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जिस नहर से खेतों में होती थी सिंचाई वो पड़ी है जर्जर, किसानों को सता रहा फसल बर्बाद होने का डर

गांव के नहर रखर-खाव व मरम्मत के अभाव में क्षतिग्रत हो चुके हैं

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kawardha

जिस नहर से खेतों में होती थी सिंचाई वो पड़ी है जर्जर, किसानों को सता रहा फसल बर्बाद होने का डर

बरबसपुर. जिले के अधिकांश गांवों में सिंचाई के लिए कृत्रिम साधन पर निर्भर रहता है। इसके लिए बकायदा माईनर से ग्रामीण को नहर के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचता है, लेकिन कई गांव के नहर रखर-खाव व मरम्मत के अभाव में क्षतिग्रत हो चुके हैं, जिससे पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

ग्राम बीजाझोरी नाला से लाखों रुपए खर्च कर बीजाझोरी नहर नाली का निर्माण किया गया। ताकि ग्रामीण किसाों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। छोटे नहर नाली निर्माण सालों पहले हुआ था। समय समय पर मरम्मत व कांक्रीट नहीं होने के कारण नहर नाली पुल जगह जगह टूट गए है। वहीं बन कचरों से पूरी तरह ढका हुआ है, जिसकेकारण खेतों तक पानी जाना संभव नजर नहीं आ रहा है।

किसानों को सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस नहर नाली से बीजाझोरी और बरबसपुर के सैकड़ों किसान अपने फसलों की सिंचाई करते हैं। नहर निर्माण के समय किसानों में उम्मीद जाग गई थी। किसानों को लगा कि उनकी खरीफ की फसल समय पर पानी मिलने के कारण लहलहा उठेगा। जल संसाधन विभाग के उदासीनता के कारण नहर क्षतिग्रस्त होने लगे हैं।

सूखे से निजात पाने के लिए माईनर के माध्यम से गांवों तक नहर के माध्यम से पानी पहुंचने की योजना था। इस नहर के पानी से कई एकड़ भूमि को सिंचाई के पानी मिल सकता है, लेकिन विभाग की उदासीन रवैए के कारण पानी गांव तक नहीं पहुंच पा रही है। किसानों ने कच्ची नहर नाली को पक्का बनाए जाने की मांग की है। ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। किसानों को सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।