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सात साल में टैक्स वसूली के लिए लागू नहीं हो पाया जीआइएस सिस्टम, दोबारा किसी ने नहीं डाली निविदा, लग रह करोड़ों की चपत

शहर में नगर निगम द्वारा टैक्स वसूली के लिए 2013 में जीआइएस सिस्टम लागू किया गया था। सात साल बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। इसका सीधा असर नगर निगम के राजस्व पर पड़ रहा है। भारी मात्रा में संपत्ति कर, जलकर, स्वच्छता कर, समेकित कर, संपत्ति उपकर, शिक्षा उपकर में टैक्स चोरी हो रही है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 07, 2020

Sanitation tax imposed arbitrarily in Katni city

Sanitation tax imposed arbitrarily in Katni city

कटनी. शहर में नगर निगम द्वारा टैक्स वसूली के लिए 2013 में जीआइएस सिस्टम लागू किया गया था। सात साल बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। इसका सीधा असर नगर निगम के राजस्व पर पड़ रहा है। भारी मात्रा में संपत्ति कर, जलकर, स्वच्छता कर, समेकित कर, संपत्ति उपकर, शिक्षा उपकर में टैक्स चोरी हो रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाली एजेंसी को 57 हजार परिवार के मान से भुगतान किया जा रहा है, लेकिन संपत्ति 45 हजार 170 के मान से ही टैक्स की वसूली हो रही है। हर साल नगर निगम को करोड़ों रुपये के टैक्स की चपत लग रही है इसके बाद भी टैक्स चोरी को रोकने कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे। जानकारी के अनुसार आवा कंसलटेंसी सागर को काम मिला था, जिसने 2013 में पहले चरण का काम हाउस होल्ड सर्वे व उसकी जानकारी अपडेट करनी थी। दूसरे चरण में 2014-15 बनर्जी कंसलटेंडी कलकत्ता को काम दिया गया, जिसमें बिल जनरेट करना और कैसे टैक्स वसूली आदि की कार्यवाई की जानी है इस संबंध में काम करना था। काम नहीं। इस पर जनवरी 2018 में ठेका निरस्त कर दिया। यह कंपनी पांच नगर निगम का काम देख रही थी। जीआइएस बेस्ड प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम शुरू होने से एक क्लिक करते ही प्रॉपर्टी का पूरा ब्यौरा निगम के सामने होता। इसके आधार पर टैक्स की गणना होती। हर इंच के निर्माण पर टैक्स देना होता।

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खास-खास:
- नगर निगम के अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा, इसके बाद दूसरे चरण की कार्रवाई शुरू हुई, नवंबर माह में निविदा निकली, लेकिन कोई कंपनी नहीं आई।
- फिर से नगर निगम ने निविदाएं हैं, 30 जनवरी को फिर से द्वितीय चरण के लिए द्वितीय निविदा प्रक्रिया होगी, अभी पहले चरण के सर्वे के आधार मानकर टैक्स वसूली हो रही है।
- नगर निगम ने 7 करोड़ रुपये वसूली कर वसूली का रखा गया है लक्ष्य, पांच करोड़ की हो गई है वसूली, लोक अदालत से बकायदादारों में की जा रही कमी।
- टैक्स वसूली के लिए चार जोन में बांटा गया है शहर, अ में 17 वार्डं, ब में 13 वार्ड, स में 10 वार्ड व द में पांच वार्ड किए गए हैं शामिल, मुख्य मार्ग, अंदर के मार्गों का अलग-अलग है कर निर्धारण।
- इ-नगर पालिका सिस्टम में भी नहीं आई प्रगति, छह हजार वार्षिक भाड़ा में रहता है उसको ही मिलती है छूट, दिया जाता है समेकित कर।

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टैक्स जमा न करने वालों पर नहीं सख्ती
शहर में ऐसे कई व्यापारी व परिवार हैं जो कई वर्षों से टैक्स जमा नहीं कर रहे। टैक्स जमा न करने वालों के खिलाफ नगर निगम सख्ती नहीं कर रहा। बिल रिमांड व नोटिस तक की कार्रवाई होती है। कुर्की की दो साल में कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2015-16 में 2 कुर्कीं हुईं थीं, माधवशाह मार्केट एक मार्केट इंडस्ट्रीयल एरिया में हुई थी।

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यह है जीआइएस
जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआइएस) एक भू-विज्ञान सूचना प्रणाली है। यह संरचनात्मक डाटा बेस पर आधारित है। यह भौगोलिक सूचनाओं के आधार पर जानकारी प्रदान करती है। संरचनात्मक डाटाबेस तैयार करने के लिए वीडियो, भौगोलिक फोटोग्राफ और जानकारियों आधार का कार्य करती हैं। इसके माध्यम से टैक्स वसूली किया जाना था।

इनका कहना है
जीआइएस सिस्टम के लिए प्रक्रिया जारी है। निविदाएं फिर से बुलाई गई हैं। टैक्स चोरी रोकने वाले इस सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जो टैक्स जमा नहीं कर रहे उन पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।