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रीठी वन क्षेत्र में पहली बार दिखा राजगिद्ध, जिलेभर में 282 गिद्ध व 135 घोंसले

प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना में बढ़ी गिद्धों की संख्या, कैमोर की पहाड़ी, रीठी व कटनी वन परिक्षेत्र में मिले गिद्ध

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 23, 2026

Giddh

Giddh

कटनी. प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना 2025-26 के अंतर्गत शीतकालीन गणना पूरी होने के बाद कटनी वनमंडल से बेहद उत्साहजनक और उम्मीद जगाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। खास बात यह रही कि रीठी वन क्षेत्र में पहली बार रेड हेडेड वल्चर (राजगिद्ध) की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसे गिद्ध संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि वन विभाग द्वारा बीते वर्षों से किए जा रहे संरक्षण प्रयासों और जन-जागरूकता अभियानों का सकारात्मक परिणाम है।
डीएफओ गर्वित गंगवार के अनुसार वन विभाग द्वारा 20 फरवरी से 22 फरवरी तक सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक शीतकालीन गिद्ध गणना कराई गई। इस दौरान कटनी वनमंडल के विजयराघवगढ़ एवं रीठी वन परिक्षेत्र में कुल 282 गिद्ध पाए गए। इनमें 225 वयस्क और 57 अवयस्क गिद्ध शामिल हैं। इसके साथ ही कुल 135 घोंसले चिन्हित किए गए, जिनमें से 132 सक्रिय एवं 3 निष्क्रिय पाए गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले के वन क्षेत्र गिद्धों के लिए सुरक्षित प्रजनन स्थल बनते जा रहे हैं। डीएफओ के अनुसार पहले दिन 20 फरवरी की गणना में 203 गिद्ध, 21 फरवरी की गणना में 230 गिद्ध व तीसरे दिन 22 फरवरी की गणना में 282 गिद्ध दर्ज किए गए हैं।

प्रजातिवार ये हैं गिद्ध

गणना में विभिन्न प्रजातियों के गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई। जानकारी के अनुसार लॉन्ग बिल्ड गिद्ध 21, घमर (व्हाइट रम्प्ड) गिद्ध 236, इजिप्शियन गिद्ध 5, सफेद गिद्ध (इजिप्शियन) 12, देसी गिद्ध लॉन्ग बिल्ड 6, राज गिद्ध 2 पाए गए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या घमर (व्हाइट रम्प्ड) गिद्ध की रही, जिनकी संख्या 236 दर्ज की गई। कभी विलुप्ति के कगार पर मानी जाने वाली इस प्रजाति की बढ़ती संख्या को संरक्षण के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है। गणना के दौरान विजयराघवगढ़ क्षेत्र में 111 घोंसले, जबकि रीठी क्षेत्र में 24 घोंसले पाए गए। इससे स्पष्ट है कि इन क्षेत्रों में गिद्धों का प्रजनन सुरक्षित रूप से हो रहा है।

राजगिद्ध की यह है खासियत

रीठी वन परिक्षेत्र के बिलहरी कुम्हरवारा टैंक कैना और इमलाज क्षेत्रों में तीन दिनों की गणना के दौरान क्रमश: 12, 24 और 21 गिद्ध देखे गए। यहां चारों स्थानीय प्रजातियां लॉन्ग बिल्ड वल्चर, व्हाइट रम्प्ड वल्चर, इजिप्शियन वल्चर और रेड हेडेड वल्चर (राजगिद्ध) पाई गईं, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।

ऑनलाइन ऐप से हुई गणना

इस वर्ष गिद्ध गणना को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए पहली बार ऑनलाइन ऐप का उपयोग किया गया। लगभग 25 वन कर्मियों ने ऐप के माध्यम से आंकड़े दर्ज किए, जिससे रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया सरल और सटीक हुई। रीठी वन परिक्षेत्र अधिकारी महेश पटेल ने बताया कि गिद्धों की बढ़ती संख्या और पहली बार राजगिद्ध का दिखना इस बात का प्रमाण है कि संरक्षण, सुरक्षित पर्यावास और जागरूकता अभियानों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। यह उपलब्धि न केवल कटनी जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।