
railway yard
कटनी. दो नदियों के बीच ५ किमी के क्षेत्रफल में बिछी रेलवे की ६० लाइनें और उनसे होकर गुजर रही १०० से अधिक ट्रेनें। यह नजारा होता है देश के दूसरे सबसे बड़े रेलवे यार्ड एनकेजे का। १९ जनवरी १९६१ में शुरू हुए इस रेलवे यार्ड ने शुक्रवार को ५७ वर्ष पूरे किये। इस अवसर पर एनकेजे एरिया मैनेजर कार्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
एरिया मैनेजर एनके राजपूत ने बताया कि एनकेजे यार्ड विश्व के प्रमुख छह यार्डों में से एक यार्ड है। यहां प्रतिदिन १००० वैगन मौजूद रहते हैं। सतना का सीमेंट, सिंगरौली का कोल और कैमोर का लाइमस्टोन सहित अन्य खनिज व उत्पादों की लोडिंग व परिवहन के लिए यार्ड से ही होकर वैगन रवाना किये जाते हैं। यार्ड में ८ स्टेशन बने हुए हैं, जिनमें माध्यम से ट्रेनों का आवागमन कंट्रोल किया जाता है। यार्ड में इलेक्ट्रिक लोको शेड, डीजल लोको शेड व बॉक्स एंड डिपो स्थित है।
जल्द फ्लाईओवर से गुजरेंगी ट्रेनें
यार्ड से होकर गुजरनी वाली ट्रेनों के यातायात को कम करने रेलवे द्वारा यहां ग्रेड सेपरेटर (फ्लाईओवर) का निर्माण भी करवाया जा रहा है। रेलवे ने सर्वे पूरा कर दिया है, जल्द ही कार्य शुरू होगा। यह सेपरेटर यार्ड के ऊपर से होकर गुजरेगा।
यह रहेगा स्वरूप
जानकारी के अनुसार फ्लाई ओवर का निर्माण एनकेजे सी केबिन के पास से शुरू किया जाएगा जो यार्ड के ऊपर से होता हुआ मुड़वारा स्टेशन को क्रॉस करेगा और मझगवां फाटक के पहले समाप्त किया जाएगा। हालाकि अफसर अभी इसकी दूरी पर सर्वे कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि २१ किमी लंबे इस ब्रिज को बनाने में 582 करोड़ खर्च होंगे। ब्रिज से गुजरनी वाली एक लाइन 14 किमी लंबी होगी और दूसरी तकरीबन 7 किमी की। यह ब्रिज कटनी यार्ड के ऊपर से होते हुए बीना लाइन को जोड़ेगा। इसका फायदा पैसेंजर और गुड्स, दोनों ट्रेनों को मिलेगी।
यह होगी खासियत
– इस ब्रिज में दो लाइन गुजरेगी। अप लाइन तकरीबन 14 किमी तथा दूसरी लाइन तकरीबन 7 किमी की होगी।
– डिजिटल सिंग्नल होने के साथ इसके रखरखाव सभी ऑनलाइन होगा
– ब्रिज के खंभों पर ट्रेन का पडऩे वाला प्रेशर हर ट्रेन के गुजरने पर नापा जाएगा
– ब्रिज को कटनी न्यू जंक्शन के ऊपर से निकालते ही बायपास बनाया जाएगा
– ब्रिज के नीचे स्टेशन और दूसरी लाइन होगी, इसमें इसका कोई प्रभाव नहीं होगा
Published on:
21 Jan 2018 08:02 pm
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