
कटनी. त्रेतायुग के श्रवण कुमार की आपने खूब कहानी सुनी व पढ़ी होगी जो आंखों से दिव्यांग अपने माता-पिता को कांवर में बैठाकर तीर्थदर्शन कराते हैं। लेकिन आज हम आपको कलयुग के एक ऐसे श्रवण कुमार के बारे में बताते हैं जिनकी कहानी भी कुछ इसी तरह की है। कलयुग के इन श्रवण कुमार का नाम डी कृष्णकुमार है जो कर्नाटक के मैसूर के रहने वाले हैं।
65 हजार की नौकरी छोड़ मां को करा रहे भारत भ्रमण
44 साल के डी कृष्णकुमार ने बताया कि उनकी मां हमेशा घर की चार दीवारी में कैद रहीं। 2015 में पिता का देहांत हुआ तो मां ने कहा कि वो पास के बेल्लूर मंदिर में भी दर्शन करने नहीं जा पाई। बस यही बात उन्हें चुभ गई और लगा कि मां को तीर्थदर्शन भी नहीं करा पाया तो मेरी जिंदगी पर धिक्कार है। फिर क्या था 65 हजार रुपए महीने की नौकरी छोड़ी और पापा का गिफ्ट दिया हुआ 24 साल पुराना स्कूटर उठाकर मां को भारत भ्रमण कराने निकल पाड़ा। 2018 से शुरु हुआ भारत भ्रमण का सिलसिला अभी भी जारी है। डी कुमार ने बताया कि उन्होंने 16 जनवरी 2018 को मैसूर से यात्रा शुरु की थी और अब तक 66 हजार किमी. की यात्रा कर चुके हैं।
स्कूटर से भारत भ्रमण के पीछे बताई खास वजह
73 साल की बूढ़ी मां को स्कूटर से भारत भ्रमण कराने को लेकर जब डी कृष्ण कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि ये स्कूटर उन्हें पापा ने गिफ्ट किया था और अब जब पापा इस दुनिया में नहीं हैं तो मां को इसी स्कूटर से ये सोचकर यात्रा करा रहा हूं कि ऐसा करने से मां को पिता के साथ रहने का एहसास होता होगा। खास बात यह है कि इस यात्रा में वो किसी से पैसों की मदद नहीं लेते और अपनी जमा पूंजी से ही मां को तीर्थ दर्शन करा रहे हैं। डी कृष्ण कुमार ने बताया कि मां को केरला, तमिलनाडू, पांडिचेरी, कर्नाटका, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य प्रदेश नेपाल, म्यामार आदि की यात्रा करा चुके हैं।
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Published on:
02 Apr 2023 07:08 pm
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