कटनी. शक्ति की उपासना का महापर्व शारदेय नवरात्र रविवार से शुरु हो गया है। अश्विन प्रतिपदा पर (Jalpa Devi) शहर के प्रमुख शक्तिपीठ मां जालपा मढिय़ा में अल (Shardeya Navratri) सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां को जल ढारने के लिए दूर-दूर से महिलाएं, युवतियां व पुरुष पहुंचे। मां के जयकारों के साथ विधि-विधान से पूजन अर्चन किया। (Navratra 2019) वहीं कलश स्थापना के साथ मां की विशेष आराधना की गई। इस मौके पर अखंड ज्योत की स्थापना की गई। दिनभर मां के दर्शनाथ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मां जालपा, मां कालका व मां शारदा के दर्शन कर लोगों ने प्रार्थना कर सुख-समृद्धि की कामना की। रात में मातारानी की विशेष आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। व्रत धारण करने वाले लोगों ने प्रथम दिवस मां शैलपुत्री का पूजन किया। वहीं देवी मंदिर व देवालयों में जवारा कलश स्थापना आदि को लेकर तैयारियां शुरु कर दी गई हैं। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिपदा से ही मां के विविध स्वरूपों की स्थापना समितियों के माध्यम से पंडालों में की जा रही है। बैठकी के अवसर पर कलाकारों के यहां से दिनभर मूर्ति लेजाकर स्थापना का क्रम जारी रहा। मां जालापा मंदिर सहित शहर के अन्य शक्तिपीठों में भी पूजन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा। शहर के नई बस्ती स्थित मां शीतला मंदिर, शहीद द्वार स्थित काली मंदिर, आदि शक्ति मंदिर, घंटाघर स्थित मंदिर सहित खेर माता व संतोषी माता मंदिर झंडाबाजार में खासी भीड़ रही। इसके साथ ही कुठला मंदिर, गाटरघाट स्थित जगदम्बा मंदिर, विश्राम बाबा स्थित काली मंदिर, भूमि प्रकट शारदा मंदिर बरगवां, आदिशक्ति मंदिर अशोक कॉलोनी, खेर माई मंदिर खिरहनी में भी पूजन का विशेष क्रम शुरू हो गया है। इस नवरात्र के अवसर पर हम आपको मां जालपा के प्राकट्योत्सव की कहानी बता रहे हैं जो बड़ी अद्भुत है।
9 हजार की सोलर लाइट में पंचायतों ने फूंके 33 हजार, इस जिले में हो गया करोड़ों का फर्जीवाड़ा
253 साल पुराना है इतिहास
लगभग 253 साल से माता रानी का कृपा बरस रही है। बारडोली की धरा विराजी मां जालपा शहर को न सिर्फ हर बला से बचातीं हैं बल्कि भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करतीं हैं। शहर का यह प्रमुख शक्तिपीठ है। यहां पर साल के 365 दिन मेले सा माहौल रहता है। नवरात्र पर्व पर मां की निराली छटा देखते ही बन रही है। कटनी शहर में स्थित मां जालपा मंदिर बहुत पुराना है। 253 वर्ष पुराने इस मंदिर का रहस्य भी अनूंठा है। पांचवी पीढ़ी के मंदिर के पुजारी लालजी पंडा ने बताया कि जहां पर माता रानी विराजी हैं यहां घनघोर जंगल हुआ करता था। यहां पर बांस का जंगल की बहुतायत थी और उन्हीं बांस के जंगल के बीच में मां जालपा विराजतीं थीं। पंडा के पूर्वज को माता ने स्वप्न दिया, जिसके बाद माता बांस के जंगल से प्रकट हुईं और आज उनकी महिला जिला ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में है।
मां के सेवा के लिए पहुंचे बिहारी
बताया जा रहा है सन 1766 में रीवा जिला निवासी बिहारीलाल को माता ने कटनी बुला लिया था। माता के आदेश का पालन करते हुए बिहारीलाल मां की सेवा में कटनी पहुंचे और बांस के जंगल में जाकर नित्य माता की सेवा करने लगा। धीरे-धीरे माता रानी की कृपा से शहर का कायाकल्प हुआ और माता की मढिय़ा के बाद भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर में माता की अखंड ज्योत, जवारे, कलश आकर्षण का केंद्र होते हैं। मां ज्वाला के रूप वाली मां जालपा की प्रतिमा सिल के आकार की है। पंडा बिहारीलाल ने पूर्ण विधि-विधान से माता की प्राणप्रतिष्ठा कराई। कुछ वर्ष बाद मंदिर का जीर्णोद्वार हुआ और फिर मंदिर में मां जालपा के साथ मा काली, शारदा की प्रतिमाएं भी स्थापित कराई गईं। मंदिर के बगल में हनुमानजी और भैरव बाबा भी विराजित किए गए।
मां 64 योगनियों की हुई स्थापना
2012 मंदिर का विशेष जीर्णोद्धार कराया गया। मंदिर के गुंबज, गेट, परिसर को आकर्षक बनाया गया है। मंदिर परिसर में पट्टाभिरामाचार्य महाराज के सानिध्य में 64 योगनियों की स्थापना कराई गई। नवरात्र के अलावा साल भर यहां भक्तों की भीड़ लगती है। गर्भगृह में विराजी मां जालपा और माता कालका, शारदा व जालपा की दिव्य छवि के दर्शन कर श्रद्धालुओं के जन्मजन्मांतर के पाप दूर हो रहे हैं। बिहारीलाल पंडा की पांचवी पीढ़ी की संतान लालजी पंडा मातारानी की सेवा में लगे हुए हैं।