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कटनी. किसानों से उपज खरीदने के लिए विभागों व प्रशासन द्वारा कई माह पहले तैयारी शुरू कर दी जाती है, लेकिन समाधान न निकाले जाने के कारण हर बार गंभीर समस्या बनती है। इस साल नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा मिलर्स से अनुबंध न किए जाने के कारण वे मिलिंग के लिए केंद्र से धान का उठाव नहीं कर रहे। हैरानी की बा बात तो यह है कि जिले में धान भंडारण के लिए 105 गोदाम हायर किए गए थे, जिनमें 3 लाख मैट्रिक टन भंडारण होना था, जो सभी फुल हो गए हैं, लेकिन अब विभाग जबलपुर जिले में धान भंडारण की तैयारी में है। ढीमरखेड़ा क्षेत्र की धान षडयंत्र के तहत जबलपुर में भंडारित कराने की तैयारी है। जबकि उपार्जन नीति के अनुसार सबसे पहले मिलर्स को धान दी जानी थी, इसके बाद गोदामों में रखने की योजना बनाई गई थी, लेकिन नागरिक आपूर्ति निगम ने मिलर्स से अनुबंध नहीं कर पाया।
कारोबारियों का कहना है कि शहर व जिले में सवा सौ से अधिक राइस मिलें संचालित हो रही हैं, 30 हजार मैट्रिक टन से अधिक धान मिलर्स के पास पहुंच सकती थी। मिलर्स को धान न देने के पीछे क्या चाल है, यह सबके समझ के परे है। बताया जा रहा है कि मिलर्स द्वारा सरकार से अपग्रेडेशन राशि की मांग की जा रही है, लेकिन नहीं दिए जाने के कारण मिलर्स हड़ताल पर हैं और धान का उठाव नहीं कर रहे। उल्लेखनीय है कि जिले में 62 हजार 585 किसानों से 4 लाख 75 हजार मैट्रिक टन धान उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। अबतक 43 हजार 586 किसानों से 3 लाख 61 हजार 764 मैट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। अब जो खरीदी हो रही है उसे रखने जगह नहीं है।
जिले के दो स्थानों पर ओपन कैब में धान भंडारित की गई है। इसमें बहोरीबंद और मझगवां ओपन कैब में भंडारित कराई गई है। यहां पर 50 हजार मैट्रिक टन धान का भंडारण कराया गया है। ये भी फुल हो गए हैं। वहीं दूसरे ओर जिले के समर्थन मूल्य के केंद्रों में 64 हजार 76 मैट्रिक टन धान का परिवहन शेष है।
जिले में 70 मिलें नागरिक आपूर्ति निगम में पंजीकृत हैं, लेकिन इस साल अभी तक सिर्फ 18 मिलर्स द्वारा 5 हजार 975 मैट्रिक टन धान मिलिंग करने के लिए अनुबंध किया गया है। इनमें से सिर्फ तीन तखतमल, मारुति, मम्मा फूड मिलर्स द्वारा उठाव किया जा रहा है।
खरीदी से पहले शासन-प्रशासन द्वारा की जाने वाली तैयारी के दावे धरे के धरे रहे गए। एक ओर जहां किसान स्लॉट बुक न होने, स्लॉट बुक होने के बाद तौल न होने, सिकमी किसानों के स्लॉट बुक न होने से तो परेशान हैं ही साथ ही केंद्रों में भंडारण अधिक हो जाने से परेशान हैं। उनके उपज की तौल नहीं हो पा रही। समिति स्तरीय खरीदी में 46 हजार 756 मैट्रिक टन धान परिवहन के लिए शेष है। गोदाम स्तरीय खरीदी में भी 5 हजार 254 मैट्रिक टन धान को सुरिक्षत कराया जाना शेष है।
समय पर भंडारण न होने के कारण किसानों का भुगतान भी अटका हुआ है। जानकारी के अनुसार 3 लाख 61 हजार 765 मैट्रिक टन धान खरीदी का भुगतान किसानों को 857 करोड़ रुपए किया जाना है। अबतक 530 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है, जबकि 326.55 करोड़ रुपए का भुगतान शेष है। डब्ल्यूएचआरए जारी न होने के कारण किसानों को समस्या हो रही है।
जिले में अब गोदाम खाली नहीं बची हैं, इसलिए जबलपुर में धान भंडारण कराने के लिए भोपाल मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है। धान को सुरक्षित कराने यह पहल की जा रही है।
Published on:
05 Jan 2026 08:55 am
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