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पीएम ने किया यूनिट का शुभारंभ, 4 घंटे ही हो पा रहा यहां काम….

नगर निगम ने पडऱवारा में कचरे से खाद बनाने लगाई है ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई

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कटनी

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Mukesh Tiwari

Jun 30, 2018

Work hardly four hours in Unit

Work hardly four hours in Unit

कटनी. पांच दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंदौर से इ लोकार्पण कर शहर के पडऱवारा में लगाई गई कचरे से खाद बनाने की यूनिट का शुभारंभ किया था। 150 टन क्षमता की इकाई में रोजाना 10 से 15 टन जैविक खाद बनाई जानी है लेकिन शुरुआत से लेकर अभी तक यूनिट सिर्फ 3 से 4 घंटे ही काम कर पा रही है। इसके पीछे साधनों की कमी बताई जा रही है। हालांकि अभी शुरुआती प्रोसेस प्रारंभ की गई है, जिसमें लगभग एक माह बाद ही यूनिट से खाद उपलब्ध हो पाएगी। कटनी नगर निगम, सिहोरा नगर पालिका, नगर परिषद कैमोर, विजयराघवगढ़ और बरही को जोड़कर बनाई गई इकाई में अभी 120 टन के लगभग कचरा ही मिल पा रहा है और पांचों ही स्थानों पर घर-घर से कचरा उठाने के लिए निजी कंपनी की गाडिय़ां लगाई गई हैं।
पर्याप्त कचरा न मिलने की चर्चा
एक ओर प्लांट को कचरा कलेक्शन में रोजाना लगभग 120 टन कचरा मिलने की बात कही जा रही है तो दूसरी ओर पर्याप्त कचरा न मिलने की भी चर्चा है। जानकारों के अनुसार सिल्ट आदि को जोड़कर व गीला कचरा दिखाकर वजन बताया जा रहा है। नगर निगम द्वारा इकाई में कटनी निगम से रोजाना 75 से 80 टन, सिहोरा से 16 से 17 टन, कैमोर से 5 टन, बरही से 7 से 8 टन और विजयराघवगढ़ से 5 टन के लगभग कचरा प्लांट तक पहुंचने की बात कही जा रही है। जिसके लिए 64 गाडिय़ों डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के काम में लगी हैं।
चार प्रोसेस से गुजर रहा कचरा
इकाई में अभी तक रोजाना 50 प्रतिशत काम हो रहा है। चार प्रकार की प्रोसेस से गुजरने के बाद कचरे को जैविक खाद में बदलने का काम प्लांट में हो रहा है। प्लांट में दो वर्ष से अधिक समय का घरों से एकत्र किया गया लगभग 25 हजार टन कचरा स्टॉक में है। एक सप्ताह के अंदर दो शिफ्ट में काम कराते हुए पुराने कचरे से भी खाद बनाने का काम प्लांट में शुरू होगा।
विशेष-
- 150 टन कचरे की क्षमता की है इकाई
- अभी मिल पा रहा लगभग 120 टन कचरा
- 25 हजार टन से अधिक पुराने कचरे का है स्टॉक
- 35 करोड़ 39 लाख की लागत से बनाई गई है इकाई
- खाद के साथ ही आरडीएफ (ईंधन) का भी हो रहा निर्माण
- २० प्रतिशत काम में न आने वाले कचरे को भी डिस्पोज करने भी बनाया गया स्थान
- जैविक खाद बेचने सरकार व निजी कंपनियों से अनुबंध का प्रयास

इनका कहना है...
कुछ साधन बाहर से मंगाए हैं,जो दो या तीन दिन में पहुंच जाएंगेे। उसके बाद यूनिट आठ घंटे से अधिक काम करेगी। इसके अलावा पुराने कचरे से खाद सहित अन्य सामग्री का निर्माण करने दो शिफ्ट में काम कराया जाएगा। जैविक खाद किसानों को सब्सिडी में मिलेगी और सरकारी व निजी कंपनियों से अनुबंध का प्रयास भी किया जा रहा है।
नागार्जुन रेड्डी, प्रभारी एमएसडब्ल्यू

यूनिट की शुरुआत कराई गई है। शुरुआत मेें क्या परेशानी आ रही हैं, इसकी जानकारी ली जाएगी। जो भी कमी है, उसे दूर कराते हुए काम कराया जाएगा।
टीएस कुमरे, आयुक्त नगर निगम