9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

300 डिजिटल कैमरों से 150 बीटों में 150 कर्मचारियों की टीम कर रही जंगल में वन्यप्राणियों की गणना, इकोलॉजिक ऐप से दर्ज हो रहा डेटा

वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एवं नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की पहल पर शुरू हुआ सर्वेक्षण, पहले तीन दिन मांसाहारी जीवों की पड़ताल, फिर तीन दिन होगी शाकाहारी प्राणियों गणना

4 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Jan 08, 2026

Counting of Tigers, Leopards and Other Wildlife

Counting of Tigers, Leopards and Other Wildlife

बालमीक पांडेय @ कटनी. जिले में इन दिनों सभी मांसाहारी एवं शाकाहारी वन्य प्राणियों की गणना वन विभाग द्वारा कराई जा रही है। यह गणना 5 जनवरी से शुरू होकर 12 जनवरी तक चलेगी। जिले के छह वन परिक्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली 150 बीटों में यह सर्वे किया जा रहा है। यह गणना वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एवं नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की पहल पर कराई जा रही है, जिसे पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार अंजाम दिया जा रहा है। इस गणना के बाद न सिर्फ वन्यप्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी अहम होगी।
इस गणना के लिए इकोलॉजिक ऐप का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार तकनीकी संसाधनों में बड़ा इजाफा किया गया है। जहां पिछले वर्ष केवल 15 डिजिटल कैमरों के माध्यम से गणना की गई थी, वहीं इस बार 300 डिजिटल सेंसर कैमरे वन क्षेत्रों में लगाए गए हैं।

यह है कैमरों की खासियत

इन कैमरों की खासियत यह है कि जैसे ही कोई वन्य प्राणी चाहे वह बाघ, तेंदुआ, भालू या अन्य कोई प्रजाति कैमरे की रेंज में आता है, उसकी फोटो स्वत: कैप्चर हो जाती है। साथ ही यह भी रिकॉर्ड हो जाता है कि संबंधित प्राणी कितनी बार उस क्षेत्र में आया। जानकारी के अनुसार, सर्वे के पहले तीन दिनों में मांसाहारी वन्य प्राणियों की गणना की जा रही है। इसमें वन्य प्राणियों की पहचान फोटो, पगमार्क, मांस खरोच, पेशाब, मल-त्याग और शिकार के अवशेषों के आधार पर की जा रही है। इसके साथ ही उनके प्राकृतिक आवास और सीमा क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए गणना पर फोकस किया जा रहा है। इस कार्य में जिले के लगभग 150 वन अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

9 से शाकारी जीवों की गणना

9 जनवरी से अगले तीन दिनों तक शाकाहारी वन्य प्राणियों की गणना की जाएगी। इसके लिए जंगल में 2 किलोमीटर लंबी ट्रांजैक्ट लाइन डाली गई है। कर्मचारियों को सीधी रेखा में हर 400 मीटर पर तीन दिनों तक पैदल चलकर गणना करनी होगी। इस दौरान जो भी शाकाहारी वन्य प्राणी दिखाई देंगे, उनका रिकॉर्ड जीपीएस के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। साथ ही मल-त्याग एवं प्रत्यक्ष दर्शन के आधार पर भी आंकलन किया जाएगा। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा गलत या झूठी गणना की जाती है, तो इकोलॉजिक ऐप उसे तुरंत पकड़ लेगा। प्रत्येक बीट में कर्मचारियों को एक मोबाइल फोन उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से वे डेटा फीड कर रहे हैं। प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 11 बजे तक जीपीएस चालू रखकर कर्मचारियों को गणना रिपोर्ट भरनी अनिवार्य की गई है। वन विभाग का मानना है कि इस वैज्ञानिक और तकनीकी सर्वे के माध्यम से जिले में वन्य प्राणियों की वास्तविक संख्या सामने आएगी, जिससे भविष्य की संरक्षण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

