
Training of organic agriculture in Tilak College
कटनी. तिलक कॉलेज में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजनान्तर्गत विद्यार्थियों को जैविक कृषि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जैविक कृषि पाठशाला नैगवां के संचालक रामसुख दुबे स्वरोजगार एवं स्वाववलंबन के लिए विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। पांच पत्ती काढ़ा जैविक कीटनाशक का प्रायोगिक प्रदर्शन विद्यार्थियों को कराया गया। इस दौरान ट्राइकोडर्मा विरडी का जैविक खेती में उपयोग, खेती में कीट एवं खरपतवार के कारण कई तरह के रोग व बीमारियां लगती हैं उनसे बचाव के बारे में जानकारी दी। जैविक खेती में फसलों में कीट एवं रोग कम लगते हैं। कीट रोग एवं बीमारियों से खतपतवार द्वारा 33 प्रतिशत रोगों से 26 प्रतिशत कीटों से 20 प्रतिशत भंडारण में 7 प्रतिशत चूहों द्वारा 6 प्रतिशत, अन्य कारण से 8 प्रतिशतक्षति होती है।
दी गई यह जानकारी
उगरा, उकठा जड़ सडऩ पौध गलन आदि रोगों की रोकथाम के लिए गौमूत्र के अतिरिक्त जैविक फफूंद नाशक दवा ट्राइकोडर्मा विरडी से बीज उपचार, रोपड़ी उपचार। भूमिउपचार, पौध उपचार, कन्द उपचार एवं जड़ उपचार के बारे में बताया। बीज उपचार के लिए 10 ग्राम प्रति किलो बीज, जड़, कंद उपचार के लिए 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से आवश्यकता अनुसार घोल बनाकर कंद, जड़ डुबाने के बाद निकालकर छाया में फैलाकर कुछ समय बाद भूमि में लगा देते हैं। भूमिउपचार के लिए 5 किलो ट्राइकोडर्मा विरडी को 100 किलो कम्पोस्ट में मिलाकर 1 हेक्टेयर भूमि में बोने से पहले जुताई के समय मिलाने की जानकारी दी गई।
Published on:
08 Mar 2020 12:00 pm
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