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स्वरोजगार की चुनी राह, औरो को रोजगार देने के साथ युवक हर माह कमा रहा हजारों रुपए

युवक ने शुरू किया डेयरी का कारोबार, विद्या सागर योजन का लिया लाभ

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 02, 2018

Youth earning profit from Vidya Sagar scheme

Youth earning profit from Vidya Sagar scheme

कटनी. पशु पालन विभाग की विद्या सागर योजना कटनी के युवाओं के लिए कारगर सिद्ध हो रही है। युवा इस योजना का लाभ लेकर अब स्वरोजगार में लग रहे हैं। इतना ही नहीं इस उपक्रम से अन्य बेरोजगारों को रोजगार ? भी मिल रहा है। यह कहानी है कटनी के युवा पंकज सिंह बघेल की। बेरोजगारी से परेशान पंकज अपनी रुचि व्यवसाय में की। मध्यप्रदेश शासन द्वारा पशु पालन विभाग में चल रही आचार्य विद्या सागर योजना की जानकारी ली। इसके बाद पंकज ने विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर अपना आवेदन किया। जिसके बाद पंकज को भैंस के लिये डेढ़ लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। खुद हरियाणा के हिसार पहुंचकर पंकज अपनी डेयरी उद्योग के लिये मुर्रा नस्ल की 10 भैंसें लेकर आये। जहां कटनी जनपद अंतर्गत ग्राम टिकरवारा में डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की।

कमा रहे मुनाफा
युवक अब प्रतिदिन लगभग 80 लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन पंकज कर रहे हैं। जिससे पंकज को प्रतिमाह 22 हजार रुपये से अधिक की आमदनी भी हो रही है। इतना ही नहीं पंकज के इस प्रयास से गांव के पांच अन्य बेरोजगारों को भी रोजगार मिला है। जो कि डेयरी में कार्य कर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। पंकज ने बताया कि दुग्ध उत्पादन के साथ ही जैविक खाद के लिये भी काम करने की कार्य योजना उन्होने बनाई है। वे निकलने वाले गोबर की खाद का उपयोग बहरहाल अपने खेतों में कर रहे हैं। अधिक मात्रा में खाद बनने पर उसका विक्रय भी करेंगे।

गरीब आदिवासी परिवारों को मिले मालिकाना हक
कटनी. चाका बायपास अंबेडकर नगर में कई वर्षों से रह रहे गरीब आदिवासी परिवार के लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जमीन का मालिकाना हक दिए जाने सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग की है। मो. जावेद व शकील खान के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपकर समस्या समाधान के लिए मांग की। ज्ञापन में कहा कि लगातार सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा कहा जा रहा है गरीब, झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों को मालिकाना हक दिया जा रहा है, वहीं उन्हें उजाडऩे की कोशिशें हो रही हैं। गरीबों के घरौंदे तोड़कर उद्योगपतियों को जमीन कब्जाई जा रही है, जो गलत है। दलित, आदिवासियों को खसरा नं. १६१, रकबा नं. १.६५९ हे. भूमि शासकीय मद की है जो खाली है। उसे आबादी घोषित कर आदिवासियों को उसमें मालिकाना हक दिए जाने मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान कुंवरिया बाई, जानकारी बाई, प्रेम बाई, चंदा बाई आदिवासी, चमेली बाई आदिवासी, कृष्ण , चूंटी, जिठिया बाई, रानी बाई, धूर्री बाई, धनीश बाई, लक्ष्मी बाई सहित बड़ी संख्या में महिला व पुरुषों की उपस्थिति रही।