इन गांवों में ग्रामीणों व वन्यप्राणियों के बीच हो रहा संघर्ष

बरही क्षेत्र में सुतरी, करौंदीकलां, करौंदी खुर्द, मचमचा, बड़ेरा, कुआं, नदावन, लुरमी, झिरिया, हथेड़ा, जाजागढ़, बिचपुरा, गब्दी निपनिया, जगुआ, बम्हौरी, खितौली, हदरहआ, सलैया सिहोरा, पिपरिया कलां, नदावन, सेमरिया सानी, खितौली सहित अन्य गांव हैं सबसे ज्यादा बाघ, तेंदुआ, भालू के हमले हुए हैं। यहां पर आयेदिन संघर्ष के मामले सामने आते हैं। हाल ही में विजयराघगवढ़ क्षेत्र में घुन्नौर में तेंदुओं का हमला जो 60 साल बाद सामने आया है। इसी प्रकार शाहडार का जंगल व अब बहोरीबंद क्षेत्र में तेंदुओं की चहलकदमी ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है।

सर्वे से आंकलन व बढ़ेेगी सुरक्षा

इस गणना के बाद से यह पता चल सकेगा कि जिले में वास्तव में कितने और किस प्रकार के वन्यप्राणी हैं। हालांकि पिछले तीन साल में संख्या बढ़ी है। मानव व जंगली जानवरों के बीच बढ़े आंकड़े यह साफ बयां कर रहे हैं। बाघ, तेंदुआ, भालू, शूकर सहित अन्य जीवों के हमले में तीन साल में पांच लोगों की मौत हो गई है व 2 हजार 322 लोग घायल हुए हैं। वर्तमान में कटनी जिले में 18 से अधिक बाघ व 100 अधिक तेंदुआ, 100 अधिक भालू पाए जा रहे हैं। बुधवार को एकेले बहोरीबंद क्षेत्र में छह भालू दिखे हैं।

यह होगा फायदा

सर्वेक्षण के बाद वन्यप्राणियों के संघर्ष को रोकने का प्रयास होगा, वनों का प्रबंधन बेहतर होगा, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का सही वर्गीकरण हो सकेगा, दबाव कम होगा, वन्य प्राणियों के आंकलन से क्षेत्र में प्रबंधन बेहतर हो सकेगा।

हाल में हो चुके हैं ये बड़े हमल

- बरही वन परिक्षेत्र के बिचपुरा बीट में मवेशी चरा रहे धर्मेंद्र सिंह पर 7 अगस्त को बाघ ने हमला कर उतार दिया था मौत के घाट।
- बरही वन परिक्षेत्र के रोहनिया बीट में 11 दिसंबर को बकरी चरा रही बेटी बाई पर बाघ ने गंभीर रूप से किया है हमला।
- बरही वन परिक्षेत्र के उबरा गांव में 20 अगस्त को बकरी चरा रहे बैसाखू कोल पर बाघ ने किया है हमला।
- ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में 12 फरवरी को छीतापाल गांव में बाघ ने हमला कर लटोरी गोड़ व शुभम विश्वकर्मा को किया था घायल।
- बरही वन परिक्षेत्र के 31 जनवरी को खेत में तकवारी कर रहे किसान सुग्रीव सिंह पर हमला कर किया था घायल।
- 30 दिसंबर को विगढ़ क्षेत्र के ग्राम घुन्नौर में तेंदुआ ने 10 साल के बच्चे राज कोल पर हमला कर उतारा है मौत के घाट।

  • वर्जन

जिले में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एवं नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की पहल पर गणना शुरू कराई गई है। 12 जनवरी तक यह गणना चलनी है। गणना के लिए 150 अधिकारी-कर्मचारी व 300 डिजिटल कैमरे लगाए गए हैं। जीपीएस लोकेशन के आधार पर इकोलॉजिकल एप में सर्वे रिपोर्ट फीड हो रही है। इस सर्वे से वन्यप्राणियों का सही सर्वेक्षण व उनकी सुरक्षा के लिए इंतजाम हो सकेंगे।

गौरव शर्मा, डीएफओ।