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वादों की जुमलेबाजी और नियमों के पेंच में उलझा ‘मेडिकल कॉलेज’, सामने आई यह हकीकत

सैद्धांतिक मंजूरी के दो बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण, पीपीपी मॉडल से सरकारी मॉडल तक उलझा फैसला, अब फिर टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 24, 2025

Medical College is not opening in Katni

Medical College is not opening in Katni

कटनी. मेडिकल कॉलेज अब तक सिर्फ सत्ता की घोषणाओं और कागजी जुमलों का शिकार बनकर रह गया है, चुनाव से पहले आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है, कभी सरकारी, कभी पीपीपी मॉडल, हर बार नाम बदलते हैं, पर हालात नहीं, छह माह पहले टेंडर निकला, ठेकेदार अपात्र निकला और अब फिर से टेंडर की बात हो रही है, न तो निर्माण शुरू हुआ, ना कोई जवाबदेही तय हुई, जिला जेल के पीछे 25 हेक्टेयर जमीन पर आज तक सिर्फ सन्नाटा पसरा है, सिस्टम की नाकामी ने कटनी के युवाओं के मेडिकल भविष्य को अधर में लटका दिया है, क्या सिर्फ वादों से मेडिकल कॉलेज बनेगा…?

जिले का बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज एक बार फिर घोषणा की जुमलेबाजी और प्रक्रियात्मक उलझनों में फंस गया है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के ठीक 3 दिन पहले सरकार ने इस मेडिकल कॉलेज के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी थी, लेकिन इसके बाद से प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन ठंडे बस्ते में चला गया। शुरुआत में इसे सरकारी मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित करने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल में परिवर्तित करने का प्रयास हुआ। इस पर जब स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ, तो योजना एक बार फिर से ठहर गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण के लिए 6 महीने पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी, लेकिन चयनित ठेकेदार आवश्यक योग्यताएं पूरी नहीं कर पाया। अब प्रशासन एक बार फिर नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

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जिला जेल के पीछे चिन्हित है 35 हेक्टेयर भूमि

कॉलेज निर्माण के लिए जिला जेल के पीछे 25 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की जा चुकी है, लेकिन अभी तक न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ है और न ही अंतिम रूप से टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकी है। इस जमीन को तत्कालीन मंत्री विश्वास सारंग ने भी निरीक्षण कर उपयुक्त बताया था। आवंटन की प्रक्रिया भी हो गई है, लेकिन अबतक निर्माण की पहल नहीं हो पाई।

विकास की दौड़ में पिछड़ता कटनी

कटनी जिला पिछले कई वर्षों से विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ता जा रहा है। छोटे-छोटे जिले जहां मेडिकल, शिक्षा और अधोसंरचना के क्षेत्र में आगे निकल चुके हैं, वहीं कटनी में जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते बड़ी योजनाएं सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गई हैं।

सरकारी मेडिकल कॉलेज के ये हैं फायदे

स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों को जबलपुर या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी, कॉलेज खुलने से मेडिकल, नर्सिंग और सपोर्ट स्टॉफ को रोजगार मिलेगा, शिक्षा के नए अवसर, कटनी और आसपास के छात्रों को मेडिकल शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, कॉलेज के निर्माण और संचालन से स्थानीय व्यवसाय, किराया बाजार और सेवाओं में तेजी आएगी, जिले को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल सकती है।

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6 सितंबर 23 को आया था पत्र

2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरा कटनी में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई थी। 6 अक्टूबर 2023 में मेडिकल कॉलेज के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति मिली थी। लेकिन अबतक मेडिकल कॉलेज खोले जाने को लेकर कोई सार्थक पहल की गई। कटनी में सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर जिला जन अधिकार मंच द्वारा भी मांग रखी गई, कई संगठनों ने अभियान चलाया, बावजूद इसके अबतक मैदानी स्तर पर खास पहल नहीं दिख रही।

अधिकारियों ने कही यह बात


डॉ. आरके अठया, सीएमएचओ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज पहले पीपीपी मोड में बनने की पहल चल रही थी, फिर सरकारी कॉलेज बनने को लेकर मंथन चला। टेंडर हो गया था, लेकिन ठेकेदार नियमों को पूरा नहीं कर पाया, जिस कारण अब नए सिरे से टेंडर होगा। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा ने कहा कि अभी तो इसमें टेंडर प्रक्रिया ही नहीं हुई है।

जनप्रतिनिधियों का यह है तर्क


संदीप जायसवाल, विधायक का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की टेंडर प्रक्रिया शीघ्र हो और निर्माण शुरू हो, इसके लिए आवश्यक पहल की जाएगी। इस संबंध में भोपाल में अधिकारियों से भी बातचीत की गई है। घोषणा को शीघ्र पूरा कराया जाएगा, यह जिले का प्रमुख प्रोजेक्ट है। राजेंद्र शुक्ला, उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कटनी में खुलने वाले पीपीपी मोड के मेडिकल कॉलेज के प्रति सर्वाधिक कंपनियां एवं संस्थानों ने दिलचस्पी दिखाई है। जिला अस्पताल शासकीय स्वरूप में यथावत कार्य करता रहेगा। यहां मरीजों को नि:शुल्क चिकित्सा और दवाइयां पूर्ववत मिलती रहेंगी।


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