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INDEPENDENCE DAY: मौलाना लियाकत अली, जिनके नाम से खौफ खाती थी अंग्रेजी हुकूमत

1857 की बगावत में मौलाना लियाकत अली अंग्रेजों को नांकों चने चबवाए थे, इलाहाबाद में चलाई थी खुद की सरकार।

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Liyaqat Ali

लियाकत अली

शिवनंदन साहू
कौशांबी. जंग-ए-आजादी के दीवानों का नाम लिया जाय और महान क्रांतिकारी मौलाना लियाकत अली का नाम जेहन मे न आए मुमकिन नहीं| कौशांबी (तब इलाहाबाद) के महगांव मे जन्मे मौलाना लियाकत अली ने 1857 मे आजादी की क्रांति मे शामिल हो इलाहाबाद शहर मे तमाम अंग्रेज़ों को मार कर खुद की सरकार चलायी थी। ऐतिहासिक खुसुरों बाग को अपना केंद्र बना कर मौलाना लियाकत अली ने कई दिनों तक अंग्रेजी हुकूमत को नाकों चने चबवा दिये थे| देश की आजादी के इस दीवाने मौलाना का साथ इलाहाबाद के पंडों ने बाखूबी दिया था| मौलाना की जनशक्ति के आगे अंग्रेजी हुकूमत की ताकत कमजोर पड़ने लगी तब कर्नल नील जैसे क्रूर अधिकारी को क्रांतिकारियों की आवाज को दबाने के लिए इलाहाबाद भेजा गया। अंग्रेजी हुकूमत ने मौलाना लियाकत को मुंबई से गिरफ्तार कर काला पानी की सजा देकर अंडमान की जेल मे भेज दिया, जहां आज भी उनकी मजार बनी हुई है।

इलाहाबाद में चलायी अपनी सरकार
महगांव मे जन्मे मौलाना लियाकत अली बचपन से ही देश की आजादी का सपना देखते थे। परिवार के लोग भी मौलाना के इस सपने को साकार होता देखना चाहते थे। 1857 मे की महान क्रांति की ज्वाला जब इलाहाबाद पहुंची तभी मौलाना लियाकत अली इस कदर मुखर हुये की क्रांतिकारियों ने उन्हें अपना नेतृत्व सौंप दिया। जंगे आजादी के इस दीवाने ने अपने साथियों के साथ मिल कर इलाहाबाद की कोतवाली पर क्रांति का परचम फहरा दिया। इसके बाद तमाम अंग्रेज़ सैनिको को मार कर इलाहाबाद के कई मुहल्लों को अंग्रेजी सरकार की हुकूमत से आजाद कराते हुये ऐतिहासिक खुसरो बाग से खुद की हुकूमत चलनी शुरू कर दी, जो अंग्रेज़ सरकर के खिलाफ थी।

अंग्रेजों ने भेजे दो खूंखार अधिकारी

सैनिकों की बगावत व मौलाना लियाकत अली की बहदुरी को देख अंग्रेजी हुकूमत ने दो अधिकारियों को देशी सैनिकों की पल्टन के साथ इलाहाबाद भेजा, पर देशी पल्टन ने क्रांतिकारियों के खिलाफ हथियार उठाने से मना कर दिया। पूरा इलाहाबाद शहर बगावत की चपेट मे आ गया और विद्रोही सैनिकों ने कई अंग्रेजी अफसरों को मौत के घाट उतार उनका भारी खजाना लूट लिया। इलाहाबाद मे क्रांति की खबर अंग्रेजी हुकूमत ने कर्नल नील जैसे क्रूर अधिकारी को भेजी। कर्नल नील ने इलाहाबाद के किले से बगावत कर रहे सैनिकों व मौलाना लियाकत के खिलाफ कमान सम्हाली। गोरे, सिख और मद्रासी सिपाहियों के साथ क्रांतिकारियों को पकड़कर उन्हे फांसी पर लटकाया जाने लगा।

मुंबई में पकड़े गए मौलाना, हुई काला पानी की सजा

सैकड़ों क्रांतिकारियों को मौत की सजा देकर अंग्रेजी सरकार ने इलाहाबाद पर फिर से कब्जा पा लिया। इस दौरान मौलाना लियाकत अली कानपुर के रास्ते मुंबई जा पहुंचे। इस बीच मौलाना पर पांच हजार रुयपये का इनाम भी घोषित किया गया। मुंबई मे मौलाना को गिरफ्तार कर कालापानी की सजा देकर अंडमान की सेल्यूलर जेल भेज दिया गया। जेल मे ही मौलाना ने अंतिम सांस लिया। उनकी कब्र आज भी वहां बनी हुई है। देश की आजादी के लिए मौलाना लियाकत अली शहीद हो गए लेकिन देश की सरकार ने उनके लिए कुछ भी नहीं किया।

सरकारी उपेक्षा का शिकार है जन्मस्थान

उनका जन्मस्थान महगांव आज भी उपेक्षित है। मौलाना का वह घर जहां उन्होंने जन्म लिया वह खंडहर हो गया है। महंगाव के अन्नू जाफरी बताते हैं कि मौलाना के नाम पर महगांव मे सिर्फ एक कालेज है। देश की आजादी के लिए जान न्योछावर करने वालों के लिए सरकार तमाम तरह की सुविधाओं का ऐलान भले ही कर रही है, लेकिन मौलाना के परिजन आज भी सरकारी सुविधाओं के मोहताज हैं| देश ही नहीं जिले के लोग भी मौलाना की शहादत को लगभग भूलते जा रहे हैं।

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