20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP के इस मंदिर में हो रही देवी की अपने आप पूजा, रहस्य जानने जुटे पंडा-पुजारी, आप भी करें दर्शन

नवरात्र पर 3 गांवों में नहीं होती प्रतिमाओं की स्थापना, 5वीं सदी में चंदेल वंश के राजाओं ने कराया था मां शारदा मंदिर का निर्माण

2 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Mar 26, 2018

Sharda Temple Tigwan unique story in katni

Sharda Temple Tigwan unique story in katni

कटनी / स्लीमनाबाद. नौ दिनों समूचा जगत शक्ति की आराधना मैं लीन रहा है। अलसुबह से मां के दरबार मे जल चढ़ाने, आरती पूजन करने के लिए भक्तों की भीड़ मंदिरो में उमड़ रही है। शक्ति की कृपा भी भक्तो पर बरस रही है। हर गली, मोहल्ले, गांव में मां के पूजन का विशेष क्रम जारी है। लेकिन जिले के तीन गांव ऐसे है जहां आज भी शक्ति के विविध स्वरूपों में से एक शारदा मां की पूजा होती है। दुर्गा, काली सहित अन्य मां की अन्य प्रतिमाओं की स्थापना नही होती है। ये गांव बहोरीबंद तहसील के तिंगवा, अमगवां और देवरी। तिंगवा गांव में 5वीं सदी के चन्देलवंश से विराजी मां शारदा का पूजन होता है। इस मंदिर मे न सिर्फ अनूठे रहस्य समाये हुये है, बल्कि मंदिर की कलाकृति और नक्कासी आकर्षण का केंद्र है। मां शारदा ही क्षेत्र की प्रधान मानी जाती है। इसके चलते सदियों से इनके अलावा अन्य देवी की पूजा नही होती हमेशा मां के दर्शन -पूजन को यहां भक्तो का तांता लगा रहता है।

आज तक नही सुलझा रहस्य
जिस तरह मैहर धाम मैं प्रतिदिन आल्हा-ऊदल की पूजा विश्व विख्यात है। उसी प्रकार यहां मां का पूजन सुबह 4 बजे हो जाता है। लेकिन मां का पूजन कौन कर जाता है। यह रहस्य आज भी रहस्य ही बना हुआ है। गांव के लोगो का कहना है कि सुबह यहां मां शारदा का श्रृंगार जल और फूल चढ़ा मिलता है। इस आश्चर्य जनक रहस्य का आज तक पता नही चल पाया। मां शारदा को चढ़ाए जाने वाले जल में भी रहस्य समाये हुए है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन माताजी को ग्रामीणों के द्वारा जल चढ़ाया जाता है। लेकिन वह जल कहां जाता है, आज तक पता नही चल पाया है।

READ ALSO: 1857 की क्रांति के महायोद्धा राजा सरयूप्रसाद के वंशज की रानी सोमप्रभा ने सीएम को लिखी पाती, दिया बड़ा अल्टीमेटम

दूर-दूर से आते है श्रद्धालु
गांव के ग्रामीण भोलाराम पटेल, शिवराज सिंह पटेल, जौहर चौधरी ने बताया कि तहसील सहित जिले का यह प्रसिद्ध मंदिर है। देशभर में यह माता की सबसे बड़ी मूर्ति है। यहां पहुंचे श्रद्धालुओं की माता हर मनोकामना पूरी करती है। तहसील की रक्षक के रूप मे जानी जाने वाली माता के दर से संतान की मुराद पूरी होती है। वही ग्रामीणों ने बताया कि बारहमासी दिन-रात अखण्ड ज्योति प्रज्ववलित रहती है। मंदिर प्रांगण के अंदर से कोई भी वस्तु चोरी नही कर सकता है। यदि किसी ने कोई दुस्साहस किया तो उसे कठिन दंड भुगतना पड़ता है। यह मंदिर पुरातात्विक धरोहरों का बना हुआ है। इसके अलावा समूचे मंदिर प्रांगण में पुरातात्विक धरोहरें है। जिसकी नक्कासी आकर्षण का केंद्र है। वर्तमान मे यह स्थान पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इस ऐतिहासिक स्थान का विकास नही हो सका है।