
कटनी। पिछले दिनों जबलपुर में सूकरों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का मामला सामने आया। जिसके बाद विशेषज्ञों की निगरानी में पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने बुधवार शाम से अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से संक्रमित जोन के सूकरों को मानवीय तरीके से मारने यानि मर्सी किलिंग का काम शुरू किया।
मालिकों से चर्चा के बाद उठाया यह कदम
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से संक्रमित सूकर मिलने के बाद उन्हें मारने के लिए शुरू किए गए इस अभियान में विशेषज्ञों की टीम ने पहले सूकर मालिकों से चर्चा की। उसके बाद टीम के चिकित्सकों ने सूकरों को पहले बेहोश किया और उसके बाद इंजेक्शन के जरिए केमिकल उनकी नसों में पहुंचाया गया। कुछ देर में वे मौत की नींद सो गए। बाद में उन्हें नगर निगम के सहयोग से शहर के बाहर गाइडलाइन के अनुसार दफना दिया गया।
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शहर के वार्ड नंबर 18 और 30 में सूकरों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि की गई थी, जिसके बाद दोनों वार्ड में संक्रमित जोन बनाए गए थे और सर्वे कार्य कराया गया था। इसमें 115 जीवित सूकर मिले थे। इसके अलावा शहर में 97 सूकर मृत भी मिल चुके हैं। पशु विभाग की टीम ने संक्रमित सूकरों को मारने का मर्सी किलिंग अभियान इन दोनों ही वार्ड में किया। उन्होंने मालिकों को मुआवजा देने के लिए उनका वजन भी कराया। मर्सी किलिंग अभियान के दौरान पुलिस बल भी मौजूद था।
विशेषज्ञों ने समझाई प्रक्रिया, अभियान आज भी जारी
मर्सी किलिंग के लिए जबलपुर संभागीय पशु अनुसंधान लैब के विशेषज्ञ डॉ. पीके सोलंकी, डॉ. एसके विश्वकर्मा को बुलाया गया था। प्रभारी उपसंचालक डा. आरके सिंह की मौजूदगी में जबलपुर से आए विशेषज्ञों ने सबसे पहले वार्ड 30 में कटनी पशु चिकित्सा विभाग की टीम को एक सूकर की मर्सी किलिंग कर प्रक्रिया समझाई और उसके बाद वार्ड 30 में ही तीन अन्य सूकरों को मारने का काम टीम ने किया। देर शाम वार्ड 18 में पहुंची टीम ने एक सूकर को मानवीय मृत्यु दी। गुरुवार से कटनी के चिकित्सकों की टीम दोनों वार्डों में मर्सी किलिंग अभियान के लिए जुट गई है। संक्रमित जोन में चिन्हित किए गए जीवित सूकरों में से शेष बचे 110 सूकरों की मर्सी किलिंग की जाएगी।
Updated on:
10 Nov 2022 12:42 pm
Published on:
10 Nov 2022 12:13 pm
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