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‘बेघरों’ के लिए नगर निगम प्रबंधन ‘बेबस’ दो माह पहले अपर संचालक ने दिए थे निर्देश, अबतक शुरू नहीं हो पाया निर्माण

- खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर को मजबूर बेघरों के लिए केंद्र सरकार रहने-खाने, मनोरंजन और इलाज की व्यवस्था कर रही है। डूडा से संचालित राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना के तहत शहर के अंदर शेल्टर हाउस (आवास) बनाया जाना है। - इसके लिए जगह चिन्हित की जा चुकी है, लेकिन अबतक इस योजना पर नगर निगम काम शुरू नहीं कर पाया है। शहरी बेघरों के लिए आश्रय योजना का लाभ दिलाने के नाम पर सिर्फ डीपीआर ही बनकर तैयार हुआ है। - जानकारी के अनुसार प्रदेश के 55 नगरीय निकायों में दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी अजीविका मिशन अंतर्गत निर्माण होना है, जिसमें कटनी भी शामिल है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jul 21, 2019

owner of Damaged Houses will get the blessings from DMFT in bhilwara

owner of Damaged Houses will get the blessings from DMFT in bhilwara

कटनी. खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर को मजबूर बेघरों के लिए केंद्र सरकार रहने-खाने, मनोरंजन और इलाज की व्यवस्था कर रही है। डूडा से संचालित राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना के तहत शहर के अंदर शेल्टर हाउस (आवास) बनाया जाना है। इसके लिए जगह चिन्हित की जा चुकी है, लेकिन अबतक इस योजना पर नगर निगम काम शुरू नहीं कर पाया है। शहरी बेघरों के लिए आश्रय योजना का लाभ दिलाने के नाम पर सिर्फ डीपीआर ही बनकर तैयार हुआ है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 55 नगरीय निकायों में दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी अजीविका मिशन अंतर्गत निर्माण होना है, जिसमें कटनी भी शामिल है। पिछले साल 2018 में ही आश्रय गृह की स्वीकृति कटनी को मिल चुकी है। इसका निर्माण 79 लाख रुपये से बस स्टैंड में बने पुराने रैन बसेरा को तोड़कर बनाया जाना है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। नगर निगम के अफसरों की बेपरवाही से जनकल्याणकारी योजनाओं पर पलीता लग रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि अपर संचालक एवं अतिरिक्त राज्य मिशन संचालक (डे-एनयूएलएम) नगरीय प्रशासन एवं विकास मप्र द्वारा 1 मई को निर्देश जारी कर 5 मई तक प्रगति रिपोर्ट मांग थी, लेकिन अभी तक इस दिशा में पहल शुरू नहीं हो पाई।

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यह है योजना
'शहरी बेघरों के लिए आश्रय योजनाÓ नाम की इस योजना में गरीब बेसहारा लोगों को सरकार छत मुहैया करा रही है। इस योजना की खास बात यह है कि पात्र लाभार्थी को आवास उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, बल्कि शेल्टर हाउस बनाकर उन्हें सामूहिक रूप से रखा जाएगा। इस शेल्टर हाउस में एक साथ 100 लोग रह सकेंगेञ इसमें एक बड़ा हाल होगा। ग्राउंड फ्लोर पर पर्याप्त जगह न होने पर इसे दो या तीन मंजिल तक भी बनाया जा सकता है। इसमें चिन्हित लाभार्थियों के लिए अलग-अलग 50 वर्ग फीट की जगह निर्धारित रहेगी। एक अलमारी उपलब्ध कराई जाएगी। लाभार्थी उसमें अपना सामान रख सकेंगे। यह योजना मूल रूप से उन गरीब लोगों के लिए है जो लंबे अर्से से खुले आसमान के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं।

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खास-खास:
- शेल्टर हाउस में रहने वाले लाभार्थी को रहने के अलावा मनोरंजन और भोजन की भी सुविधा मिलेगी।
- हाल में एक टेलीविजन लगाया जाएगा, भोजन के लिए मेस की व्यवस्था रहेगी।
- लाभार्थियों को इलाज की भी सुविधा मिलेगी। चिकित्सीय उपचार और दवा भी नि:शुल्क मिलेगी।
- शेल्टर हाउस में ऐसे बेघर गरीब रखे जाएंगे, जो सार्वजनिक स्थानों पर गुजर-बसर कर रहे हैं।
- पात्र लाभार्थियों के चयन के लिए सर्वे कराया जाएगा। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, चौराहों आदि स्थानों को देखा जाएगा।

इनका कहना है
कुछ माह पहले 79 लाख रुपये से अधिक का डीपीआर बनाकर विभाग को भेजा गया है। बस स्टैंड के समीप पुराना रैन बसेरा को तोड़कर उसे विकसित करना है। नीचे मार्केट रहेगा और ऊपर शहरी बेघरों के लिए आश्रय योजना के तहत केंद्र रहेगा। शीघ्र काम शुरू कराया जाएगा।
राकेश शर्मा, कार्यपालन यंत्री नगर निगम।