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डेंगू का इलाज करने निजी अस्पताल नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, सीधे कर रहे रेफर

स्वास्थ्य विभाग भी निजी अस्पताल जानकारी एकत्रित करने में रूचि नहीं ले है
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कवर्धा

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Deepak Sahu

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Updated: 10 Sep 2018, 4:25 PM IST

dengue

डेंगू का इलाज करने निजी अस्पताल नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, सीधे कर रहे रेफर

कवर्धा . शहर सहित गांवों से भी डेंगू के संभावित मरीज निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन अधिकतर निजी अस्पताल इसकी रिपोर्ट ही नहीं बना रहे। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी निजी अस्पताल जानकारी एकत्रित करने में रूचि नहीं ले है।

अभी निजी अस्पतालों में मरीजों की कतार लगी है। जांच करने पर कई डेंगू के संभावित मरीज भी मिल रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक सप्ताह पूर्व अचानकपुर की महिला की तबियत बिगडऩे पर कवर्धा के ही निजी अस्पताल में ब्लड जांच कराया गया। प्रारंभिक जांच में डेंगू संभावित मिली। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिल चुकी थी, लेकिन उन्होंने इसमें कोई रूचि नहीं ली। मरीज परिजनों के साथ ईलाज के लिए रायपुर चली गई, जहां उसकी मौत हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग मौत का कारण हार्ट ब्लॉक बता रहे हैं।

निजी अस्पताल से डेंगू मरीजों की पूर्ण रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी जा रही है। न ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारी अधिकारी रिपोर्ट लेने में रूचि दिखा रहे हैं। इसके विपरित निजी अस्पताल के संचालक और डॉक्टर डेंगू के संभावित मरीज मिलते ही खुद ईलाज करने के बजाए रायपुर रेफर कर देते हैं ताकि उन्हें रिपोर्ट न देनी पड़े। शहर के कई निजी अस्पताल में डेंगू के कई पॉजीटिव मरीज मिल चुके हैं, जिन्हें रायपुर रेफर किया गया।

शहर के कई निजी अस्पताल डेंगू के संभावित मरीज मिलने पर रेफर कर देते हैं, लेकिन साथ उसका ब्लड जांच रिपोर्ट नहीं दिया जाता। ब्लड सेंपल और जांच रिपोर्ट देंगे तो पता चल जाएगा कि उक्त कहां से क्या बीमारी है। इसलिए कुछ और बीमारी बताकर रेफर किया जाता है। कवर्धा रायपुर ऐसे कई मरीजों को रेफर किया जा चुका है।

शहर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाया जा रहा है। ४५ से अधिक डेंगू के संभावित मिल चुके हैं। इसमें से १५ मरीज तो पॉजीटिव मिले। इसमें सभी का उपचार हो चुका है। वहीं जो संभावित मरीज मिलते जा रहे हैं उनका भी उपचार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह निजी अस्पताल से ब्लड जांच की रिपोर्ट लें। वहीं रेफर करने का कारण भी स्पष्ट होना चाहिए, ताकि पता चले कि किस मरीज को क्या बीमारी है। निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग बचने की कोशिश में है।

डॉ. केके गजभिए, सीएचएमओ