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मतदाता सूची में बड़ी लापरवाही, पति-पत्नी को अलग-अलग वार्ड में किया शिफ्ट, अब जाएंगे हाईकोर्ट

CG Voter ID List: लगभग 200 से 250 मतदाताओं को बैगर सूचना दिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड पर स्थानांतरित कर दिया गया। साथ ही ग्राम पंचायत के वार्डों में मतदाताओं के बीच...

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

CG Voter ID List: परिसीमन के दौरान कर्मचारियों के बड़ी लापरवाही की। मनमाने ढंग से लोगाें के वार्ड ही बदल किए गए। दावा आपत्ति किया गया उसे भी खारिज कर दिया गया। परेशान मतदाता हाईकोर्ट पहुंचे। वहां से अंतिम प्रकाशन पर रोक लगाने के आदेश जारी हुए, जिसके बाद भी अधिकारियों द्वारा मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। अब मतदाता फिर से हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना मामले में कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

CG Voter ID List: वोटरों को दूसरे वार्ड में कर दिया शिफ्ट

मामला ग्राम पंचायत सूखाताल जनपद पंचायत कवर्धा का है। यहां पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के प्रथम प्रकाशन में सचिव द्वारा लगभग 200 से 250 मतदाताओं को बैगर सूचना दिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड पर स्थानांतरित कर दिया गया। साथ ही ग्राम पंचायत के वार्डों में मतदाताओं के बीच व्यापक असमानता जैसा की वार्ड क्रमांक 6 में मात्र 34 मतदाता, वार्ड क्रमांक 8 में 198 मतदाता और वार्ड क्रमांक 15 में भी 198 मतदाताओं का वार्ड बनाकर वार्डों का सीमा ही बदल दिया गया जबकि वार्ड परिसीमन का किसी भी प्रकार का कोई भी आदेश ही नहीं है।

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CG Election: जानकारी मिलने पर ग्रामवासियों द्वारा नियत तिथि में दावा-आपत्ति भी किया गया था। जिसे उच्च अधिकारी ने ख़ारिज कर दिया। मामला तो तब और हद हो जाता है जब पति का नाम वार्ड क्रमांक 11 सरल क्रमांक 1038 गृह क्रमांक 151 क रामशरण पिता महेश वर्मा के नाम दर्ज है। उनकी पत्नी रंजीता वर्मा द्वारा आवेदन देकर अपने पति के साथ वार्ड नं.11 में नाम जोड़े जाने का आवेदन दिया गया तब एईआरओ द्वारा आवेदक वार्ड नं. 10 में निवासरत होने सचिव के अनुशंसा के आधार पर ख़ारिज किया गया, लिखकर विधिवत आवेदन को निरस्त कर दिया गया। इस तरह पति और पत्नी को अलग-अलग वार्डों में रखा गया।

नियमों का नहीं किया पालन और..

इन्हीं सब विषयों को लेकर कपिश्वर साहू, गजेन्द्र वर्मा, रंजीता वर्मा सहित अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका प्रस्तुत अधिवक्ता प्रतीक सिंह ठाकुर द्वारा किया गया था। इस पर उच्च न्यायालय के आदेश 11 दिसंबर 2024 को याचिकाकर्ता का आवेदन का निराकरण करने के बाद ही अंतिम प्रकाशन किए जाने का आदेश पारित किया गया था। किन्तु आदेश का किसी भी प्रकार का पालन किए बैगर ही अंतिम प्रकाशन कर दिया गया। अब याचिकाकर्ताओं द्वारा पुन: उच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर चुके हैं।