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छह हजार से अधिक को दिलाना है रोजगार, चार माह में कंपनी दिला पाई मात्र 8 युवाओं को काम, पीपीटी मोड के चलते है यह हाल

वित्तीय वर्ष 2019 में मई-जून माह से रोजगार कार्यालय को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीटी) मोड में कर दिया गया है। इसमें प्रदेश के 15 जिले शामिल हैं। कटनी में यशस्वी एकेडमी फॉर स्किल डेव्हलपमेंट देख रही है। कंपनी के अनुसार सालभर में एक लाख युवाओं को जॉब फेयर, कॅरियर काउंसलिंग व ऑफिस काउंसलिंग के माध्यम से विभिन्न कंपनियों में रोजगार दिलाना है। जून माह से कंपनी कटनी में काम देख रही है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Oct 07, 2019

Loss due to employment department going to private public partnership

Loss due to employment department going to private public partnership

कटनी. वित्तीय वर्ष 2019 में मई-जून माह से रोजगार कार्यालय को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीटी) मोड में कर दिया गया है। इसमें प्रदेश के 15 जिले शामिल हैं। (Yashswi Academy for Skill Development) कटनी में यशस्वी एकेडमी फॉर स्किल डेव्हलपमेंट देख रही है। कंपनी के अनुसार सालभर में एक लाख युवाओं को जॉब फेयर, कॅरियर काउंसलिंग व ऑफिस काउंसलिंग के (employment department) माध्यम से विभिन्न कंपनियों में रोजगार दिलाना है। जून माह से कंपनी कटनी में काम देख रही है। कटनी में लगभग 6 हजार 666 बेरोजगार युवक-युवतियों को सालभर में रोजगार मुहैया कराना है। जानकर ताज्जुब होगा कि हर माह लगभग 500 युवाओं को रोजगार से जोडऩा है, लेकिन कंपनी चार माह में महज 8 लोगों को ही रोजगार दिला पाई है। जबकि पूर्व के वर्षों में रोजगार कार्यालय के माध्यम से युवाओं को रोजगार दिलाने की स्थिति बेहतर रही है। हैरानी की बात तो यह है कि जिस कंपनी को काम दिया गया है उस कंपनी द्वारा कटनी में महज एक व्यक्ति को रखा गया है। एक कर्मचारी के भरोसे न तो काउंसिलंग हो पा रही न ही जॉब फेयर आयोजित हो पा रहे। अभी तक सिर्फ एक जॉब फेयर जुलाई में एक प्राइवेट कंपनी के साथ हुआ है। जिसमें 300 युवा पहुंचे थे, लेकिन रोजगार महज 3 को ही मिल पाया है। ऐसे में सरकार की यह योजना जिले में तोड़ रही है, और जिम्मेदार अनजान बने हैं।

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यह है दो साल का आंकड़ा
जिले में जॉब फेयर, रोजगार मेला योजना 2008 से संचालित है। शिक्षित एवं अशिक्षित युवाओं को निजी क्षेत्र की कंपनियों को बुलाकर रोजगार से जोड़ा गया है। इसमें 2017-18 में 289 युवाओं रोजगार मिला है। जबकि 2018-19 में स्थिति काफी बेहतर रही है। 4 हजार 631 युवाओं को रोजगार मिला था, जिसमें 4 हजार 448 पुरुष और 147 महिला शामिल थीं। जबकि कैरियर काउंसलिंग में 2017-18 में 3 हजार 355 और 2018-19 में 1346 को विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया।

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यह है युवाओं को रोजगार देने की स्थिति
माह संख्या कंपनी
जून 02 टाटा मोटर्स
जुलाई 04 आयसर, टाटा
अगस्त 04 आयसर
सितंबर 02 सिगनेट

यह बन रही कम रोजगार की वजह
- 8750 रुपये वेतन के कारण नौकरी नहीं करते युवक।
- कम रुपये के कारण बाहर जाने से कतराते हैं युवक।
- बाहर जाकर कंपनी में सेट नहीं हो पाते शहर के युवा।
- 100 में से 5 बच्चे जाते हैं, दो बच्चे ही करते हैं काम।
- बच्चों को नहीं मिल पा रहा उचित ढंग से मार्गदर्शन।
- जिले में लगभग 10 कर्मचारी की होनी थी व्यवस्था।
- कंपनी की तरफ से नहीं हैं काउंसलर व रिसेप्सनिष्ठट।
- कंपनी को हर माह 10 का अनिवार्य है प्लेसमेंट कराना।

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इनका कहना है
हमें अनुबंध के अनुसार पूरे एक लाख युवाओं को रोजगार एक साल में दिलाना है। अभी कटनी जिले में सिर्फ 8 लोगों को मिला है। स्टॉफ कम है यह सही है, लेकिन बढ़ाना कंपनी को है। बेरोजगार भी कम आ रहे हैं। युवा 100 में से दो ही काम के आते हैं। अभी जॉब फेयर भी नहीं लग पाए, फिर भी कोशिश कर रहे हैं।
सुमित श्रीवास्तव, सेंटर हैड।

जिस कंपनी को काम मिला है उसमें स्टॉफ की ही कमी है। कटनी में मात्र एक व्यक्ति बैठ रहा है। अभी तक सिर्फ एक जॉब फेयर लगा है वह भी हमारे विभाग की मदद से। युवा आ रहे हैं, लेकिन काउंसलिंग नहीं हो पा रही। जॉब फेयर नहीं होंगे, कंपनी नहीं आएंगी तो कैसे बेरोजगारों को काम मिलेगा।
डीके पासी, जिला रोजगार अधिकारी।