
Nagar nigam katni: Big negligence from city bus operation in katni
कटनी. नगर निगम द्वारा शहर के लोगों को दिखाया जाने वाला सिटी बस (Katni City Bus Scheme) का सपना कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहा। पिछले नौ वर्षों से नगर निगम और बस ऑपरेटरों के मध्य यह सबसे बड़ी योजना उलझकर रह गई है। हैरानी की बात तो यह है कि ऑपरेटर कटनी शहर में बस चलाने को लेकर आगे ही नहीं आ रहे। (City Bus) इसके लिए नगर निगम अबतक 8 बार टेंडर जारी कर चुकी है, लेकिन अबतक कोई भी ऑपरेटर आगे नहीं आया है। नगरीय प्रशासन विभाग की यह पहल हर बार फेल साबित हो रही है। अब एक बार फिर नगर निगम द्वारा रिटेंडर कराया गया है। रिटेंडर की कार्रवाई 11 सितंबर को हुई है। 10 दिवस में इसमें फाइनेंसियल बिड बुलाई जाएगी। हैरानी की बात तो यह है कि शहर की सड़कों को संकरा और अनुबंध की शर्तों में पेंच के कारण यह योजना मूर्तरूप नहीं ले पा रही। पहले तीन करोड़ 60 लाख और दूसरे क्लस्टर में 3 करोड़ 44 लाख की सिटी बस योजना कागजों में ही दौड़ रही है। वहीं इस मामले में बस ऑपरेटर संजय गुप्ता ने चौकाने वाला खुलासा किया है। नगर निगम के अधिकारियों द्वारा विलंब से इंटीमेशन देने के कारण प्रक्रिया फिर अधर में लटक गई।
क्लस्टर किया गया कैंसिल
सिटी बस के लिए 2018 में क्लस्टर बनाया गया था, जिसे कैंसिल कर दिया गया है। इसमें 100 दिवस की अवधि में बसों का संचालन शुरू करना था। 8 जनवरी 19 को प्रथम क्लस्टर दीनदयाल कटनी सिटी बस सर्विसेज लिमिटेड के तहत लोक सेवक ट्रेवल्स जबलपुर से अनुबंध हुआ था, लेकिन बस ऑपरेटर ने रुचि नहीं दिखाई। तीन बार नोटिस भी जारी हुआ, ऑपरेटर ने जवाब भी नहीं दिया। इसमें दूसरा क्लस्टर जुलाई में लागू किया, फिर भी बात नहीं बनी।
इन-इन तारीखों में हुए टेंडर
- 01 दिसंबर 2017
- 03 जनवरी 2018
- 3 फरवरी 2018
- 15 मार्च 2018
24 अप्रैल 2018
25 जून 2018
चार गाडिय़ा कर ली थी तैयार
इस पूरे मामले को लेकर बस ऑपरेटर संजय शर्मा जबलपुर का कहना है कि नगर निगम से इंटीमेशन लेट मिला। जिस समय यह प्रक्रिया चल रही थी तो बसों के परमिट मिलना बंद हो गए थे। 70 हजार रुपये की किश्त हर माह किश्त, 10 हजार से अधिक टैक्स, 8 माह का परमिट भरना होता है। फरवरी में परमिट रिलीज होना शुरू हुआ। संपर्क में रहने के बाद भी नगर निगम ने समय नहीं दिया। जिस नाम से टेंडर लिया था उसमें सब्सिडी नहीं मिल रही थी। फर्म रजिस्टर्ड कराने का प्रक्रिया कर रहे थे। इन्वाइस चेंज नहीं हो सकती थी। फिर भी हमने एक माह के अंदर बस चलाने को बोल दिया था। चार गाडिय़ां भी तैयार करा ली थीं, लेकिन नगर निगम ने क्लस्टर ही कैंसिल कर दिया।
इनका कहना है
जिस ऑपरेटर ने टेंडर लिया था उसकी बैंक गारंटी राजसात हो गई है। इस मामले में फिर से टेंडर प्रक्रिया हुई है। सिटी बस योजना को लेकर बस ऑपरेटर आगे आएं और शहर में बसें चल सकें इसके लिए पहल की जाएगी।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।
Published on:
14 Sept 2019 12:18 pm
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