
शिक्षक दिवस पर विशेष: ‘मेरी भी सुनो’ सार्थक पहल, स्कूल का परिणाम 100 फीसदी
कटनी. देश के महान शिक्षकों में से एक रहे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन की याद में लोग आज शिक्षक दिवस मना रहे हैं। शिक्षक ही एक ऐसा व्यक्ति है जो पूरे राष्ट्र का निर्माण करता है। जिले में भी ऐसे कई शिक्षक हैं जो अपनी पहल से समाज में अलग छाप छोड़ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं बहोरीबंद तहसील के हास्कूल रामपाटन में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक व प्रभारी प्राचार्य मनोज गर्ग की। जिन्होंने जबसे स्कूल में पदभार ग्रहण किया है स्कूल की दिशा और दशा बदल दी है। हर वर्ष 90 फीसदी से अधिक परीक्षा परिणाम आ रहा तो वहीं शैक्षणिक सत्र 2022-23 में 100 फीसदी परिणाम आने पर कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।
उल्लेखनीय कि शिक्षा विभाग 1998 में पदस्थ शिक्षक लगातार बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। 2011 से रामपाटन हाइस्कूल में पदस्थ हैं। स्कूल में वर्तमान में 234 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। पिछले सत्र में 152 बच्चे थे, इस सत्र में परिणाम के चलते दर्ज संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। कक्षा 10वीं का 100 फीसदी परिणाम आया था। यह इसलिए संभव हो सका, क्योंकि प्राचार्य मनोज गर्ग द्वारा स्कूल को परिवार की तरह चला रहे हैं। बच्चों को पाठ्यक्रम पूरा कराना, ब्लू प्रिंट के आधार पर तैयारी कराना यहां की विशेषता है। स्मार्ट क्लास से भी बच्चों को संवारा जा रहा है।
इन नवाचारों से मिली सफलता
स्कूल में ज्ञान दर्पण के माध्यम से बच्चों को अध्ययन कराया जा रहा है। बच्चों को बिना याद किए पूरा स्लेबस रटाया जाता है। शनिवार को मित्र पाती चलाई जाती है। विद्यार्थी अपने साथी एक सवाल करता है, उसमें वही प्रश्न पूछेगा जो याद होगा, ऐसे में बच्चों को खेल-खेल में उत्तर याद हो जाता है। एपीसी अभय जैन ने कहा कि ऐसे शिक्षकों की पहल से अन्य शिक्षकों को प्रेरणा मिलती है।
यह नवाचार हुआ था जिले में लागू
स्कूल में शिक्षक मनोज गर्ग ने ‘मेरी भी सुनो’ नवाचार शुरू किया, इसमें ब्लैक बोर्ड में कोई शिक्षक पढ़ा रहे हैं, या बच्चों के समझ में नहीं आया और शिक्षक बिना समझाए चले ग, बच्चे डर के कारण बच्चे नहीं बता पाते, लेकिन इस डर को खत्म किया गया। तो बच्चा ब्लैक बोर्ड में लिख देता है, कि शिक्षक ने यह सवाल नहीं समझाया। बाथूरम गंदा, परिसर गंदा होना या फिर यदि कोई समस्या है तो बच्चा ब्लैक बोर्ड में लिख देता है। प्राचार्य द्वारा उस समस्या का समाधान कराया जाता है। उससे बच्चे को प्रोत्साहित भी किया जाता है। तत्कालिन कलेक्टर विशेष गढ़पाले ने इसे पूरे जिले में लागू कराया था।
निराश्रित बेटियों को नि:शुल्क
शिक्षक मनोज गर्ग बेटी बचाव-बेटी पढ़ाव का भी संदेश दे रहे हैं। जिन बेटियों के माता-पिता नहीं हैं ऐसी दो बेटियों को कक्षा 12वीं तक नि:शुल्क अध्ययन कराया है। इसमें भी कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया है। शिक्षक का कहना कि यदि हम शिक्षक हैं तो हमारा नैतिक दायित्व है कि विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास हो, तभी सही मायने में हमारे शिक्षक होना चरितार्थ होगा। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखिये, शिक्षक के पद का पूरी जिम्मेदारी से एक गुरू की तरह पूरा निर्वहन करिये, शिक्षक बनना नौकरी नहीं बच्चों का भविष्य संवारने की नैतिक दायित्यों का निर्वहन है।
Published on:
05 Sept 2023 09:45 pm
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