमेंट के बाद पानी संक्रमण रहित हो जाता है।

इनका कहना

निजी अस्पतालों में वाटर ट्रीटमेंट के लिए ईटीपी लगवाना अनिवार्य है। समय-समय पर इन अस्पतालों की जांच की जाती है और लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सुधांशु तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड