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एक माह के भीतर छत्तीसगढ़ के ये सात आंगनबाड़ी बनेंगे स्मार्ट, कई नई योजनाओं की मिलेगी सौगात

1571 आंगनबाड़ी केन्द्रों में से 100 केन्द्रों को एक माह के भीतर स्मार्ट आंगनबाड़ी केन्द्र बनाया जाएगा

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एक माह के भीतर छत्तीसगढ़ के ये सात आंगनबाड़ी बनेंगे स्मार्ट, कई नई योजनाओं की मिलेगी सौगात

कवर्धा. बच्चों और महिलाओं से संबंधित एक नहीं अनेक योजनाएं संचालित हो रही है। इस योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक माह के भीतर जिले के एक सौ आंगनबाड़ी केन्द्र स्मार्ट बनेंगे।

जिले में संचालित 1571 आंगनबाड़ी केन्द्रों में से 100 केन्द्रों को एक माह के भीतर स्मार्ट आंगनबाड़ी केन्द्र बनाया जाएगा। इसके लिए निर्धारित सभी मापदण्डों को ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव के सहयोग से पूरा किया जाएगा। स्मार्ट आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए स्वयं का भवन, शौचालयए, पेयजल, वाटर फिल्टर, किचन गार्डन के लिए स्थान, बाउंड्रीवाल, फर्नीचर, गैस कनक्शन व विद्युत कनेक्शन होना अनिवार्य है। वहीं कलक्टर ने जिन आंगनबाड़ी केन्द्रों में आंतरिक विद्युतीकरण हो गया है, उसकी सूची तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। ताकि बिजली विभाग से शीघ्र कनेक्शन दिला सके। सभी स्मार्ट आंगनबाड़ी केन्द्रों में एलईडी टीवी, फर्नीचर व वाटर फिल्टर उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य केन्द्रों और आंगनबाड़ी केन्द्रों के जरिए विभिन्न योजनाओं के तहत बच्चों और महिलाओं को अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए पहल की जा रही है। कलक्टर अवनीश कुमार शरण ने स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त बैठक लेकर योजनाओं की समीक्षा की। आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों, गर्भवती व शिशुवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पौष्टिक आहार सहित विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ताकि महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

कलक्टर ने जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में जहां चार पहिया वाहन पहुंचने में दिक्कत होती है उन क्षेत्रों में स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से आपात स्थिति में सुरक्षित प्रसव व नवजात बच्चों की ईलाज के लिए शुरू किए गए बाईक एम्बुलेंस की भी समीक्षा की। बैठक में बाईक एम्बुलेंस के प्रचार-प्रसार करने और बाईक एम्बुलेंस चालक का नाम व मोबाईल नम्बर महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी परियोजना अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों को उपलब्ध कराया गया। ताकि इसकी जानकारी हितग्राहियों को मिल सके और लाभ लिया जा सके।

इधर कलक्टर ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विकासखंडवार समीक्षा कर लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धि हासिल करने के लिए निर्देश दिए। बैठक में सीएचएमओ ने बताया कि जिले में डेंगू, मलेरिया से किसी की मौत नहीं हुई है। डेंगू मलेरिया के 1397 मरीजों की जांच में 61 मरीजों में एनएस वन के लक्षण पाए जाने पर उसे नियंत्रित कर लिया गया। डेंगू मलेरिया से बचने के लिए लगातार शिविरों का आयोजन, रैली व दीवार लेखन के माध्यम से जन जागरूकता लाए गए। टीकाकरण का छिडक़ाव व जिले में 80 हजार 477 मच्छरदानी का वितरण किया गया।