
इस सड़क में हैं मौत का साया, अब तक 1206 लोगों ने गवाई अपनी जान
कवर्धा . छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में आए दिन-रात जिले की सड़के खून से लाल हो रही हो है। सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही है, लेकिन यह हादसे नहीं, बल्कि हत्या है। और यह हत्या हर तीसरे-चौथे दिन हो रही है।
अक्सर हत्या को हर कोई गंभीरता से लेते हैं सड़क हादसों को नहीं। जबकि सड़क हादसों में अधिक लोगों की मौत हो जाती है और यह मौत स्वभाविक नहीं होती। कहीं न कहीं किसी की लापरवाही से ही होती है। सड़क हादसों को हत्या भी माना जा सकता है। पिछले पांच वर्ष के आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि केवल सड़क दुर्घटनाओं में 1206 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि इस पांच साल में 79 हत्याएं हुई। मतलब हत्या से 12 गुना अधिक मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है। इन आंकड़ों से लोगों को सबक लेने की जरूरत है। जबकि पुलिस विभाग द्वारा जागरुकता अभियान भी चलाती है।
सड़क दुर्घटनाओं से मृत्यु वर्ष महिला पुरुष कुल
| 2014-15 | 106 | 202 | 308 |
| 2015-16 | 107 | 175 | 282 |
| 2016-17 | 99 | 166 | 265 |
| 2017-18 | 97 | 201 | 298 |
| 2018-19 | 18 | 39 | 53 |
कुल 423 783 1206
20 मई का वह दिन तो याद ही होगा, जब चिल्फी में मेटाडोर पलटा और 7 लोगों ने अपनी जान गवां दी। जबकि 28 लोग घायल हो गए थे। कितने परिवार उजड़ गए और कितने लोग बेसहारा हो गए। यह कोई हादसा नहीं, हत्या ही थी जो लापरवाही के चलते किया गया। यह हालात रोजाना ही गांव-शहर में दिखाई देते हैं, जब मेटाडोर, टैक्टर, पिकअप जैसे खुले मालवाहकों में सवारी ढोई जाती है। मतलब ऐसी हत्याएं और कभी भी हो सकती है। लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2014-15 से 18-19 तक कुल 1206 लोगों की मौत हुई। इसमें 783 पुरुष और 423 महिलाएं शामिल हैं। पुरुष की संख्या इसलिए अधिक है क्योंकि अधिकतर वाहन पुरुष ही चलाते हैं। मतलब वह वाहन चालक हो या फिर सवारी के रूप में। वहीं अधिकतर माहिलाओं की मौत वाहनों की चपेट में आने से हुई।
इस वित्तीय वर्ष मतलब अप्रैल और मई केवल दो माह में ही 53 लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई। इसमें 14 महिला और 39 पुरुष थे। वहीं हत्याओं की बात करें तो इस दो माह दो हत्याएं हुईं। मतलब साफ है कि लोग वाहन चलाते समय बेपरवाह हो जाते हैं। इसके चलते ही आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की हत्याएं हो रही हैं।
ग्रामीण जानते तो हैं कि उन्हें मालवाहक में सवारी नहीं करनी चाहिए, लेकिन इसके प्रति जागरुक नहीं है। इसके लिए उन्हें जागरुक करने की आवश्यकता है। शहर सहित सभी थाना क्षेत्र अंतर्गत माहवाहकों पर सवारी ढोई जाती है, इस पर लगाम कसी जाए। केवल चालान काटकर इतिश्री न कर वाहनों को कम से कम एक दिन के लिए जब्त किया जाए। जिनती बार पकड़ा जाए उतने बार कार्रवाई हो, तब कहीं जाकर इनकी लापरवाही कम होगी।
Published on:
15 Jul 2018 11:03 am
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